दिल्ली में भव्य छठ महापर्व की वापसी: यमुना तटों पर विशेष तैयारियां
राजधानी दिल्ली इस बार छठ महापर्व को लेकर एक अभूतपूर्व उत्साह का गवाह बन रही है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने एक महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए बताया है कि वर्षों के प्रतिबंध के बाद, इस बार यमुना नदी पर छठ पूजा करने की अनुमति दे दी गई है। अब श्रद्धालु यमुना के पावन घाटों पर सूर्यदेव को अर्घ्य दे सकेंगे। दिल्ली सरकार ने न केवल छठ पूजा की अनुमति दी है, बल्कि इसे भव्य और सुरक्षित बनाने के लिए 1000 से अधिक स्थानों पर व्यापक तैयारियां शुरू कर दी हैं।

वर्षों बाद यमुना पर छठ पूजा की अनुमति
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व में यह छठ महापर्व दिल्ली के इतिहास में एक नई मिसाल कायम करने वाला है। सरकार का लक्ष्य केवल पूजा का आयोजन नहीं, बल्कि श्रद्धालुओं के लिए एक सुरक्षित, स्वच्छ और सांस्कृतिक वातावरण तैयार करना है। दिल्ली सरकार के मंत्री मजिंदर सिंह सिरसा ने बताया कि यह 27 साल बाद ऐसा मौका आया है, जब श्रद्धालु यमुना घाटों पर निर्बाध रूप से पूजा कर सकेंगे। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस बार की छठ पूजा उतनी ही भव्य होगी, जितनी इस बार दिवाली थी।
छठ पूजा को दिवाली जैसा भव्य बनाने का लक्ष्य
दिल्ली सरकार ने छठ व्रतियों और उनके परिवारों के स्वागत के लिए बड़े स्तर पर तैयारियां की हैं। पिछले साल जहां केवल 929 जगहों पर छठ पूजा का आयोजन हुआ था, वहीं इस बार 1000 से अधिक समितियों ने आयोजन की अनुमति मांगी है। यह दर्शाता है कि इस बार दिल्ली में छठ उत्सव का पैमाना अब तक का सबसे बड़ा होने वाला है।
यमुना घाटों पर आस्था और रौनक की वापसी
दिल्ली के प्रमुख घाटों जैसे आईटीओ, कालिंदी कुंज, वजीराबाद, मयूर विहार, गीता कॉलोनी, सोनिया विहार और उस्मानपुर पर छठ पूजा की तैयारियां जोरों पर हैं। सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग, लोक निर्माण विभाग और नगर निगम की टीमें लगातार घाटों का निरीक्षण कर रही हैं। श्रद्धालुओं को स्वच्छ जल में पूजा करने का अवसर मिले, यह सुनिश्चित करने के लिए विशेष उपाय किए जा रहे हैं:
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- घाटों की मिट्टी को समतल किया जा रहा है।
- जल स्तर बढ़ाने के लिए नालों और ड्रेनों को साफ किया जा रहा है।
- पानी की गुणवत्ता पर विशेष निगरानी रखी जा रही है।
इसके साथ ही, प्रशासन की ओर से श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा के लिए निम्नलिखित व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जा रही हैं:
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- प्रकाश व्यवस्था
- टेंट
- स्वच्छ पेयजल
- सुरक्षा बल
- एम्बुलेंस
- फायर सेफ्टी
- मोबाइल टॉयलेट
जिन स्थानों पर प्राकृतिक घाट उपलब्ध नहीं हैं, वहां अस्थायी छठ स्थल भी तैयार किए जा रहे हैं ताकि कोई भी श्रद्धालु इस महापर्व को मनाने से वंचित न रहे।

श्रद्धालुओं के लिए राहत: एफआईआर वापसी की घोषणा
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने एक और महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए बताया कि पिछली सरकारों के समय यमुना पर छठ मनाने वालों के खिलाफ दर्ज की गई एफआईआर अब वापस ली जाएंगी। उन्होंने स्पष्ट किया, “हमारे शासन में श्रद्धालुओं पर किसी भी प्रकार की कार्रवाई नहीं की जाएगी। जो भी मामले पहले दर्ज किए गए थे, उन्हें रद्द करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।” यह ऐतिहासिक फैसला उन हजारों परिवारों के लिए बड़ी राहत लेकर आया है, जो पहले यमुना घाट पर पूजा करने के कारण कानूनी झंझट में फंस गए थे।
17 मॉडल छठ घाटों का निर्माण और व्यापक इंतज़ाम
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बताया कि यमुना नदी के तटों पर कुल 17 मॉडल छठ घाट बनाए जा रहे हैं। ये घाट अन्य स्थलों के लिए एक उदाहरण के रूप में कार्य करेंगे और इनमें अत्याधुनिक सुविधाएं होंगी:
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- अत्याधुनिक लाइटिंग और साउंड सिस्टम
- स्वच्छ पेयजल की पर्याप्त व्यवस्था
- सुरक्षा बलों की पर्याप्त तैनाती
- सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के लिए विशेष मंच
उन्होंने कहा, “हमारी सरकार ने वह प्रतिबंध हटा दिया है जो पहले की सरकारों ने लगाया था। अब श्रद्धालु यमुना घाट पर खुले मन से छठ मना सकेंगे।” दिल्ली के हर जिले में कम से कम एक आदर्श घाट विकसित किया जा रहा है, ताकि अधिक से अधिक लोग इस आस्था के पर्व को गरिमापूर्ण ढंग से मना सकें।
इसके अतिरिक्त, कला, संस्कृति और भाषा विभाग के तहत भोजपुरी और मैथिली भाषाओं में सांस्कृतिक कार्यक्रमों की एक श्रृंखला तैयार की गई है। लोक कलाकारों द्वारा छठ के पारंपरिक गीतों और नृत्यों का प्रदर्शन होगा, जिससे यह महापर्व केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि पूर्वांचल की समृद्ध संस्कृति और लोक परंपरा का महोत्सव बनकर उभरेगा। जगह-जगह भव्य स्वागत द्वार, फूलों की सजावट और पुष्पवर्षा के साथ छठ व्रतियों का स्वागत किया जाएगा।

स्वच्छता, सुरक्षा और पर्यावरण पर विशेष ध्यान
दिल्ली सरकार छठ महापर्व के दौरान स्वच्छता और सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। मुख्यमंत्री ने बताया कि राजधानी में चल रहे विशेष स्वच्छता अभियान के तहत सांसद, विधायक और पार्षद अपने-अपने क्षेत्रों के घाटों पर जाकर सफाई की निगरानी कर रहे हैं। एमसीडी और एनडीएमसी को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि पूजा से पहले हर घाट की कीचड़ सफाई, जल शुद्धि और लाइटिंग का काम पूरा हो।
यमुना की स्वच्छता और वायु गुणवत्ता पर सरकारी प्रयास
यमुना के जल प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांटों की क्षमता बढ़ाई जा रही है। साथ ही, औद्योगिक इकाइयों और ड्रेनों से निकलने वाले अपशिष्ट जल पर भी सख्त निगरानी रखी जा रही है। मुख्यमंत्री ने कहा, “सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि श्रद्धालु स्वच्छ जल में खड़े होकर पूजा-अर्चना करें।”
दिल्ली की वायु गुणवत्ता को लेकर भी मुख्यमंत्री ने संतोष व्यक्त किया। उन्होंने बताया कि इस बार दिवाली के बाद प्रदूषण स्तर में कमी आई है। “हमने देखा कि दिवाली के अगले दिन भी AQI पहले से कम रहा। इसका मतलब है कि प्रदूषण घटाने के लिए हमारी कोशिशें सफल हो रही हैं।” सरकार द्वारा लगाए गए ग्रीन फिल्टर, इलेक्ट्रिक बसें और सड़क धूल नियंत्रण उपाय अब असर दिखा रहे हैं। इसके अतिरिक्त, यमुना के किनारे विकसित की जा रही हरित पट्टियां आने वाले समय में दिल्ली की हवा को और स्वच्छ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।
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