जगतगुरु रामभद्राचार्य फिर विवादों में,’WIFE’ की व्याख्या दी इससे पहले राम मंदिर कार्यक्रम में न बुलाए जाने पर जताई थी नाराज़गी

रामकथा और अध्यात्म की दुनिया में बड़ा नाम माने जाने वाले कथावाचक जगतगुरु रामभद्राचार्य एक बार फिर सुर्खियों हैं। इस बार वजह किसी कथा का हिस्सा नहीं, बल्कि उनकी नाराज़गी है। हाल ही में अयोध्या में हुए राम मंदिर ध्वजारोहण कार्यक्रम में उन्हें आमंत्रित नहीं किया गया। इसी बात को लेकर उन्होंने खुलकर अपना असंतोष जताया है।
‘WIFE शब्द को लेकर व्याख्या पर उठा विवाद
ध्वजारोहण वाले विवाद के बीच, उनका एक पुराना वीडियो फिर वायरल हो गया जिसमें उन्होंने ‘WIFE’ शब्द का विस्तार ‘Wonderful Instrument For Enjoyment’ बताकर महिलाओं को “मनोरंजन का साधन” बताया। इस टिप्पणी की चौतरफा निंदा हो रही है। सामाजिक संगठनों से लेकर महिला अधिकार कार्यकर्ताओं तक कई लोगों ने इसे अपमानजनक बताया है । समर्थकों का कहना है कि यह सिर्फ मज़ाक की शैली थी, जबकि विपक्षी और आलोचक इसे महिलाओं के प्रति गलत सोच बता रहे हैं।
राम मंदिर ध्वजारोहण में क्यों उठी चर्चा?
25 नवंबर को अयोध्या में राम जन्मभूमि पर विशेष कार्यक्रम आयोजित हुआ, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंदिर के शिखर पर भगवा ध्वज फहराया। इस अवसर पर देश के कई प्रमुख धार्मिक नेता, राजनेता और लगभग 8,000 गणमान्य लोग मौजूद थे। इस कार्यक्रम में बाबरी मस्जिद विवाद के पूर्व पक्षकार इक़बाल अंसारी को भी निमंत्रण मिला, लेकिन रामभद्राचार्य वहां नजर नहीं आए। जब उनसे इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि उन्हें बुलाया ही नहीं गया। अपने बयान में उन्होंने यह भी कहा कि “राम मंदिर आंदोलन में हमने भी योगदान दिया था, लेकिन आज हमें जगह नहीं दी गई।” उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी को अपना मित्र बताते हुए कहा कि मित्र के कार्यक्रम में न बुलाए जाने से उन्हें दुख हुआ।
विवादों से पुराना रिश्ता
रामभद्राचार्य के कई बयान पहले भी विवादों में रहे हैं।
- शूद्र समाज पर टिप्पणी
एक कार्यक्रम में उन्होंने शूद्र वर्ग के संबंध में शास्त्रीय व्याख्या की थी। दलित संगठनों को यह बयान आपत्तिजनक लगा और उन्होंने इसे जातिगत भेदभाव को बढ़ावा देने वाला बताया। हालांकि समर्थकों का तर्क था कि उनका बयान धार्मिक संदर्भ में था, न कि किसी वर्ग को नीचा दिखाने के लिए।
- रामचरितमानस पर राजनीतिक घमासान
जब कुछ नेताओं ने रामचरितमानस को समाज में नफरत फैलाने वाला ग्रंथ बताया, तब रामभद्राचार्य ने इसका जोरदार विरोध किया और उस बयान का खंडन किया। इस मुद्दे ने धर्म और राजनीति को आमने-सामने ला दिया।
- सनातन धर्म पर टिप्पणी को लेकर तकरार
तमिलनाडु के एक मंत्री द्वारा सनातन धर्म को लेकर की गई टिप्पणी के बाद भी उन्होंने खुलकर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने इस सोच को “धर्मिक असहिष्णुता” बताया। जिसके बाद एक धड़ा उन्हें राजनीतिक प्रवचनकर्ता बताने लगा।
- राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा में सीट को लेकर असंतोष
जनवरी 2024 में प्राण प्रतिष्ठा समारोह में उन्हें मुख्य मंच पर जगह न मिलने को लेकर भी खबरें आई थीं। उस घटना ने यह सवाल उठाया कि क्या धार्मिक मर्यादाओं और सम्मान की राजनीति भी अब कार्यक्रमों का हिस्सा बन गई है।
कौन हैं रामभद्राचार्य?
जन्म से नेत्रहीन होने के बावजूद, जगतगुरु रामभद्राचार्य ने अपनी असाधारण स्मरण शक्ति और धर्मग्रंथों पर पकड़ से एक अलग पहचान बनाई है। वह चित्रकूट में स्थित तुलसी पीठ के संस्थापक हैं और रामकथा के सबसे प्रभावशाली वक्ताओं में गिने जाते हैं। उनके अनुयायी उन्हें सनातन परंपरा का सशक्त चेहरा बताते हैं। वहीं, आलोचकों का कहना है कि उनके कुछ बयान सामाजिक विवादों को जन्म देते हैं। रामभद्राचार्य न सिर्फ देश में बल्कि विदेशों में भी अपने ज्ञान, संस्कृत पांडित्य और प्रवचनों की शैली के लिए जाने जाते हैं। लेकिन पिछले कुछ समय से उनके बयान अक्सर विवादों का हिस्सा बनते रहे हैं, जिसके चलते वह लगातार मीडिया और सोशल मीडिया की बहस में बने हुए हैं।