भारत में ई-सिगरेट बैन के बावजूद The Bads of Bollywood वेब सीरीज़ में इस्तेमाल, NHRC ने की सख्त कार्रवाई की मांग
भारत में ई-सिगरेट पूरी तरह बैन, फिर भी वेब सीरीज़ में दिखा इस्तेमाल… NHRC ने सख़्त कार्रवाई की मांग की , जानिए क्या कहता है कानून और क्यों है इतना हंगामा।
हाल ही में नेटफ्लिक्स पर रिलीज हुई वेब सीरीज़ The Bads of Bollywood अपने ग्लैमरस अंदाज़ और स्टार कास्ट के चलते चर्चा में रही। लेकिन सबसे ज़्यादा सुर्ख़ियाँ बटोरने वाला पहलू एक ऐसा दृश्य बना है, जिसमें अभिनेता रणबीर कपूर को ई-सिगरेट पीते हुए दिखाया गया। इस पर राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग (NHRC) ने आपत्ति जताई और सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के साथ मुंबई पुलिस को कार्रवाई करने का पत्र लिखा।

यह विवाद सिर्फ़ एक वेब सीरीज़ तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे जुड़ता है — भारत का कानून, युवाओं पर असर और मीडिया की सामाजिक जिम्मेदारी।
ई-सिगरेट क्या है?
ई-सिगरेट (Electronic Cigarette) एक इलेक्ट्रॉनिक उपकरण है जिसमें एक लिक्विड को गर्म किया जाता है ताकि वह धुआँ नहीं, बल्कि वाष्प (vapour) बनाए। इस लिक्विड में अक्सर निकोटिन और कई रसायन मिलाए जाते हैं। यह पारंपरिक सिगरेट की तरह जलता नहीं है।इसमें विभिन्न फ्लेवर मौजूद होते हैं। इसे “कम हानिकारक विकल्प” कहकर प्रचारित किया जाता है। लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञ मानते हैं कि ई-सिगरेट भी शरीर को नुकसान पहुँचाती है और खासकर फेफड़ों व हृदय पर बुरा असर डाल सकती है।
भारत में ई-सिगरेट पर प्रतिबंध
भारत सरकार ने Prohibition of Electronic Cigarettes Act, 2019 पास करके ई-सिगरेट को पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया।
कानून के मुख्य बिंदु:
उत्पादन, आयात, निर्यात, बिक्री, भंडारण और विज्ञापन — सब पर रोक।
पहली गलती: 1 साल जेल या 1 लाख रुपये तक जुर्माना।
बार-बार गलती: 3 साल जेल या 5 लाख रुपये तक जुर्माना।
साथ ही भंडारण को भी अपराध माना गया है।
सरकार का मानना है कि ई-सिगरेट युवाओं को तेजी से लत लगा सकती है, इसलिए इसे रोकना ज़रूरी है।
विवाद क्यों हु
आ?
The Baads of Bollywood में रणबीर कपूर का ई-सिगरेट वाला दृश्य कई कारणों से विवादित हुआ:
1. कानून की अनदेखी – भारत में पूरी तरह प्रतिबंधित उत्पाद को सामान्य रूप से दिखाना।
2. चेतावनी का अभाव – दृश्य में कहीं भी यह नहीं बताया गया कि ई-सिगरेट स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है।
3. युवा दर्शकों पर असर – वेब सीरीज़ खासकर युवाओं में लोकप्रिय होती है, और ऐसा दृश्य गलत संदेश दे सकता है।
इसी कारण NHRC ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई और कहा कि मनोरंजन की आड़ में जनस्वास्थ्य को खतरे में नहीं डाला जा सकता। आज वेब प्लेटफ़ॉर्म और फ़िल्में सिर्फ़ मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि सोशल इन्फ्लुएंसर भी हैं। अगर वे कानून के विरुद्ध चीज़ों को सामान्य दिखाते हैं, तो समाज में भ्रम पैदा होता है।