क्या अब चुनाव नहीं लड़ पाएंगे आज़म खान और बेटे अब्दुल्लाह! इस मामले में हुई 7 साल की सज़ा!
समाजवादी पार्टी की मुसीबतें लगातार बढ़ती जा रही हैं। रामपुर की MP-MLA विशेष अदालत ने दोहरे PAN कार्ड मामले में सपा के कद्दावर नेता आज़म खान और उनके बेटे अब्दुल्लाह आज़म को दोषी करार देते हुए सात-सात साल की सज़ा सुनाई है। अदालत ने दोनों को जालसाज़ी, धोखाधड़ी, दस्तावेज़ों के दुरुपयोग और आपराधिक साज़िश सहित कई गंभीर धाराओं में दोषी पाया है।
मामला क्या है?
यह मामला वर्ष 2016 से जुड़ा है। आरोप है कि अब्दुल्लाह आज़म ने 2017 विधानसभा चुनाव के दौरान स्वार सीट से नामांकन दाखिल किया, लेकिन उस समय उनकी उम्र 25 वर्ष से कम थी, जबकि विधायक बनने के लिए न्यूनतम आयु 25 वर्ष अनिवार्य है।
इसी कमी को छिपाने के लिए उन्होंने कथित रूप से दूसरा PAN कार्ड बनवाया, जिसमें जन्मतिथि बदलकर 30 सितंबर 1990 दर्ज की गई। यही फर्जी PAN कार्ड बैंक पासबुक और नामांकन पत्र में उपयोग किया गया।
शिकायत और पुलिस कार्रवाई
भाजपा विधायक आकाश सक्सेना ने छह वर्ष पहले यह शिकायत सिविल लाइंस कोतवाली में दी थी। 2019 में इसी शिकायत पर FIR दर्ज की गई।
पुलिस ने जांच के बाद दोनों पर IPC की धारा 467, 468, 471 और 120B सहित कई गंभीर आरोप लगाए।

अदालत का फैसला
विशेष जज शोभित बंसल ने सुनवाई पूरी होने के बाद पिता-पुत्र दोनों को दोषी पाया और धारा 467 (मूल्यवान सुरक्षा दस्तावेज़ की जालसाज़ी) में अधिकतम सात साल की सज़ा सुनाई। अन्य धाराओं में भी सज़ा और जुर्माना लगाया गया।
कुल मिलाकर दोनों को 7 साल की सज़ा भुगतनी होगी।
राजनीतिक करियर पर क्या असर?
इस फैसले के बाद आज़म खान की कानूनी लड़ाई और कठिन हो सकती है। कुछ दिन पहले ही वे 23 सितंबर को सीतापुर जेल से जमानत पर रिहा हुए थे।
उधर, अब्दुल्लाह आज़म के लिए भी चुनाव लड़ने और सार्वजनिक पद धारण करने पर रोक लगने का खतरा बढ़ गया है।
यह मामला आने वाले दिनों में उत्तर प्रदेश की राजनीति में बड़ा मुद्दा बन सकता है।
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