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58 लाख वोटर आउट! ममता और शुभेंदु के क्षेत्र में चुनाव आयोग ने किया बड़ा ‘क्लीन-अप’

बंगाल में वोटों की सफाई, सियासत में तूफान: ममता और शुभेंदु के किले भी हिले

कोलकाता से आई यह खबर पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़े उलटफेर का संकेत दे रही है। चुनाव आयोग द्वारा जारी किए गए ड्राफ्ट चुनावी रोल ने न सिर्फ आम लोगों को बल्कि सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस और विपक्षी दलों को भी चौंका दिया है। स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी SIR के पहले चरण के बाद सामने आए आंकड़ों के मुताबिक, राज्य की वोटर लिस्ट से लगभग 58,17,851 मतदाताओं के नाम हटाए जा सकते हैं। यह संख्या इतनी बड़ी है कि इसकी तुलना यूरोप के कई छोटे देशों की कुल आबादी से की जा रही है।

क्या हैं पूरा मामला

चुनाव आयोग का कहना है कि यह कार्रवाई पूरी तरह से नियमों के तहत की गई है। जिन मतदाताओं की मृत्यु हो चुकी है, जो अपने पते से शिफ्ट हो गए हैं। जिनके नाम एक से ज्यादा जगहों पर दर्ज थे या जो पूरी तरह फर्जी पाए गए, उनके नाम लिस्ट से हटाए जा रहे हैं। आयोग के मुताबिक, इस सफाई अभियान का मकसद चुनावी प्रक्रिया को पारदर्शी और निष्पक्ष बनाना है। लेकिन राजनीतिक नजरिए से देखा जाए तो इसके दूरगामी असर पड़ सकते हैं।

सबसे ज्यादा चर्चा मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के विधानसभा क्षेत्र भवानीपुर की हो रही है। ड्राफ्ट लिस्ट के अनुसार, भवानीपुर से करीब 44,787 वोटरों के नाम हटाए गए हैं। जनवरी 2025 की वोटर लिस्ट में इस सीट पर कुल 1,61,509 मतदाता दर्ज थे। अब लगभग 45 हजार नामों के कटने की संभावना ने तृणमूल कांग्रेस की चिंता बढ़ा दी है। भवानीपुर को ममता बनर्जी का मजबूत गढ़ माना जाता है और यहां थोड़े-से वोटों का फर्क भी चुनावी नतीजों को बदल सकता है।

विपक्ष के नेता और भाजपा के बड़े चेहरे सुवेंदु अधिकारी के निर्वाचन क्षेत्र नंदीग्राम में भी चुनाव आयोग की कार्रवाई का असर साफ दिख रहा है। यहां से 10,599 वोटरों के नाम हटाए गए हैं। SIR से पहले नंदीग्राम में कुल 2,78,212 वोटर थे। नंदीग्राम वही सीट है जहां एक समय ममता बनर्जी और सुवेंदु अधिकारी के बीच सीधी और बेहद कड़ी टक्कर देखने को मिली थी। ऐसे में हजारों नामों का कटना भविष्य के चुनावों में समीकरण बदल सकता है।

राज्यभर के आंकड़ों पर नजर डालें तो यह साफ होता है कि यह सिर्फ दो सीटों तक सीमित मामला नहीं है, बल्कि पूरे बंगाल में वोटर लिस्ट की गहन जांच हुई है। चुनाव आयोग के मुताबिक, 24 लाख 19 हजार से ज्यादा ऐसे मतदाता पाए गए हैं जिनकी मृत्यु हो चुकी है, लेकिन उनके नाम अब तक वोटर लिस्ट में दर्ज थे। इसके अलावा 12 लाख 10 हजार से अधिक वोटर ऐसे हैं जो ‘अनट्रेस्ड’ पाए गए, यानी वे अपने पते पर मौजूद ही नहीं हैं। इस आंकड़े ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या ये वही ‘घोस्ट वोटर्स’ थे, जिनका इस्तेमाल चुनावों के दौरान किया जाता रहा है।

इसके साथ ही करीब 19 लाख 92 हजार मतदाता ऐसे हैं जिन्होंने अपना पता बदल लिया है। इन लोगों के नाम पुरानी जगह की वोटर लिस्ट से हटाए गए हैं ताकि दो जगह वोटिंग की संभावना खत्म की जा सके। चुनाव आयोग ने यह भी बताया कि 1 लाख 37 हजार ऐसे वोटर मिले हैं जिनके नाम एक से ज्यादा जगहों पर दर्ज थे। इन मामलों में आयोग ने एक जगह नाम बनाए रखा है और बाकी जगहों से नाम हटा दिए हैं। इसके अलावा 57,696 मतदाताओं को ‘फर्जी’ या ‘अन्य’ श्रेणी में रखकर पूरी तरह से लिस्ट से बाहर किया गया है।

अगर जिलावार आंकड़ों की बात करें तो सबसे ज्यादा नाम दक्षिण 24 परगना जिले से हटाए गए हैं। यहां से 8 लाख 16 हजार से ज्यादा वोटरों के नाम ड्राफ्ट लिस्ट में कटे हुए दिख रहे हैं। यह जिला तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी का गढ़ माना जाता है। उन्होंने डायमंड हार्बर सीट से पिछले लोकसभा चुनाव में सात लाख से ज्यादा वोटों के अंतर से जीत हासिल की थी। इसके बाद उत्तर 24 परगना जिले से 7 लाख 92 हजार नाम हटाए जाने की संभावना है।

इन दोनों जिलों का बांग्लादेश सीमा के पास होना भी राजनीतिक बहस का विषय बन गया है। विपक्ष का आरोप है कि सीमावर्ती इलाकों में बड़ी संख्या में नाम कटना इस बात की ओर इशारा करता है कि पहले वोटर लिस्ट में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी थी। हालांकि चुनाव आयोग ने साफ किया है कि यह पूरी तरह प्रशासनिक प्रक्रिया है और इसे किसी राजनीतिक नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए।

सभी क्षेत्रों में कटे है वोट

शहरी इलाकों में भी स्थिति अलग नहीं है। हावड़ा जिले से 4 लाख 47 हजार नाम हटाए गए हैं। कोलकाता में उत्तरी हिस्से से 3 लाख 90 हजार और दक्षिणी कोलकाता से 2 लाख 16 हजार नाम ड्राफ्ट लिस्ट में नहीं रखे गए हैं। इससे यह साफ होता है कि केवल ग्रामीण या सीमावर्ती इलाके ही नहीं, बल्कि बड़े शहरों में भी वोटर लिस्ट में लंबे समय से गड़बड़ियां मौजूद थीं।

कोलकाता के कुछ वीआईपी विधानसभा क्षेत्रों में आंकड़े और भी चौंकाने वाले हैं। चौरंगी विधानसभा क्षेत्र से 74,553 नाम हटाए गए हैं, जहां से तृणमूल कांग्रेस की विधायक नयना बंद्योपाध्याय चुनी गई थीं। वहीं कोलकाता पोर्ट विधानसभा क्षेत्र से 63,730 नाम हटे हैं, जिसका प्रतिनिधित्व वरिष्ठ मंत्री फिरहाद हकीम करते हैं। मंत्री अरूप बिस्वास के टॉलीगंज क्षेत्र से 35,309 नाम कटे हैं। इसके उलट, सबसे कम नाम बांकुरा जिले के कोतुलपुर विधानसभा क्षेत्र से हटाए गए हैं, जहां यह संख्या 5,678 है।

यह भी ध्यान देने वाली बात है कि सिर्फ तृणमूल कांग्रेस के गढ़ ही नहीं, बल्कि भाजपा के प्रमुख नेताओं के क्षेत्रों में भी बड़ी संख्या में नाम हटाए गए हैं। आसनसोल साउथ, जहां से भाजपा विधायक अग्निमित्रा पॉल हैं, वहां से 39,202 नाम हटे हैं। सिलीगुड़ी, जो भाजपा विधायक शंकर घोष का क्षेत्र है, वहां से 31,181 वोटरों के नाम ड्राफ्ट लिस्ट में नहीं रखे गए हैं।

इस पूरे मामले पर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। भाजपा के को-इंचार्ज अमित मालवीय ने दावा किया है कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने 11 दिसंबर को SIR फॉर्म भर दिया है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर आरोप लगाया कि ममता ने कुछ ही घंटे पहले एक रैली में कहा था कि वह फॉर्म नहीं भरेंगी, लेकिन बाद में उन्होंने अपना रुख बदल लिया। इस बयान के बाद तृणमूल कांग्रेस और भाजपा के बीच जुबानी जंग और तेज हो गई है।

आयोग ने दिया अतिरिक्त समय

चुनाव आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि पश्चिम बंगाल की ड्राफ्ट मतदाता सूची 16 दिसंबर को प्रकाशित की जाएगी। इसके बाद लोग आपत्तियां दर्ज करा सकेंगे और जरूरी सुधार किए जाएंगे। आयोग ने बताया कि SIR की प्रक्रिया देश के 12 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में 28 अक्टूबर से शुरू हुई थी। पहले इसकी अंतिम तारीख 4 दिसंबर थी, जिसे बढ़ाकर 11 दिसंबर किया गया। अंतिम मतदाता सूची अब 14 फरवरी 2026 को प्रकाशित की जाएगी।

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

Anushka Pandey

Content Writer

Anushka Pandey as a Anchor and Content writer specializing in Entertainment, Histroical place, and Politics. They deliver clear, accurate, and engaging content through a blend of investigative and creative writing. Bagi brings complex subjects to life, making them accessible to a broad audience.

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