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पाकिस्तान में असीम मुनिर बनेंगे ‘तानाशाह ’! राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री से होंगे ज्यादा मजबूत, क्या है ये संविधान संशोधन ?

पाकिस्तान में असीम मुनिर बनेंगे ‘तानाशाह ’! राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री से होंगे ज्यादा मजबूत, क्या है ये संविधान संशोधन ?

 

इस्लामाबाद: पाकिस्तान में सेना का दबदबा एक बार फिर बढ़ने जा रहा है। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की सरकार ने एक ऐसा प्रस्ताव लाया है, जिससे सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर देश के सबसे शक्तिशाली व्यक्ति बन जाएंगे। अब वे पाकिस्तान की थल सेना, नौसेना और वायुसेना — तीनों के सर्वोच्च कमांडर बनने जा रहे हैं।

इसके लिए सरकार ने “कमांड ऑफ डिफेंस फोर्सेज (CDF)” नामक नया ढांचा तैयार किया है। इस ढांचे के तहत सेना प्रमुख को देश की सभी सशस्त्र सेनाओं की कमान दी जाएगी, जिससे उनका अधिकार अब तक से कहीं अधिक बढ़ जाएगा।

 

संविधान में संशोधन का प्रस्ताव

इस बदलाव के लिए पाकिस्तान सरकार ने 27वां संविधान संशोधन संसद में पेश किया है। इसके तहत अब तक केवल सलाहकार भूमिका निभाने वाले चेयरमैन, जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ कमिटी (CJCSC) का पद लगभग समाप्त हो जाएगा।

उसकी जगह नया पद CDF कमांडर लेगा, जिसे प्रधानमंत्री या राष्ट्रपति की अनुमति के बिना भी फैसले लेने का अधिकार होगा। रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि यह संशोधन पाकिस्तान के सैन्य ढांचे को पूरी तरह बदल देगा, क्योंकि इससे सेना प्रमुख को आजीवन शक्ति मिल जाएगी — यानी उन्हें उनके पद से हटाना लगभग असंभव हो जाएगा।

 

लोकतंत्र पर मंडराता खतरा

कई विश्लेषक इसे पाकिस्तान में लोकतंत्र के लिए खतरा बता रहे हैं। उनका कहना है कि अब देश में वास्तविक सत्ता सेना प्रमुख के हाथों में चली जाएगी। कई लोग तो असीम मुनीर की तुलना “पाकिस्तान के हिटलर” से कर रहे हैं।

पाकिस्तान सरकार इस फैसले को “आधुनिक सैन्य ढांचे” की दिशा में उठाया गया कदम बता रही है। उसका दावा है कि यह व्यवस्था अमेरिका, कनाडा और नाटो देशों जैसी है, जहां “संयुक्त रक्षा कमान” होती है। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि उन देशों में संविधान और संसद सर्वोच्च होती है, जबकि पाकिस्तान में यह संशोधन सेना प्रमुख को राजनीतिक हस्तियों से ऊपर रख देगा।

 

आजीवन पद और बढ़ता विवाद

सबसे बड़ी विवादास्पद बात यह है कि नया CDF पद केवल सेना प्रमुख के लिए आरक्षित रहेगा — और यह आजीवन पद होगा। इसका मतलब यह है कि जब तक असीम मुनीर जीवित हैं, तब तक देश की रक्षा और रणनीतिक नीतियों पर उनका ही नियंत्रण रहेगा।

इससे नौसेना और वायुसेना प्रमुखों की भूमिका लगभग समाप्त हो जाएगी। विशेषज्ञों का कहना है कि इससे सेना के अंदर शक्ति संतुलन बिगड़ सकता है और असंतोष बढ़ने की संभावना है।

जमकर हो रही आलोचना

रक्षा विश्लेषक बिलाल खान ने कहा कि इस संशोधन में यह साफ नहीं है कि “CDF” का कोई स्थायी मुख्यालय या औपचारिक संरचना होगी या नहीं।

उन्होंने चेतावनी दी कि यह पूरा सिस्टम किसी संस्थान की बजाय एक व्यक्ति पर आधारित होगा। यानी अब वही तय करेंगे कि कौन-सी नीति बनेगी, कौन प्रमोट होगा और किस दिशा में सैन्य रणनीति आगे बढ़ेगी।

बिलाल खान ने कहा —

“पाकिस्तान को एक ऐसी व्यवस्था की जरूरत है जो तीनों सेनाओं के बीच समन्वय बनाए, न कि सारी शक्ति एक व्यक्ति को सौंप दे।”

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Shashwat Srijan

Content Writer

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