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नेपाल में सोशल मीडिया हुआ फिर शुरू, क्या टिक पाएगी के पी ओली सरकार ?

नेपाल में सोशल मीडिया बैन हटा, हिंसक प्रदर्शनों के बीच PM केपी ओली पर इस्तीफे का दबाव

नेपाल में सोशल मीडिया सेवाएं हुई बहाल, हिंसक प्रदर्शन के बाद प्रदर्शनकारी प्रधानमंत्री के पी ओली के इस्तीफे की मांग कर रहे है। क्या है पूरी खबर

सरकार ने फेसबुक, इंस्टाग्राम और यूट्यूब जैसे प्लेटफॉर्म से बैन हटा लिया है। इससे पहले बैन के खिलाफ काठमांडू में हिंसक प्रदर्शन हुए, जिसमें 16 लोगों की मौत और 200 से अधिक घायल हुए।

 

नेपाल की सरकार ने एक बड़ा फैसला लेते हुए सोशल मीडिया प्लेटफार्म से प्रतिबंध हटा दिया है।इसको लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई थी।अपने एक बयान में  कल नेपाल के प्रधानमंत्री ने प्रदर्शनकारियों के आगे झुकने से इनकार कर दिया था। ओली ने कहा था कि देश में सोशल मीडिया से बैन नहीं हटेगा।

प्रतिबंध हटने के बाद नेपाल के संचार मंत्री पृथ्वी गुरुंग ने कहा है कि युवा अब अपना विरोध प्रदर्शन खत्म करें। हमने सोशल मीडिया से प्रतिबंध हटा दिया है। अब सोशल मीडिया शुरू कर दिया गया है। ताजा घटनाक्रम के बाद नेपाल की सरकार के गठबंधन में भी दरार साफ दिखने लगी है।  दैनिक भास्कर की एक खबर के अनुसार नेपाली कांग्रेस ओली की यूएमएल के साथ गठबंधन जारी  रखने को लेकर विचार कर रही है। राजधानी काठमांडू में  कर्फ्यू अनिश्चित समय तक लगा दिया गया है।

नेपाल इस वक्त युद्ध का अखाड़ा बन चुका  है। देश में बड़े सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर प्रतिबंध और व्यापक भ्रष्टाचार के खिलाफ GEN Z बड़ा विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। खबर है कि ये प्रदर्शनकारी संसद भवन के परिसर तक में घुस गए थे।  हालात बेकाबू होते जा रहे हैं और नेपाल की सेना ने अब मोर्चा संभाल लिया है। नेपाल पुलिस के मुताबिक फायरिंग में अब तक 16 प्रदर्शनकारियों की मौत हो गई है। इसके अलावा 200 से ज्यादा लोग घायल हैं।

नेपाल में हालात उस समय बेकाबू हो गए जब बड़ी संख्या में Gen Z युवाओं ने संसद और सरकारी भवनों के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया। नेपाल पुलिस के मुताबिक प्रदर्शनकारियों की संख्या 12,000 से अधिक थी। इन प्रदर्शनकारियों ने संसद भवन के कई गेटों पर कब्जा कर लिया और अंदर घुसने का प्रयास भी किया। स्थिति बिगड़ने पर सरकार ने संसद, राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति आवासों के आसपास कर्फ्यू लागू कर सेना तैनात कर दी थी।

Gen Z के नेतृत्व में हजारों प्रदर्शनकारी संसद तक पहुंचे, सरकार पर बढ़ा दबाव, कर्फ्यू और सेना की तैनाती जारी।

पुलिस और प्रदर्शनकारियों में भिड़ंत

पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पहले पानी की बौछारें कीं और फिर आंसू गैस के गोले दागे। इसके बावजूद हालात काबू में नहीं आए तो सरकार ने शूट-एट-साइट आदेश दे दिए। इस दौरान कई लोगों की मौत हुई और सैकड़ों घायल हो गए। जगह-जगह पुलिस और युवाओं के बीच हिंसक भिड़ंत हुई।

प्रधानमंत्री का अल्टीमेटम और विपक्ष का समर्थन

नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने प्रदर्शनकारियों को अल्टीमेटम दिया था और चेतावनी दी थी कि उपद्रव बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। वहीं, नेपाल के पूर्व विदेश मंत्री प्रदीप ग्यावली ने युवाओं का समर्थन किया था। उनका कहना था कि युवाओं के पास अपनी बात कहने और अभिव्यक्ति के लिए कोई मंच नहीं बचा है, इसलिए वे सड़क पर उतरने को मजबूर हुए।

क्यों लगाना पड़ा प्रतिबंध

 नेपाल की सरकार ने एक बड़ा फैसला लेते हुए 3 सितंबर को 26 सोशल मीडिया साइट्स पर प्रतिबंध लगाने का फैसला लिया था। इनमें फेसबुक, इंस्टाग्राम, यूट्यूब समेत तमाम बड़े प्लेटफार्म शामिल थे। नेपाल की सरकार ने इन कंपनियों से संचार और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय में पंजीकरण करवाने को कहा था। नेपाल की सरकार का कहना है जो भी कंपनी नेपाल में किसी भी प्रकार की सोशल मीडिया सेवाएं संचालित करना चाहती है वे नेपाल में रजिस्ट्रेशन करवाएं ताकि किसी भी प्रकार की गड़बड़ी पर अंकुश लगाया जा सके। इसके अलावा नेपाल की सरकार यह भी चाहती है इस सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म नेपाल में अपने ऑफिस खोलें जब तक यह बड़ी कंपनियां नेपाल में अपने दफ्तर नहीं खोलेगी तब तक इन पर लगा प्रतिबंध जारी रहेगा।

इसके लिए इन साइट्स को 2 सितम्बर तक का समय दिया गया था। इन सभी एप्लीकेशन फेसबुक, इंस्टाग्राम, व्हाट्सएप, यूट्यूब एक्स लिंकडइन ने पंजीकरण के लिए आवेदन भी नहीं किया। इसके बाद नेपाल की सरकार ने इन प्लेटफार्म पर रोक लगा दी।  वहीं टिकटॉक जैसी ऐप ने रजिस्ट्रेशन करवा लिया था इसलिए भी सुचारू रूप से नेपाल में चल पा रही है।

कौन होते हैं  GEN Z

 GEN Z उन लोगों को कहा जाता है जिनका जन्म 1997 से 2012 की अवधि के बीच हुआ है।  ऐसा माना जाता है कि इस पीढ़ी के लोग इंटरनेट सोशल मीडिया और डिजिटल ज्यादा जागरूक होते हैं इस पीढ़ी के लोग तमाम सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स  पर काफी सक्रिय रहते हैं।

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