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ये है भारत के सबसे गरीब और अमीर राज्य ! आरबीआई की रिपोर्ट ने किए चौंकाने वाले खुलासे

भारत के सबसे गरीब

भारत में राज्यों की आय का अंतर क्यों नहीं घट रहा? आरबीआई की रिपोर्ट ने खड़ा किया बड़ा सवाल

गोवा और सिक्किम की प्रति व्यक्ति आय 5 लाख के पार, जबकि बिहार-यूपी अब भी निचले पायदान पर; आरबीआई के ताज़ा आंकड़ों से साफ अमीर राज्य और आगे बढ़ रहे, गरीब राज्य पिछड़ते जा रहे हैं।

क्या भारत में अमीर और गरीब राज्यों के बीच आर्थिक दूरी कम हो रही है? भारतीय रिज़र्व बैंक की ताज़ा रिपोर्ट इसे लेकर चौंकाने वाली तस्वीर पेश करती है। आरबीआई ने हाल ही में ‘भारतीय राज्यों पर सांख्यिकी हैंडबुक 2024–25’ जारी की है, जिसमें राज्य घरेलू उत्पाद यानी NSDP के आंकड़े साफ बताते हैं कि अमीरी और गरीबी के बीच की खाई अब भी जस की तस मौजूद है। बल्कि कई मामलों में यह और चौड़ी हो रही है।

गोवा और सिक्किम सबसे ऊपर, बिहार और यूपी सबसे नीचे

हैंडबुक के आंकड़ों के अनुसार, गोवा और सिक्किम जैसे छोटे लेकिन विकसित राज्यों की प्रति व्यक्ति आय 5 लाख रुपये के स्तर को पार कर चुकी है। यह आंकड़ा बताता है कि इन राज्यों में मौजूद उद्योग, पर्यटन, सर्विस सेक्टर और निवेश ने लोगों की औसत आय को नई ऊँचाइयों पर पहुंचा दिया है। सिक्किम की अर्थव्यवस्था फार्मास्यूटिकल कंपनियों, पर्यटन और हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट्स के दम पर लगातार आगे बढ़ रही है। वहीं गोवा, जिसकी अर्थव्यवस्था पर्यटन, खनन और सर्विस सेक्टर पर टिके है, आय के मामले में पूरे देश से बहुत आगे निकल गया है। तेलंगाना भी लगातार ऊपर चढ़ रहा है। आईटी सेक्टर, कृषि के आधुनिकीकरण और राज्य के बड़े शहरी निवेश ने इसे 3.87 लाख रुपये प्रति व्यक्ति आय तक पहुंचा दिया है।

यूपी-बिहार अब भी काफी पीछे

जहां एक तरफ कुछ राज्य ऊपर की ओर तेज़ी से बढ़ रहे हैं, वहीं बिहार, उत्तर प्रदेश और झारखंड जैसे बड़े और घनी आबादी वाले राज्य पिछड़ते दिखाई देते हैं। आरबीआई के 2024-25 के अनुमानों के अनुसार बिहार की प्रति व्यक्ति आय सिर्फ ₹69,321 है। यानी गोवा के मुकाबले लगभग आठ गुना कम।

उत्तर प्रदेश और झारखंड की स्थिति भी इससे बहुत अलग नहीं है। उत्तर प्रदेश की विशाल आबादी, सीमित औद्योगिक विकास और कम निवेश की वजह से औसत कमाई का स्तर बहुत धीमी गति से बढ़ रहा है। इसका सीधा असर इन राज्यों में जीवन-स्तर, स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा और रोजगार पर दिखता है।

एक ही देश, दो अलग आर्थिक दुनिया

आरबीआई की रिपोर्ट एक ऐसी हकीकत दिखाती है, जो कई दशकों से सामने आती रही है, कि भारत के राज्यों का आर्थिक विकास एक साथ नहीं बढ़ रहा।

दक्षिण और पश्चिम भारत के राज्य जैसे कर्नाटक, तमिलनाडु, तेलंगाना, महाराष्ट्र तेज़ी से आगे बढ़ रहे हैं। वहीं पूर्वी और उत्तरी राज्य—बिहार, यूपी, झारखंड—धीमी गति से आगे बढ़ते हुए पीछे रह जाते हैं। इसका मतलब यह है कि एक देश में रहकर भी लोगों का जीवन स्तर अलग-अलग दुनियाओं जैसा बन रहा है। कहीं औसत आय लाखों में है, तो कहीं एक लाख रुपये तक भी नहीं पहुंचती।

आय में अंतर का असर

आर्थिक असमानता सिर्फ आय के आंकड़ों में नहीं दिखती, बल्कि यह लोगों की ज़िंदगी के फैसलों को भी प्रभावित करती है। रोजगार की कमी और कम आय के कारण बिहार, यूपी और झारखंड से लाखों लोग हर साल दक्षिण और पश्चिम भारत की ओर काम की तलाश में जाते हैं। मुंबई से लेकर बेंगलुरु और हैदराबाद से लेकर पुणे तक बड़ी संख्या में मजदूर, सेवा क्षेत्र के कर्मचारी और छोटे कामगार इन्हीं राज्यों से आते हैं। जहाँ आय ज्यादा है और उद्योग फल-फूल रहे हैं, वहाँ नौकरियों के मौके की भी कोई कमी नहीं है। लेकिन जिन राज्यों से यह लोग जाते हैं, वहाँ कभी भी मज़बूत स्थानीय उद्योग नहीं बन पाए, न ही बड़े निवेशक वहाँ रुक पाए। यह अंतर लगातार गहरा होता गया।

क्यों नहीं घट रही असमानता?

आर्थिक असमानता के पीछे कई कारण हैं। भारत के कई राज्य भौगोलिक, आर्थिक और सांस्कृतिक रूप से अलग हैं। कुछ राज्यों में वर्षों से उद्योग, शिक्षा और ढांचागत सुविधाओं में लगातार निवेश हुआ है, जिससे वहां रोजगार पैदा हुए और आय बढ़ी। दूसरी ओर, बिहार और यूपी जैसे राज्यों में सामाजिक संरचना, राजनीति, सीमित औद्योगिक आधार और कम निवेश ने प्रगति की गति धीमी कर दी। कृषि पर अत्यधिक निर्भरता, छोटे उद्योगों का अभाव और युवाओं के लिए रोजगार की कमी ने इन्हें लगातार पिछड़ा बनाए रखा। आरबीआई की रिपोर्ट यह भी संकेत देती है कि नई नीतियों के बावजूद राज्यों के बीच की दूरी तेजी से कम नहीं होगी, जब तक कि पिछड़े राज्यों में औद्योगिकीकरण और कौशल विकास को प्राथमिकता नहीं दी जाती।

क्या आगे कुछ बदल सकता है?

नीति-निर्माताओं के सामने चुनौती यह है कि आर्थिक विकास को संतुलित कैसे किया जाए। कई रिपोर्टें कहती हैं कि अगर बिहार, यूपी और झारखंड जैसे राज्यों में बुनियादी ढांचे, शिक्षा और स्थानीय उद्योगों में बड़े निवेश किए जाएँ, तो आने वाले वर्षों में अंतर कम हो सकता है। लेकिन अभी की तस्वीर साफ हैं। असमानता जस की तस बनी हुई है। अमीर राज्य और ऊपर जा रहे हैं, जबकि गरीब राज्य catching up यानी बराबरी करने की दौड़ में काफी पीछे हैं।

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Anushka Pandey

Content Writer

Anushka Pandey as a Anchor and Content writer specializing in Entertainment, Histroical place, and Politics. They deliver clear, accurate, and engaging content through a blend of investigative and creative writing. Bagi brings complex subjects to life, making them accessible to a broad audience.

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