क्या है ये G2 युग ? जिसकी चर्चा राष्ट्रपति ट्रम्प कर रहे, भारत के लिए कैसे है ये खतरे की घंटी ?
राष्ट्रपति ट्रम्प किस मुद्दे पर क्या रुख करेंगे इसका अंदाज लगा पाना वैसे ही बहुत मुश्किल होता है। अब अमेरिका और चीन के रिश्तों में नया अध्याय शुरू होने जा रहा है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि चीन अब अमेरिका के लिए “कार्यात्मक रूप से समान देश” है। इसका मतलब है कि दोनों देश मिलकर वैश्विक दिशा तय करेंगे। इस पहल को ‘G-2 साझेदारी’ कहा जा रहा है—यानि दुनिया की दो सबसे बड़ी शक्तियों का एकजुट होना।
यह कदम अमेरिका की पुरानी नीति से बिल्कुल अलग है, जिसमें चीन को रणनीतिक खतरा माना जाता था। ट्रंप के इस बयान ने भारत, जापान, रूस और यूरोप जैसे देशों को चौंका दिया है, क्योंकि यह बदलाव वैश्विक शक्ति संतुलन को लेकर समीकरण बदल सकता है।
ट्रंप-जिनपिंग मुलाकात को बताया “ऐतिहासिक”
राष्ट्रपति ट्रंप ने हाल ही में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात की थी। ट्रंप ने इस बैठक को “बहुत सफल” बताया और कहा कि यह मुलाकात “स्थायी शांति और विकास का मार्ग खोलेगी।” उन्होंने X पर लिखा, “यह मुलाकात चिरस्थायी सफलता की ओर ले जाएगी।”
ट्रम्प के इस बयान से स्पष्ट है कि अमेरिका अब टकराव के बजाय सहयोग की राह अपनाना चाहता है।
रक्षा सचिव ने भी दी सहमति
अमेरिकी रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने भी इस नई नीति का समर्थन किया है। उन्होंने मलेशिया में चीन के रक्षा मंत्री एडमिरल डोंग जून से मुलाकात की और दोनों देशों के बीच “सैन्य संवाद का नया चैनल” शुरू करने पर सहमति जताई। हेगसेथ ने कहा कि “अमेरिका-चीन संबंध पहले कभी इतने मजबूत नहीं रहे।”
अमेरिका का रुख क्यों बदला
ट्रंप प्रशासन का यह रुख इसलिए चौंकाने वाला है क्योंकि कुछ महीने पहले तक वॉशिंगटन चीन पर जासूसी, साइबर चोरी और तकनीकी प्रतिस्पर्धा के आरोप लगा रहा था। लेकिन अब अमेरिकी विदेश नीति में बड़ा बदलाव दिखाई दे रहा है। विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप सरकार चीन को “बराबरी का साझेदार” मानकर एक नई विश्व व्यवस्था (New World Order) की ओर बढ़ रही है।

क्या है G-2 अवधारणा
‘G-2’ यानी Group of Two का विचार पहली बार बुश प्रशासन के दौरान अर्थशास्त्री फ्रेड बर्गस्टन ने दिया था। बाद में इतिहासकार नियाल फर्ग्यूसन ने इसे “चिमेरिका” नाम दिया — यानी चीन (China) और अमेरिका (America) । इस साझेदारी का उद्देश्य वैश्विक आर्थिक असंतुलन, जलवायु परिवर्तन और व्यापार संकट जैसी चुनौतियों का संयुक्त समाधान करना था।
भारत और दुनिया के लिए क्या मायने
अगर अमेरिका और चीन मिलकर काम करते हैं, तो इसका असर पूरी दुनिया पर पड़ेगा। भारत, रूस और यूरोपीय संघ जैसे देश, जो अब तक अंतरराष्ट्रीय राजनीति में प्रभावशाली भूमिका निभा रहे थे, नई स्थिति में खुद को दूसरे पायदान पर पा सकते हैं। अब भारत को अपनी विदेश नीति और रणनीतिक साझेदारियों पर नए सिरे से विचार करना होगा, ताकि वह इस उभरते G-2 के सामने अपनी जगह मजबूत रख सके।