Fact Check
Search

जुमे की नमाज के दौरान ताबड़तोड़ फायरिंग ! अहमदिया मस्जिद में घुसकर बरसाई अंधाधुंध गोलियां  

जुमे की नमाज के दौरान ताबड़तोड़ फायरिंग ! अहमदिया मस्जिद में घुसकर बरसाई अंधाधुंध गोलियां

अहमदिया मस्जिद हमला जुमे की नमाज

पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में अहमदी मस्जिद पर हमला, 1 की मौत और 6 घायल।

जुमे की नमाज़ के दौरान रबवाह शहर में आतंकियों ने बरपाया कहर; अहमदी समुदाय ने सरकार से कार्रवाई की मांग की।

पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में अहमदी समुदाय की एक मस्जिद पर बंदूकधारियों ने हमला कर दिया, जिसमें 1 सुरक्षाकर्मी की मौत और 6 लोगों के घायल होने की खबर सामने आई है।

यह घटना लाहौर से लगभग 170 किलोमीटर दूर रबवाह शहर में हुई, जो अहमदी समुदाय का मुख्यालय माना जाता है। कट्टरपंथी संगठन ‘तहरीक-ए-लब्बैक पाकिस्तान’ (TLP) पर शक जताया जा रहा है।

हमला बेत-उल-महदी मस्जिद में जुमे की नमाज के तुरंत बाद हुआ। उस समय बड़ी संख्या में अहमदी समुदाय के लोग नमाज अदा कर रहे थे। बताया जा रहा है कि हमले में कई स्वयंसेवक भी घायल हुए हैं।

पुलिस अधिकारी ने दी जानकारी

पुलिस अधिकारी अब्दुल्ला अहमद ने बताया कि एक हमलावर मस्जिद के गेट पर पहुंचा और सुरक्षा में तैनात अहमदी स्वयंसेवी गार्ड पर गोलीबारी शुरू कर दी। इस हमले में गार्ड की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि छह अहमदी समुदाय के लोग घायल हो गए — जिनमें से एक की हालत गंभीर बताई जा रही है।

गार्डों ने जवाबी कार्रवाई में हमलावर को मार गिराया। अधिकारी ने बताया कि हमले के वक्त मस्जिद के अंदर लोग नमाज पढ़ रहे थे।

पुलिस ने इलाके को घेर लिया है और जांच शुरू कर दी गई है।

अहमदिया समुदाय ने की कड़ी निंदा, सरकार से कार्रवाई की मांग

अहमदिया जमात पाकिस्तान के प्रवक्ता आमिर महमूद ने इस हमले की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि देश में अहमदियों के खिलाफ नफरत फैलाने वाले भाषण लगातार जारी हैं, जो बेहद चिंताजनक है।

उन्होंने कहा —

“सरकार को इस नफरत भरे अभियान को तुरंत रोकना चाहिए और हमले के जिम्मेदार लोगों को न्याय के दायरे में लाना चाहिए। ऐसे भड़काऊ भाषण और झूठे प्रचार लोगों को अहमदी समुदाय पर हमले के लिए उकसाते हैं, जिन्हें रोकना अब बेहद जरूरी है।”

हमले के लिए कौन जिम्मेदार?

अब तक किसी भी संगठन ने इस हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है।

हालांकि, स्थानीय लोगों और मीडिया रिपोर्ट्स में कट्टरपंथी संगठन ‘तहरीक-ए-लब्बैक पाकिस्तान’ (TLP) पर शक जताया जा रहा है।

सरकार ने मामले की जांच शुरू कर दी है और संदिग्ध संगठनों पर निगरानी बढ़ा दी गई है।

अल्पसंख्यक होकर भी भेदभाव के शिकार

पाकिस्तान का निर्माण भले ही मोहम्मद अली जिन्ना ने मुस्लिमों के लिए किया था, लेकिन देश के अहमदी मुस्लिम दशकों से भेदभाव का सामना कर रहे हैं। साल 1974 में पाकिस्तान की संसद ने अहमदियों को गैर-मुस्लिम घोषित कर दिया।

इसके बाद उनके खिलाफ सामाजिक और धार्मिक स्तर पर भेदभाव तेज हो गया।

1984 में लगे सख्त प्रतिबंध

साल 1984 में अहमदी समुदाय पर कई कड़े प्रतिबंध लगाए गए। इनमें उनकी मस्जिदों पर मीनार या गुंबद बनाने पर रोक, धार्मिक प्रतीक इस्तेमाल करने पर मनाही और धार्मिक सभाओं पर पाबंदी जैसी शर्तें शामिल थीं।

इन कानूनों के बाद से अहमदी समुदाय को पाकिस्तान में अपनी धार्मिक पहचान जताने में भी कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है।

 

70वें फिल्मफेयर अवॉर्ड्स में लापता लेडीज’ ने रचा इतिहास, आलिया भट्ट बनीं बेस्ट एक्ट्रेस! बेस्ट एक्टर अवॉर्ड किसने जीता?

admin

Hi I am admin

Leave a Comment

Your email address will not be published.