तालिबान का ‘सीधा ऐलान’: अब कोई बातचीत नहीं! पाकिस्तान के हवाई हमलों में अफगानिस्तान के 3 क्रिकेटरों की मौत
पाकिस्तान के हवाई हमलों में अफगानिस्तान के 3 क्रिकेटरों समेत 8 लोगों की मौत हुई, जिसके बाद तालिबान ने युद्धविराम तोड़ने की घोषणा की। वहीं वजीरिस्तान में TTP ने पाक सैन्य शिविर पर हमला कर 7 सैनिकों को मार दिया।
पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच 48 घंटे के युद्धविराम को बढ़ाने पर सहमति बनने के कुछ ही घंटों बाद फिर से तनाव बढ़ गया है। तालिबान ने आरोप लगाया है कि पाकिस्तान ने डूरंड लाइन के पास पक्तिका प्रांत में हवाई हमले किए हैं। इन हमलों के बाद तालिबान ने कहा कि दोनों देशों के बीच हुआ युद्धविराम अब खत्म हो गया है।
3 खिलाड़ियों समेत 8 की मौत
रिपोर्टों के मुताबिक, पाकिस्तान ने अरगुन और बेरमल जिलों में कई घरों को निशाना बनाया। इन हमलों में 8 नागरिकों की मौत हुई, जिनमें स्थानीय अफगान क्रिकेटर भी शामिल थे। अफगानिस्तान क्रिकेट बोर्ड के प्रवक्ता ने बताया कि ये खिलाड़ी मैच खेलकर लौट रहे थे, तभी हमला हुआ।
पाकिस्तान के सुरक्षा अधिकारी ने बताया कि हवाई हमला हुआ है, लेकिन यह संघर्ष विराम अफगान तालिबान के साथ था, न कि उन आतंकियों के साथ जो पाकिस्तान में हमले करते हैं। यह हमला ऐसे समय हुआ जब पाकिस्तान का प्रतिनिधिमंडल दोहा पहुंच चुका है और अफगान प्रतिनिधिमंडल के शनिवार को वहां पहुंचने की उम्मीद है।
पाक के सैन्य शिविर पर हुआ हमला
पाकिस्तान के उत्तरी वजीरिस्तान में आज सुबह एक सैन्य शिविर पर बड़ा हमला हुआ। स्थानीय सुरक्षा अधिकारियों के अनुसार इस हमले में 7 पाकिस्तानी सैनिक मारे गए और 13 घायल हो गए। हमला मीर अली इलाके के खड्डी सैन्य शिविर पर हुआ, जहां विस्फोटकों से भरी एक गाड़ी शिविर की दीवार से टकराई।

अधिकारियों ने बताया कि धमाके के बाद 2 और आतंकवादियों ने अंदर घुसने की कोशिश की, लेकिन सुरक्षाबलों ने उन्हें मार गिराया। इस हमले की ज़िम्मेदारी तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) ने ली है।
रॉयटर्स के अनुसार पाकिस्तान और अफगान तालिबान प्रशासन ने कई दिनों की भीषण लड़ाई के बाद 48 घंटे के अस्थायी युद्धविराम पर सहमति जताई थी। यह युद्धविराम बुधवार शाम 6 बजे से लागू हुआ था। हालिया झड़पों में सीमा के दोनों ओर 12 से ज्यादा लोगों की मौत और करीब 100 लोगों के घायल होने की खबर है। 2021 में तालिबान के अफगानिस्तान की सत्ता में लौटने के बाद यह दोनों देशों के बीच हिंसा का सबसे गंभीर दौर माना जा रहा है।