स्थाई शांति बहाली की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए ब्रिटेन, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और पुर्तगाल ने फिलीस्तीन को मान्यता दी है ।
नेतन्याहू ने फैसले को बताया “बेहूदा और आतंकवाद को इनाम”।
प्रमुख वैश्विक यूरोपीय देशों ने इजरायल फिलीस्तीन को लेकर एक बड़ा फैसला किया है। इस फैसले के अंतर्गत ब्रिटेन, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया के साथ अब पुर्तगाल ने भी फिलीस्तीन को मान्यता दे दी है। इन देशों का मानना है कि स्थाई शांति के समाधान के लिए दो-राष्ट्र सिद्धांत को मान्यता देना जरूरी है।
भड़के नेतन्याहू
इसराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा कि उनका देश फिलीस्तीन को देश का दर्जा मिलने की घटना का स्वागत कर आत्महत्या नहीं करेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि यह सब यूरोपीय राजनीतिक जरूरत के चलते हुआ है। इजराइल के प्रवक्ता ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि यह फैसला “आतंकवाद को एक किस्म का इनाम” है।
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने कहा
फिलीस्तीन को मान्यता देना एक ऐतिहासिक निर्णय है हम फिलिस्तीन के लोगों के साथ खड़े हैं। साथ ही ब्रिटेन की ओर से यह स्पष्ट किया गया कि इसका मतलब यह नहीं है कि कोई नया देश बन जाएगा यह कदम हमारी ओर से शांति प्रक्रिया के लिए एक हिस्सा है
घटिया और बेहूदा फैसला
नेतन्याहू ने इसे “घटिया और बेहूदा फैसला” बताते हुए कहा कि ऐसे देश हमारे उन सैनिकों का अपमान कर रहे हैं जिन्होंने युद्ध में अपनी जान गंवाई।इजराइल ने ब्रिटेन और अन्य यूरोपीय देशों के निर्णय का कड़ा विरोध किया है। नेतन्याहू अगले हफ्ते संयुक्त राष्ट्र महासभा के लिए न्यूयॉर्क जाएंगे।
फिलीस्तीन ने किया स्वागत
दूसरी ओर, फिलीस्तीन के विदेश मंत्रालय ने इस मान्यता का स्वागत करते हुए कहा कि वह शांति के लिए दो-राष्ट्र समाधान को स्वीकार करता है।
ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री ऑफिस की ओर से कहा गया कि ऑस्ट्रेलिया एक स्वतंत्र और संप्रभु फिलीस्तीन को मान्यता देता है और फिलीस्तीनी लोगों की आज़ादी की इच्छा का सम्मान करता है। वहीं, कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क टार्नी ने कहा कि 1947 से ही कनाडा दो-राष्ट्र समाधान का समर्थन करता आया है। हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि मान्यता देने का मतलब हमास के कदमों को स्वीकार करना नहीं है