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जुबीन गर्ग: असम के संगीत सितारे का दुनिया को अलविदा असम से बॉलीवुड तक कैसा रहा जुबीन का सफर

Zubeen garg

असम के मशहूर गायक और संगीतकार जुबीन गर्ग का निधन संगीत जगत के लिए बड़ी क्षति है।

‘या अली’ जैसे हिट गीतों से देशभर में पहचान पाने वाले जुबीन ने असमिया और हिंदी संगीत को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया।

जुबीन गर्ग, असम के सबसे प्रतिभाशाली गायक, अभिनेता, संगीतकार और गीतकार, ने अपनी मधुर आवाज और प्रतिभा से भारतीय संगीत जगत में एक अमिट छाप छोड़ी है। उनकी आवाज़ में एक ऐसी गहराई और भावनात्मक संवेदनशीलता थी, जिसने उन्हें न केवल असम में बल्कि पूरे देश में पहचान दिलाई। उनके निधन की खबर से संगीत प्रेमियों के दिल में अपूरणीय शोक का माहौल बन गया है। गुवाहाटी में उनका पार्थिव शरीर पहुंच गया है, जहां उनके प्रशंसक, मित्र और परिवारजन उन्हें अंतिम विदाई देने के लिए इकट्ठा हुए हैं।

जुबीन गर्ग का संगीत जीवन 1992 में शुरू हुआ, जब उन्होंने अपना पहला असमी एल्बम “अनामिका” रिलीज़ किया। इसके बाद उनके संगीत करियर ने तेजी से प्रगति की। उन्होंने केवल असमिया ही नहीं, बल्कि हिंदी, बंगाली, कन्नड़, उड़िया, तमिल, तेलुगु, पंजाबी, नेपाली, मराठी और मलयालम जैसी विभिन्न भाषाओं में अपनी कला का जादू बिखेरा। उनकी बहुभाषी प्रतिभा ने उन्हें भारतीय संगीत के मंच पर एक अद्वितीय स्थान दिलाया। असमिया संगीत जगत में उनके योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता, क्योंकि उन्होंने इसे नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया और इसे राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता दिलाई।

बॉलीवुड में जुबीन गर्ग का सफर भी बेहद प्रेरणादायक रहा। उनके द्वारा फिल्म “गैंगस्टर” के लिए गाया गया गाना “या अली” दर्शकों के दिलों को छू गया। इस गीत ने उन्हें ग्लोबल इंडियन फिल्म अवार्ड 2006 में सर्वश्रेष्ठ प्लेबैक सिंगर का सम्मान दिलाया। बॉलीवुड में उनकी सफलता ने यह साबित कर दिया कि अगर प्रतिभा और मेहनत साथ हो, तो किसी भी क्षेत्र में सीमाओं को पार किया जा सकता है।

जुबीन गर्ग को उनके जीवन और संगीत के लिए कई पुरस्कार और सम्मान प्राप्त हुए। मेघालय के विज्ञान और प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय द्वारा उन्हें डॉक्टर ऑफ़ लिटरेचर की मानद उपाधि से सम्मानित किया गया। यह उनके योगदान और संगीत क्षेत्र में उनके उत्कृष्ट कार्य का एक प्रतीक है। उनकी संगीत यात्रा केवल सफलता की कहानी नहीं है, बल्कि यह कड़ी मेहनत, समर्पण और आत्मविश्वास का बेहतरीन उदाहरण है।
जुबीन गर्ग की विरासत भारतीय संगीत के लिए हमेशा प्रेरणा बनेगी। उनकी मधुर आवाज़, अनोखी शैली और योगदान आने वाली पीढ़ियों के लिए मार्गदर्शन का काम करेगा। संगीत प्रेमियों के दिलों में उनकी याद हमेशा रहेगी, और उनका नाम भारतीय संगीत की अमूल्य धरोहर के रूप में हमेशा याद रखा जाएगा।
कुल मिलाकर, जुबीन गर्ग ने न केवल संगीत को नया जीवन दिया, बल्कि हमारे दिलों को भी छू लिया। उनकी अनुपस्थिति हमेशा महसूस होगी। उनके गाए और रचे हुए गीत, उनकी कला हमेशा लोगों के दिलों में जीवित रहेंगी।

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