बिहार चुनाव 2025: NDA के सीट फॉर्मूले पर सहमति, कांग्रेस दिखा रही आत्मविश्वास – सीएम फेस को लेकर उठे सवाल
नई दिल्ली/सासाराम: बिहार विधानसभा चुनाव जैसे-जैसे करीब आ रहे हैं, राज्य में राजनीतिक गतिविधियां जोर पकड़ने लगी हैं। दिल्ली में कांग्रेस नेतृत्व और बिहार के सांसदों के बीच हुई ताजा बैठक के बाद NDA और कांग्रेस गठबंधन के बीच सीट शेयरिंग पर सहमति और भविष्य की रणनीतियों को लेकर कई अहम बातें सामने आई हैं।
बैठक में क्या-क्या हुआ? क्या बोले मनोज राम?
कांग्रेस सांसद मनोज राम ने दिल्ली में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी की मौजूदगी में हुई अहम बैठक के बाद कहा:
“बैठक में हमें रणनीति, संगठन और सीट बंटवारे पर स्पष्टता मिली है। सभी नेताओं ने खुलकर अपने विचार रखे, जिससे पूरा गठबंधन एकजुट महसूस कर रहा है।”
यह बैठक बिहार चुनाव को जीतने की तैयारियों के लिए किसी मोटिवेशनल मीटिंग की तरह रही, जहां से नेतागण उत्साहित होकर लौटे।
सीट शेयरिंग: विवाद नहीं, एकता पर ज़ोर
- मनोज राम के मुताबिक, सीट बंटवारे को लेकर गठबंधन में कोई बड़ा विवाद नहीं है। सबकी सहमति के साथ सीटें तय हो रही हैं।
- RJD, कांग्रेस, वामदल और अन्य घटक दल संतुष्ट नजर आ रहे हैं।
- मनोज राम मानते हैं – “थोड़ा बहुत बचा है, लेकिन गठबंधन टूटेगा नहीं। सभी दल जीत के मूड में हैं।”
सीएम फेस पर उठी बहस – तेजस्वी या कोई और?
जब मीडिया ने सीएम उम्मीदवार (Chief Minister Face) को लेकर सवाल किया, तो मनोज राम ने साफ कहा:
“हमारे पास तेजस्वी यादव समेत कई योग्य और अनुभव वाले नेता हैं। सीएम फेस को लेकर जल्द ही आपसी सहमति बन जाएगी। फिलहाल, फोकस चुनाव जीतना है।”
यह जवाब बताता है कि गठबंधन में फिलहाल लचीलापन है। हर पार्टी अपना हित, लेकिन साथ ही साझा रणनीति पर काम कर रही है।
पप्पू यादव की भूमिका – क्या कांग्रेस में होंगे शामिल?
हाल ही में बिहार के निर्दलीय सांसद पप्पू यादव भी कांग्रेस की बैठक में शामिल हुए, जिससे चर्चाओं को हवा मिली कि वे कांग्रेस में शामिल हो सकते हैं।
मनोज राम ने परिस्थिति साफ करते हुए कहा:
“सम्मान और मिलनाजुलना अलग बात है, पार्टी में औपचारिक तौर पर शामिल होना अलग। पप्पू यादव कांग्रेस विचारधारा के बहुत करीब रहे हैं, लेकिन भूमिका हाईकमान तय करेगा।”
यानि अभी सवाल खुला है, लेकिन दरवाजे खुले हैं।
बीजेपी पर सीधा हमला – NDA देगी पटकनी?
मनोज राम ने भाजपा को घेरते हुए कहा:
“अबकी बार जनता बदलाव चाहती है। NDA एकजुट है, सीटों का विवाद नहीं है। BJP की जमीन बिहार में खिसक चुकी है, और हम पूरी ताकत से चुनाव जीतेंगे।”
- कांग्रेस और सहयोगी दलों ने दावा किया कि इस बार राज्य में सत्ता का समीकरण बदल जाएगा।
- जनता में वर्तमान सरकार को लेकर असंतोष है – यही विपक्ष का सबसे बड़ा हथियार है।
कांग्रेस नेतृत्व में एकजुटता और आत्मविश्वास
- राहुल गांधी के नेतृत्व में सभी सहयोगी दल एक मंच पर हैं।
- गठबंधन में विचारों की विविधता है, लेकिन उद्देश्य एक – NDA को सत्ता में लाना।
- आम जनता में भी बदलाव की इच्छा दिखाई पड़ रही है, जो विपक्ष के लिए उम्मीद की किरण बन सकती है।
निष्कर्ष: क्या वाकई सत्ता बदलेगी?
बैठक से जो संदेश निकलकर आया है, वो ये कि बिहार NDA और कांग्रेस गठबंधन दोनों मोर्चेबंदी में जुट चुके हैं। सीट शेयरिंग विवाद नहीं, बल्कि एक एजेंडे के साथ तय हो रहा है। सीएम फेस को लेकर अभी कशमकश जरूर है, लेकिन रणनीति स्पष्ट है – जनता का भरोसा जीतना।
अब देखना है कि क्या NDA गठबंधन अपना दावा सच कर पाएगा या बीजेपी फिर से वापसी करेगी? जनता का फैसला चुनाव परिणाम में सामने आएगा।
डिस्क्लेमर: यह रिपोर्ट ताजा राजनीतिक गतिविधि, नेताओं के बयानों और आम जनमत के आधार पर तैयार की गई है। किसी भी पार्टी या प्रत्याशी के पक्ष या विपक्ष में संपादित नहीं है।
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