20 असफलताओं के बाद विवेक यादव बने आईपीएस, मां ने सिलाई कर बनाया अफसर
चंदेरी: संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) ने सिविल सेवा परीक्षा 2025 का परिणाम घोषित कर दिया है। इस वर्ष कुल 958 उम्मीदवारों का चयन हुआ है। हर साल यूपीएससी के परिणाम में कुछ ऐसी कहानियां सामने आती हैं, जो लाखों युवाओं को अपने सपनों के लिए संघर्ष करने की प्रेरणा देती हैं। ऐसी ही एक कहानी मध्य प्रदेश की ऐतिहासिक नगरी चंदेरी से सामने आई है।
चंदेरी के रहने वाले विवेक यादव ने सिविल सेवा परीक्षा में 487वीं रैंक हासिल कर अपने सपने को साकार कर लिया है। यह सफलता उन्हें आसानी से नहीं मिली। लगातार 20 से ज्यादा असफलताओं का सामना करने के बाद भी उन्होंने हार नहीं मानी और आखिरकार आईपीएस अधिकारी बनने का अपना सपना पूरा कर लिया। विवेक की यह सफलता सिर्फ एक परीक्षा पास करने की कहानी नहीं है, बल्कि यह एक मां के त्याग, संघर्ष और बेटे के अटूट विश्वास की कहानी भी है।

रेलवे की नौकरी के साथ जारी रही तैयारी
यूपीएससी में सफलता हासिल करना अपने आप में एक बड़ा मुकाम होता है। अक्सर लोग इतनी प्रतिष्ठित सेवा मिलने के बाद संतुष्ट हो जाते हैं, लेकिन विवेक का सपना खाकी वर्दी पहनने का था। उन्होंने नौकरी की जिम्मेदारियों के साथ-साथ फिर से तैयारी शुरू की और दोबारा परीक्षा दी। इस बार उनकी मेहनत रंग लाई और उन्होंने आखिरकार आईपीएस अधिकारी बनने का सपना पूरा कर लिया।
“मेरी मां की मेहनत मेरी सबसे बड़ी ताकत है”
विवेक अपनी सफलता का श्रेय अपनी मां को देते हैं। वे कहते हैं—
“मेरी सफलता के पीछे मेरी मां की सबसे बड़ी भूमिका है। उन्होंने वर्षों तक सिलाई करके मुझे पढ़ाया। जब मैं बार-बार असफल हो रहा था, तब भी उन्होंने मुझे कभी हार मानने नहीं दी।”
मां ने सिलाई कर संभाला घर
सामान्य परिवार से आने वाले विवेक के परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत नहीं थी। ऐसे में उनके सपने को साकार करने की कमान उनकी मां ने संभाली। उनकी मां ने कई सालों तक सिलाई-बुनाई का काम करके घर चलाया और बेटे की पढ़ाई का खर्च उठाया। विवेक की मेहनत के साथ उनकी मां का समर्पण भी त्याग की मिसाल है। अपने बेटे को अफसर बनाने के लिए विवेक की मां ने दिन-रात मेहनत की।
20 असफलताएं मिलीं, लेकिन हिम्मत नहीं टूटी
विवेक की सफलता के पीछे लंबा संघर्ष रहा है। यूपीएससी में सफलता हासिल करने से पहले विवेक को अलग-अलग प्रतियोगी परीक्षाओं में करीब 20 बार असफलता का सामना करना पड़ा। बार-बार मिल रही निराशा से उन्हें ऐसा लगा कि शायद उनका सपना अधूरा रह जाएगा, लेकिन विवेक ने हर असफलता को सीख की तरह लिया। हर बार गिरकर फिर उठना ही उनकी सबसे बड़ी ताकत बन गया। लगातार मेहनत और धैर्य ने आखिरकार उन्हें वह दिन दिखाया, और आज यूपीएससी की सूची में उनका नाम शामिल हुआ।
तकनीकी वजह से छूट गया था पहला सपना
यूपीएससी में सफलता मिलने के बाद भी उनकी राह पूरी तरह आसान नहीं थी। इससे पहले फॉर्म भरते समय ओबीसी प्रमाणपत्र से जुड़ी एक तकनीकी समस्या के कारण उन्हें आरक्षित श्रेणी का लाभ नहीं मिल पाया। अच्छी रैंक होने के बावजूद उन्हें मनचाही सेवा नहीं मिल सकी और उनका चयन भारतीय रेलवे प्रबंधन सेवा (IRMS) में हो गया था।
लाखों युवाओं के लिए बनी प्रेरणा
विवेक की कहानी उन करोड़ों युवाओं के लिए प्रेरणा है जो कठिन परिस्थितियों में अपने लक्ष्य को पाने का जज्बा रखते हैं। विवेक यादव की यह सफलता आज सिर्फ उनके परिवार के लिए ही नहीं, बल्कि चंदेरी और पूरे मध्य प्रदेश के लिए गर्व का विषय बन गई है। उनकी यात्रा उन लाखों युवाओं के लिए उम्मीद की एक मिसाल है, जो कठिनाइयों के बावजूद अपने सपनों को सच करने की कोशिश में लगे हुए है ।