गणतंत्र दिवस से पहले सख्त पहरा, जम्मू-कश्मीर में बड़े स्तर पर तलाशी अभियान

जम्मू-कश्मीर में आतंकी घुसपैठ की आशंका के बीच सुरक्षा एजेंसियों ने अलर्ट मोड में आकर बड़ा कदम उठाया है। सीमा से सटे इलाकों में आतंकियों की किसी भी कोशिश को नाकाम करने के लिए सेना, बीएसएफ और जम्मू-कश्मीर पुलिस मिलकर व्यापक सर्च ऑपरेशन चला रही हैं। यह अभियान बॉर्डर एरिया से लेकर अंदरूनी गांवों तक फैलाया गया है।
खुफिया इनपुट के बाद कार्रवाई
सुरक्षा एजेंसियों को खुफिया जानकारी मिली कि आतंकी संगठन घने कोहरे, सर्द मौसम और दुर्गम इलाकों का फायदा उठाकर घुसपैठ की कोशिश कर सकते हैं। सर्दियों में दृश्यता कम होने और कई इलाकों में आवाजाही मुश्किल होने के कारण आतंकी ऐसे समय को अपने लिए मुफीद मानते हैं। इसी आशंका को देखते हुए यह बड़ा ऑपरेशन शुरू किया गया।
80 से ज्यादा गांवों में तलाशी
इस सर्च ऑपरेशन का दायरा काफी बड़ा है। जम्मू, सांबा, कठुआ और राजौरी जैसे संवेदनशील जिलों के 80 से ज्यादा गांवों में जवान घर-घर जाकर तलाशी ले रहे हैं। गांवों में सुरक्षा बलों की मौजूदगी बढ़ा दी गई है और हर संदिग्ध गतिविधि पर नजर रखी जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि आम लोगों की सुरक्षा सर्वोपरि है और किसी भी कीमत पर आतंकियों को पनाह नहीं लेने दी जाएगी।
मजालता के जंगलों से मिली अहम सूचना
ऑपरेशन को और रफ्तार दी गई जब मजालता के जंगलों से जुड़ी एक अहम जानकारी सामने आई। बताया गया कि दो आतंकी एक घर से खाना लेकर पास के जंगलों की ओर भागे थे। जानकारी के मुताबिक, ये आतंकी शाम करीब साढ़े छह बजे चोरे मोतु गांव पहुंचे थे और मंगतु राम के घर से खाना लिया था। इसके बाद वे जंगल की ओर निकल गए। इस सूचना के बाद पूरे इलाके को घेरकर तलाशी अभियान और सख्त कर दिया गया।
सीमावर्ती इलाकों में कड़ी निगरानी
जम्मू और उसके आसपास के सीमावर्ती इलाकों में सुरक्षा बल लगातार गश्त कर रहे हैं। सांबा, अखनूर सेक्टर और राजौरी जैसे इलाकों में सर्चिंग तेज कर दी गई है। पहाड़ी इलाकों, जंगलों और नालों में भी जवान सघन तलाशी ले रहे हैं ताकि आतंकी कहीं छिप न सकें।

शहरों में भी सर्चिंग
ग्रामीण इलाकों के साथ-साथ शहरी क्षेत्रों में भी चौकसी बढ़ा दी गई है। अमीराकदल और महाराजा बाजार जैसे घनी आबादी वाले इलाकों में सुरक्षा बलों ने सर्च ऑपरेशन चलाया। यहां विस्फोटक, हथियार और गोला-बारूद की तलाश के लिए स्निफर डॉग और मेटल डिटेक्टर की मदद ली जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि किसी भी तरह का जोखिम नहीं लिया जा सकता।
गणतंत्र दिवस से पहले सख्ती
आने वाले गणतंत्र दिवस को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था और ज्यादा कड़ी कर दी गई है। श्रीनगर के लाल चौक तक सर्च ऑपरेशन किया गया है। लाल चौक का क्लॉक टावर पिछले कुछ वर्षों में एक बड़ा टूरिस्ट स्पॉट बन चुका है, जहां रोज बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं। इसके अलावा बख्शी स्टेडियम के आसपास भी एंटी-सैबोटेज चेकिंग की गई है, क्योंकि यहीं पर राष्ट्रीय पर्वों के मुख्य कार्यक्रम आयोजित होते हैं।
बीएसएफ का बड़ा खुलासा
इस बीच बीएसएफ ने भी एक अहम जानकारी दी। बीते महीने बीएसएफ अधिकारियों ने बताया था कि भारत की ऑपरेशन सिंदूर के बाद नुकसान झेलने के बावजूद पाकिस्तान ने फिर से जम्मू क्षेत्र के सामने करीब 72 आतंकी लॉन्च पैड सक्रिय कर दिए हैं। इनमें से कुछ अंतरराष्ट्रीय सीमा के पास हैं, जबकि ज्यादातर लॉन्च पैड एलओसी के आसपास बताए जा रहे हैं। इसके बाद से सीमा पर निगरानी और कड़ी कर दी गई है।
जम्मू क्यों बन रहा है आतंकी रास्ता
सुरक्षा अधिकारियों के मुताबिक कश्मीर घाटी में घुसपैठ के पारंपरिक रास्ते अब बाड़बंदी और आधुनिक निगरानी के चलते काफी हद तक बंद हो चुके हैं। इसी वजह से आतंकी संगठन जम्मू क्षेत्र को वैकल्पिक रास्ते के तौर पर इस्तेमाल करने की कोशिश कर रहे हैं। जम्मू सीमा के कुछ हिस्से बिना बाड़ के हैं और वहां का भौगोलिक ढांचा आतंकियों के लिए चुनौती के साथ-साथ मौका भी देता है।