इंश्योरेंस लॉज (अमेंडमेंट) बिल 2025 शीतकालीन सत्र में होगा पेश, 2047 तक “हर नागरिक के लिए बीमा” का लक्ष्य

देश के बीमा क्षेत्र में अब तक का सबसे बड़ा बदलाव होने जा रहा है। केंद्र सरकार ने बीमा सेक्टर में विदेशी निवेश की सीमा को 74 फीसदी से बढ़ाकर 100 फीसदी करने वाले विधेयक को मंजूरी दे दी है। केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में इस अहम फैसले पर मुहर लगी। सरकार इसे संसद के मौजूदा शीतकालीन सत्र में पेश कर सकती है। माना जा रहा है कि यह फैसला भारतीय बीमा बाजार की तस्वीर बदल देगा और निवेश, रोजगार व प्रतिस्पर्धा के नए मौके लेकर आएगा।
बजट में किया गया था बड़ा ऐलान
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने वित्त वर्ष 2025–26 के बजट भाषण में ही इस बड़े सुधार का संकेत दे दिया था। उन्होंने कहा था कि बीमा कानून 1938 में संशोधन कर विदेशी निवेश को पूरी तरह खोलने का प्रस्ताव लाया जाएगा। अब कैबिनेट की मंजूरी के बाद यह प्रस्ताव कानून बनने की दिशा में आगे बढ़ गया है। सरकार का कहना है कि बीमा क्षेत्र में पहले ही प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के जरिए करीब 82 हजार करोड़ रुपये आ चुके हैं। नई नीति लागू होने के बाद यह आंकड़ा कई गुना बढ़ सकता है।
क्या है इंश्योरेंस लॉज (अमेंडमेंट) बिल, 2025?
लोकसभा बुलेटिन के मुताबिक, इंश्योरेंस लॉज (अमेंडमेंट) बिल, 2025 का मकसद देश की ज्यादा से ज्यादा आबादी तक बीमा की पहुंच बढ़ाना है। इसके साथ ही बीमा कंपनियों के लिए कारोबार करना आसान बनाना भी इस बिल का बड़ा उद्देश्य है। यह बिल बीमा अधिनियम 1938 में कई अहम बदलाव करता है, जो अब तक भारतीय बीमा क्षेत्र की रीढ़ रहा है। इसी कानून के तहत यह तय होता है कि बीमा कंपनियां कैसे काम करेंगी, किन नियमों का पालन करना होगा और किन शर्तों पर उन्हें लाइसेंस मिलेगा।

बीमा बाजार में बढ़ेगी प्रतिस्पर्धा
सरकार का मानना है कि 100 फीसदी FDI की अनुमति मिलने से बीमा बाजार में नई विदेशी कंपनियों की एंट्री आसान होगी। इससे प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और ग्राहकों को ज्यादा विकल्प मिलेंगे। बीमा कंपनियां बेहतर प्रोडक्ट, नई पॉलिसी और किफायती प्रीमियम के साथ बाजार में उतरेंगी।रिपोर्ट के मुताबिक, जब बाजार में मुकाबला बढ़ता है तो उसका सीधा फायदा ग्राहकों को मिलता है। बेहतर सर्विस, तेज क्लेम सेटलमेंट और ज्यादा पारदर्शिता जैसी चीजें अपने आप आने लगती हैं।
पॉलिसीधारकों को क्या फायदा होगा?
इस बिल का फोकस सिर्फ निवेश बढ़ाने तक सीमित नहीं है। सरकार ने साफ किया है कि पॉलिसीधारकों के हितों को मजबूत करना इसकी सबसे बड़ी प्राथमिकता है। नए संशोधनों से ग्राहकों की वित्तीय सुरक्षा बढ़ेगी और उन्हें लंबे समय में बेहतर रिटर्न और सुरक्षा मिलेगी। ग्रांट थॉर्नटन इंडिया के पार्टनर नरेंद्र गणपुले का कहना है कि यह फैसला पूरी तरह ग्राहक-केंद्रित है। इससे लोगों को ज्यादा विकल्प, नए तरह के बीमा प्रोडक्ट, बेहतर कीमतें और अच्छी सेवाएं मिलेंगी।
रोजगार के नए मौके
बीमा सेक्टर में निवेश बढ़ने का मतलब है नई कंपनियां, नई ब्रांच और नई भर्तियां। सरकार को उम्मीद है कि इस फैसले से हजारों नहीं बल्कि लाखों नए रोजगार के अवसर पैदा होंगे। खासतौर पर टियर-2 और टियर-3 शहरों में बीमा कंपनियों का विस्तार तेज हो सकता है। इस विधेयक में LIC अधिनियम में बदलाव का भी प्रस्ताव है। इसके तहत भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) के निदेशक मंडल को ज्यादा स्वतंत्रता मिलेगी। अब बोर्ड को शाखा विस्तार, भर्ती और मानव संसाधन से जुड़े फैसलों में ज्यादा अधिकार मिल सकेंगे। सरकार का मानना है कि इससे LIC और ज्यादा प्रतिस्पर्धी बनेगा और निजी कंपनियों के मुकाबले अपनी स्थिति मजबूत कर पाएगा।