शाम 6:52 बजे कार में हुआ तेज़ विस्फोट, 9 की मौत,30 घायल पूरे दिल्ली-एनसीआर समेत मुंबई, यूपी और उत्तराखंड में हाई अलर्ट घोषित

दिल्ली के लाल किला मेट्रो स्टेशन के गेट नंबर-1 के सामने सामने सोमवार शाम लगभग 6:52 बजे अचानक एक कार में जोरदार धमाका हो गया। विस्फोट की आवाज इतनी तेज थी कि चांदनी चौक से लेकर कई किलोमीटर दूर तक लोग डर गए। कुछ ही सेकंड में कार आग की लपटों में घिर गई, और उसके पास खड़ी कई गाड़ियां भी जल उठीं।
ब्लास्ट में कितने घायल और कितनी मौत
इस विस्फोट में 9 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 30 से ज्यादा लोग घायल बताए जा रहे हैं। सभी घायलों को तुरंत एलएनजेपी (लोक नायक जयप्रकाश) अस्पताल में भर्ती कराया गया है। अस्पताल प्रशासन के अनुसार, इनकी मौत अस्पताल पहुंचने से पहले ही हो गई थी। तीन लोगों की हालत अब भी गंभीर बनी हुई है।
इतना भयावह था विस्फोट
धमाके के बाद आग की लपटें उठने लगीं। आसपास के वाहनों के परखच्चे उड़ गए । लोग इधर-उधर भागने लगे। मौके पर दमकल की सात गाड़ियां भेजी गईं, जिन्होंने काफी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। दिल्ली पुलिस और फोरेंसिक टीमें तुरंत घटनास्थल पर पहुंचीं और इलाके को पूरी तरह घेर लिया गया।
धमाके के बाद एक बड़ा नाम सामने आया
दिल्ली के लाल किला मेट्रो स्टेशन के पास हुए धमाके में अब एक बड़ा नाम सामने आया है। उमर मोहम्मद। बताया जा रहा है कि ब्लास्ट जिस ह्युंडई i20 कार में हुआ था, उसे वही चला रहा था। सीसीटीवी फुटेज में भी उमर मोहम्मद को कार में बैठे देखा गया है। अब उसकी एक तस्वीर भी सामने आई है, जिसे पुलिस जांच में अहम सबूत माना जा रहा है।

कौन हैं उमर मोहम्मद?
इस ब्लास्ट में उमर मोहम्मद का नाम निकलकर सामने आया है, जो i20 चला रहा था। इसे सुसाइड बॉम्बर माना जा रहा है। हालांकि, पुलिस ने अब तक आतंकी या आत्मघाती हमले की पुष्टि नहीं की है।
एनडीटीवी की रिपोर्ट के मुताबिक, सोमवार को जम्मू-कश्मीर और हरियाणा से जिन डॉ. अहमद राठेर और डॉ. मुजम्मिल शकील को गिरफ्तार किया गया था, उमर मोहम्मद इनका ही करीबी माना जा रहा है। बताया जा रहा है कि अपने साथियों की गिरफ्तारी से घबराकर ही उमर मोहम्मद फरीदाबाद से भाग गया था और इस कारण उसने लाल किला के पास धमाका किया।

दिल्ली और देशभर में हाई अलर्ट
विस्फोट के तुरंत बाद दिल्ली पुलिस ने पूरे शहर में हाई अलर्ट जारी कर दिया। साथ ही मुंबई, उत्तर प्रदेश, हरियाणा और उत्तराखंड में भी सतर्कता बढ़ा दी गई है। हर बड़े मॉल, रेलवे स्टेशन, बस अड्डे और भीड़भाड़ वाले इलाकों में सुरक्षा जांच बढ़ा दी गई है।
दिल्ली पुलिस ने कहा है कि “धमाके की प्रारंभिक रिपोर्ट जल्द जारी की जाएगी। जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कार में कौन सवार था, और विस्फोट किस वजह से हुआ। संभावना जताई जा रही है कि यह तकनीकी खराबी या किसी रासायनिक पदार्थ के रिसाव से भी हो सकता है। लेकिन चूंकि यह राजधानी के सबसे सुरक्षित इलाकों में से एक में हुआ है, इसलिए जांच एजेंसियां किसी भी संभावना को नज़रअंदाज़ नहीं कर रही हैं।”

धमाका आतंकवादी हमला था या कुछ और?
अब तक की जांच में जो बातें सामने आई हैं, वे इस ब्लास्ट को आतंकी हमला बताने से पहले सोचने पर मजबूर करती हैं। जांच में पाया गया है कि –कार में ब्लास्ट पीछे की ओर हुआ, लेकिन कोई गड्ढा नहीं बना। किसी घायल के शरीर पर कील या तार जैसी चीजें नहीं मिलीं, जो आम तौर पर आतंकी बमों में पाई जाती हैं। पीड़ितों के चेहरे या शरीर जलने या काले पड़ने के भी कोई गहरे निशान नहीं मिले।
फोरेंसिक टीम अब कार के टूटे हिस्सों से उसका नंबर और मालिक की जानकारी जुटाने में लगी है।

जांच में कौन-कौन सी टीमें जुटीं?
घटना के बाद गृह मंत्री अमित शाह ने तुरंत जांच के आदेश दिए। उन्होंने कहा कि “इस धमाके की जांच हर एंगल से होगी। आसपास के सभी सीसीटीवी कैमरों की जांच की जा रही है।” फिलहाल एनएसजी (राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड), एनआईए (राष्ट्रीय जांच एजेंसी) और एफएसएल (फोरेंसिक साइंस लैब) की टीमें मिलकर जांच कर रही हैं।
सरकार और नेताओं की प्रतिक्रियाएं
- गृह मंत्री अमित शाह खुद एलएनजेपी अस्पताल पहुंचे और घायलों से मुलाकात की। उन्होंने कहा कि दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।
- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी गृह मंत्री से बात कर स्थिति की पूरी जानकारी ली है
- AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने सोशल मीडिया पर लिखा कि यह घटना बेहद दर्दनाक है और दोषियों को सख्त सजा मिलनी चाहिए।

दिल्ली में आखिरी बार कब हुआ था धमाका?
दिल्ली में आखिरी बड़ा धमाका 2011 में हुआ था, जब दिल्ली हाई कोर्ट की पार्किंग में ब्लास्ट हुआ था। उस वक्त किसी की जान नहीं गई थी, लेकिन सुरक्षा एजेंसियों को चौकन्ना कर गया था।
लाल किला पहले भी रहा है निशाने पर
यह पहली बार नहीं है जब लाल किला धमाके की चपेट में आया हो।
- 30 नवंबर 1997 को लाल किले के पास दो धमाके हुए थे, जिनमें 3 लोगों की मौत और 70 से ज्यादा लोग घायल हुए थे।
- इसके बाद 18 जून 2000 को फिर से लाल किला हादसे से दहल गया था। उस वक्त 8 साल की बच्ची समेत 2 लोगों की मौत हुई थी और 12 लोग घायल हुए थे।
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