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‘वीर सावरकर पुरस्कार’ विवाद में नया मोड़! थरुर ने सोशल मीडिया पर दी सफाई! जानिए, क्यों हुई उनके नाम की घोषणा !

वीर सावरकर पुरस्कार

आयोजकों का दावा पहले से दी थी जानकारी राजनीतिक दबाव में पीछे हटे थरूर, कांग्रेस ने भी सावरकर पर कड़ा रुख दोहराया

शशि थरूर ने वीर सावरकर पुरस्कार ठुकराया, कहा—मेरी सहमति के बिना नाम घोषित करना गलत

वीर सावरकर पुरस्कार को लेकर शुरू हुआ विवाद अब और बढ़ता रहा है। यह मामला तब सुर्खियों में आ गया जब कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने साफ-साफ कह दिया कि वे यह पुरस्कार नहीं लेंगे और न ही इससे जुड़े किसी कार्यक्रम में शामिल होंगे। उन्होंने इस बात पर नाराजगी भी जताई कि उनकी सहमति के बिना उनका नाम घोषित कर दिया गया, जो उनके हिसाब से एक गैरजिम्मेदाराना कदम था। दिल्ली में पत्रकारों से बातचीत के दौरान शशि थरूर ने बताया कि उन्हें इस पुरस्कार के बारे में सिर्फ एक दिन पहले ही पता चला। थरूर ने कहा कि जब उन्होंने मीडिया के ज़रिये सुना कि उन्हें वीर सावरकर पुरस्कार के लिए चुना गया है, तब वे खुद हैरान रह गए। उनका कहना था कि उन्हें किसी तरह की आधिकारिक सूचना नहीं मिली थी और न ही उनसे कोई सहमति ली गई थी। थरूर के अनुसार, बिना पूछे ऐसे किसी पुरस्कार के लिए नाम जोड़ देना बिल्कुल गलत है।

उन्होंने सीधे-सीधे कहा कि वे सावरकर के नाम पर दिया जाने वाला कोई भी पुरस्कार स्वीकार नहीं करेंगे। न वे मंच पर जाएंगे और न ही आयोजन में बैठेंगे। कांग्रेस सांसद ने कहा कि वे राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर हमेशा काम करते रहे हैं, लेकिन सहमति के बिना उनका नाम जोड़ना स्वीकार नहीं किया जा सकता। उनके अनुसार, किसी भी सम्मान का पहला नियम यह है कि संबंधित व्यक्ति की अनुमति ली जाए, और इस मामले में ऐसा नहीं किया गया।

 

HRDS इंडिया का दावा अलग

उधर, पुरस्कार देने वाली संस्था हाई रेंज रूरल डेवलपमेंट सोसाइटी यानी HRDS इंडिया ने थरूर के बयान पर बड़ा दावा किया है। संस्था के सचिव अजी कृष्णन के मुताबिक, कांग्रेस सांसद को इस पुरस्कार के बारे में पहले ही जानकारी दे दी गई थी। उन्होंने यह भी कहा कि संस्था के प्रतिनिधि और पुरस्कार चयन समिति के अध्यक्ष खुद थरूर के आवास पर उनसे मिलने गए थे। उस मुलाकात के दौरान थरूर ने पुरस्कार पाने वालों की पूरी सूची मांगी थी, जो बाद में उन्हें दे भी दी गई थी।

अजी कृष्णन ने कहा कि यह कहना गलत है कि थरूर को कोई जानकारी नहीं थी। उनके मुताबिक, थरूर को पहले से पता था लेकिन शायद राजनीतिक दबाव के चलते वे अब पीछे हट रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि अभी तक थरूर ने संस्था को आधिकारिक रूप से यह सूचित भी नहीं किया कि वे कार्यक्रम में नहीं आएंगे। संस्था का कहना है कि विवाद बढ़ने के बाद कांग्रेस पार्टी इसे मुद्दा बना रही है, और इसी वजह से थरूर अपना कदम पीछे ले रहे हैं।

थरूर ने सोशल मीडिया पर बताई वजहें

इस बीच, शशि थरूर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट साझा किया, जिसमें उन्होंने अपनी स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने लिखा कि पुरस्कार की प्रकृति, इसे देने वाले संगठन और बाकी विवरणों के बारे में स्पष्ट जानकारी न होने के कारण वे न तो समारोह में शामिल होंगे और न ही पुरस्कार स्वीकार करेंगे। उन्हें यह भी बताया गया कि नामांकन की सूचना उन्हें उस समय मिली जब वे केरल में स्थानीय निकाय चुनावों में वोट डालने गए थे। थरूर ने कहा कि मीडिया रिपोर्टों से उन्हें पता चला कि उनका नाम घोषित हो चुका है, जबकि उनकी सहमति ली ही नहीं गई थी।

 

कांग्रेस ने जताई नाराजगी

इस मामले में कांग्रेस के ही नेता के. मुरलीधरन ने भी बयान दिया और कहा कि किसी भी कांग्रेस सदस्य को, चाहे वह शशि थरूर जैसे वरिष्ठ नेता ही क्यों न हों, वीर सावरकर के नाम पर कोई पुरस्कार नहीं लेना चाहिए। मुरलीधरन ने यह भी कहा कि सावरकर ने अपने जीवन में कई बार ब्रिटिश सरकार के सामने झुकाव दिखाया था, और ऐसे में सावरकर के नाम पर पुरस्कार लेना कांग्रेस पार्टी के सिद्धांतों के खिलाफ होगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि थरूर इस पुरस्कार को स्वीकार नहीं करेंगे, क्योंकि ऐसा करना पार्टी के लिए शर्मिंदगी पैदा कर सकता है।

सोशल मीडिया पर भी यह पूरा मामला तेजी से चर्चा का केंद्र बना हुआ है। कुछ लोग इसे राजनीतिक मतभेदों से जुड़ा मुद्दा कह रहे हैं, जबकि कई लोगों का मानना है कि किसी भी व्यक्ति का नाम उसकी मंजूरी के बिना किसी सम्मान के लिए घोषित नहीं किया जाना चाहिए। वहीं दूसरी तरफ, HRDS इंडिया लगातार यह दावा कर रही है कि उन्होंने थरूर की सहमति ली थी और उनसे विस्तृत चर्चा भी की गई थी।

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Anushka Pandey

Content Writer

Anushka Pandey as a Anchor and Content writer specializing in Entertainment, Histroical place, and Politics. They deliver clear, accurate, and engaging content through a blend of investigative and creative writing. Bagi brings complex subjects to life, making them accessible to a broad audience.

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