भारत ने सीजफायर का श्रेय ट्रंप को देने से किया इनकार, पाकिस्तान ने बढ़ाई अमेरिकी राष्ट्रपति की तारीफ यहीं से बिगड़े संबंध, बढ़ा टैरिफ
ट्रंप के 50% टैरिफ पर रघुराम राजन का बड़ा दावा मामला रूस के तेल का नहीं, भारत-पाक सीजफायर का था

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत पर लगाए गए 50% टैरिफ को लेकर देश के जाने-माने अर्थशास्त्री और आरबीआई के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने एक चौंकाने वाली व्याख्या दी है। अक्सर माना जाता रहा कि यह टैरिफ भारत द्वारा रूस से तेल खरीदने की वजह से लगाया गया था, लेकिन राजन ने कहा कि इसका असली कारण बिल्कुल अलग था। भारत-पाकिस्तान के बीच हुए सीजफायर को लेकर ट्रंप की बेइज्जती महसूस होना। रघुराम राजन स्विट्जरलैंड के ज्यूरिख शहर में UBS सेंटर फॉर इकॉनॉमिक डायलॉग के मंच पर बोल रहे थे। यहां उन्होंने अमेरिकी नीति, भारत-अमेरिका संबंध और दक्षिण एशिया में तनाव के ऊपर खुलकर बात की। उनका कहना था कि ट्रंप को यह अच्छा नहीं लगा कि भारत ने कई बार सीजफायर को लेकर उनके दावों को नकार दिया, जबकि पाकिस्तान ट्रंप की तरफदारी करता रहा और उनकी तारीफ करता रहा। इसी कूटनीतिक विवाद ने भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों को नुकसान पहुंचाया।
सीजफायर को लेकर ट्रंप का दावा और भारत की नाराज़गी
राजन का कहना था कि ट्रंप ने सार्वजनिक मंचों पर लगभग 60 बार दावा किया कि उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच चल रहे तनाव को कम करवाया और दोनों देशों को युद्ध विराम के लिए राजी किया। लेकिन भारत की ओर से स्पष्ट रूप से कहा गया कि यह सीजफायर ट्रंप की मेहनत का नतीजा नहीं था।
भारत के मुताबिक, यह बातचीत सीधे सैन्य अधिकारियों के बीच हुई थी और पाकिस्तान के DGMO ने भारत के DGMO को फोन करके संघर्ष रोकने की अपील की थी। भारत को लगता था कि उसकी सैन्य सफलता और कूटनीतिक मजबूती को ट्रंप अपने नाम कर रहे थे। इस बीच पाकिस्तान ने मौका भांपकर खुद को ट्रंप के “करीबी” की तरह पेश किया। पाकिस्तानी नेताओं ने ट्रंप की जमकर प्रशंसा की और यहां तक कि उन्हें नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामित किया था । यह रवैया ट्रंप को बेहद पसंद आया। राजन के शब्दों में, “पाकिस्तान ने कार्ड सही खेला। उन्होंने ट्रंप की खुशी की दिशा में कदम बढ़ाए, जबकि भारत ने स्पष्ट कहा कि सीजफायर ट्रंप की वजह से नहीं हुआ।”
ऑपरेशन सिंदूर के बाद हालात कैसे बिगड़े?
राजन के मुताबिक, तनाव का असली कारण उसी समय पैदा हुआ जब जम्मू-कश्मीर के पहलगाम इलाके में आतंकी हमले में 26 नागरिक मारे गए। इसके बाद भारत ने पाकिस्तान और पीओके में बैठे आतंकियों के ठिकानों पर सटीक सैन्य कार्रवाई की।
इसके जवाब में पाकिस्तानी सेना ने मिसाइलों और ड्रोन के जरिए भारत के सैन्य ढांचे को निशाना बनाने की कोशिश की। दोनों देशों की सेनाओं के बीच लगातार कई दिनों तक झड़पें चलती रहीं। आखिरकार पाकिस्तान पीछे हट गया और उसके सैन्य अधिकारी ने भारत को फोन कर लड़ाई रोकने की गुहार लगाई। भारत ने अपनी कार्रवाई पूरी कर ली थी, इसलिए उसने संघर्षविराम को स्वीकार किया।
लेकिन पाकिस्तान ने इस पूरे मामले को अपनी तरह से पेश किया। उन्होंने कहा कि यह सीजफायर ट्रंप की वजह से हुआ। यहां भारत और ट्रंप के बीच विवाद बढ़ गया।
ट्रंप की नाराज़गी और टैरिफ का संबंध
UBS फोरम में जब रघुराम राजन से पूछा गया कि क्या रूस से कम तेल खरीदना अमेरिका को खुश करने का तरीका हो सकता है, तो उन्होंने साफ कहा कि इसका रूस से कोई लेना-देना नहीं है।
राजन ने कहा कि “हंगरी के प्रधानमंत्री ऑर्बान भी रूस से भारी मात्रा में तेल खरीदते रहे, लेकिन ट्रंप ने उनकी आलोचना नहीं की। इससे साफ है कि तेल असली मुद्दा नहीं था। राजन के अनुसार, “मामला पूरी तरह ट्रंप की पर्सनैलिटी और उनके ‘क्रेडिट लेने’ की आदत से जुड़ा था।” जब भारत ने उनके दावे को सार्वजनिक रूप से नकारा, तो ट्रंप को यह अपमान जैसा लगा। इसके बाद उनकी नज़र में भारत की छवि गिरी और इसी वजह से व्यापार वार्ताओं में भारत को नुकसान उठाना पड़ा। नतीजा यह हुआ कि अमेरिका ने भारत से आने वाले कुछ उत्पादों पर 50% तक का टैरिफ लगा दिया। इसके मुकाबले पाकिस्तान पर सिर्फ 19% टैरिफ लगाया गया। राजन के अनुसार, यह अंतर भी दर्शाता है कि अमेरिका उस अवधि में पाकिस्तान के प्रति “सॉफ्ट” रुख अपनाए हुए था।
पाकिस्तान की चालाकी और कूटनीतिक रणनीति
राजन ने कहा कि पाकिस्तान ने उस समय अंतरराष्ट्रीय माहौल को अपने पक्ष में मोड़ने की कोशिश की। जैसे ही सीजफायर हुआ, पाकिस्तानी नेताओं ने घोषणा कर दी कि यह ट्रंप की वजह से संभव हुआ। ट्रंप का नाम लेकर की गई यह तारीफ उनके लिए एक तरह की वैधता और कूटनीतिक सफलता जैसा थी। इसके उलट भारत ने साफ कहा कि संघर्षविराम का निर्णय दोनों देशों की सैन्य जरूरतों के कारण हुआ, न कि किसी तीसरे देश के दबाव से। राजन के मुताबिक, पाकिस्तान की यह रणनीति सफल रही क्योंकि इससे ट्रंप को लगा कि पाकिस्तान उनकी “लीडरशिप” को मानता है, जबकि भारत ऐसा नहीं करता।
क्या अब रिश्ते सुधर सकते हैं?
राजन ने अपनी बात का अंत इस बात पर किया कि भारत और अमेरिका दोनों ही मजबूत लोकतंत्र हैं और व्यापार-कूटनीति के मुद्दों पर गलतफहमी हमेशा स्थायी नहीं रहती। उन्होंने उम्मीद जताई कि आने वाले समय में दोनों देशों के संबंध सामान्य होंगे और समझदारी से आगे बढ़ेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि “भारत-अमेरिका संबंध आर्थिक और रणनीतिक रूप से इतने महत्वपूर्ण हैं कि किसी भी व्यक्तिगत टकराव से उन्हें लंबे समय तक नुकसान नहीं होगा।”
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