फ्रांस, लक्जमबर्ग,बेल्जियम, माल्टा, मोनाको भी शामिल है इन देशों ने फिलीस्तीन को स्वतंत्र देश के रूप में दर्जा देने की घोषणा की है । इससे पहले ब्रिटेन, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और पुर्तगाल ने फिलीस्तीन को मान्यता देने की घोषणा कर चुके है ।

फिलीस्तीन को मान्यता देने वाले देशों का सिलसिला बढ़ते जा रहा है अब इस लिस्ट में फ्रांस भी शामिल हो गया है। फ्रांस के साथ ही कुछ अन्य यूरोपीय देशों ने जिन में लक्जमबर्ग,बेल्जियम, माल्टा, मोनाको भी शामिल है इन देशों ने फिलीस्तीन को स्वतंत्र देश के रूप में दर्जा देने की घोषणा की है ।
मैक्रो ने कहा
फ्रांस के राष्ट्रपति इमानुएल मैक्रो कहा कि फ्रांस आज फिलीस्तीन को मान्यता दे रहा है हमें शांति की राह चुननी होगी और उन्हें उन्होंने साथ ही इसे हमास की हार बताया है। इससे पहले संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटरेस ने भी फिलिस्तीन की को देश का दर्जा दिए जाने को लेकर महत्वपूर्ण बयान दिया कहा की फिलिस्तीनियों को देश का दर्जा मिलना उनका अधिकार है यह कोई इनाम नहीं है।
अब्बास ने क्या कहा
फिलीस्तीन को देश के रूप में दर्ज मिलने वाले देशों की संख्या बढ़ाने के बीच फिलिस्तीन के राष्ट्रपति मोहम्मद अब्बास ने हमास से कहा है कि वह हथियार छोड़े और ग़ज़ा में युद्ध खत्म होने के बाद चुनाव की बात भी कही। साथ ही अब्बास ने उन देशों का धन्यवाद भी किया है और बाकी देशों से अपील भी की है कि वे उस देश का दर्जा दे।
ब्रिटेन, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और पुर्तगाल ने फिलीस्तीन को दी मान्यता
स्थाई शांति बहाली की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए ब्रिटेन, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और पुर्तगाल ने फिलीस्तीन को मान्यता दी थी।
नेतन्याहू ने फैसले को “बेहूदा और आतंकवाद को इनाम” बताया था।
इस फैसले के अंतर्गत ब्रिटेन, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया के साथ पुर्तगाल ने भी फिलीस्तीन को मान्यता दे दी थी। इन देशों का मानना था कि स्थाई शांति के समाधान के लिए दो-राष्ट्र सिद्धांत को मान्यता देना जरूरी है।
भड़के नेतन्याहू
इसराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा था कि उनका देश फिलीस्तीन को देश का दर्जा मिलने की घटना का स्वागत कर आत्महत्या नहीं करेगा। उन्होंने आरोप लगाया था कि यह सब यूरोपीय राजनीतिक जरूरत के चलते हुआ है। इजराइल के प्रवक्ता ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था कि यह फैसला “आतंकवाद को एक किस्म का इनाम” था।
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने कहा था
फिलीस्तीन को मान्यता देना एक ऐतिहासिक निर्णय था और ब्रिटेन फिलिस्तीन के लोगों के साथ खड़ा था। साथ ही ब्रिटेन की ओर से यह स्पष्ट किया गया था कि इसका मतलब यह नहीं है कि कोई नया देश बन जाएगा। यह कदम शांति प्रक्रिया का हिस्सा बताया गया था।
घटिया और बेहूदा फैसला
नेतन्याहू ने इसे “घटिया और बेहूदा फैसला” बताते हुए कहा था कि ऐसे देश उनके उन सैनिकों का अपमान कर रहे हैं जिन्होंने युद्ध में अपनी जान गंवाई थी। इजराइल ने ब्रिटेन और अन्य यूरोपीय देशों के निर्णय का कड़ा विरोध किया था। नेतन्याहू अगले हफ्ते संयुक्त राष्ट्र महासभा के लिए न्यूयॉर्क जाने वाले थे।
ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री ऑफिस की ओर से कहा गया था कि ऑस्ट्रेलिया एक स्वतंत्र और संप्रभु फिलीस्तीन को मान्यता देता है और फिलीस्तीनी लोगों की आज़ादी की इच्छा का सम्मान करता है। वहीं, कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क टार्नी ने कहा था कि 1947 से ही कनाडा दो-राष्ट्र समाधान का समर्थन करता आया है। हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा था कि मान्यता देने का मतलब हमास के कदमों को स्वीकार करना नहीं है।
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