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इंडिगो से लेकर स्पाइसजेट तक ! कौन है इन कंपनियों के मालिक जो करते है भारत के आसमान को कंट्रोल

भारत के आसमान पर ‘राज’ करने वाले वो 3 चेहरे: क्या आप जानते हैं कौन हैं ये अरबपति

 

बीते हफ्ते भर से लगातार इंडिगो की हजारों फ्लाइटें कैंसिल हुई हैं। इस दौरान एयरपोर्ट पर अफरा-तफरी का माहौल देखने को मिला है।  इंडिगो प्रबंधन ने कहा है कि 15 दिसंबर तक स्थिति में सुधार हो सकेगा। मामला हाथ से निकलता देख सिविल एविएशन मंत्रालय और गृह मंत्रालय ने भी अब कमान संभाल ली है। एक इंटरनल कमेटी का गठन किया गया है, जो मामले की जांच करेगी। किराए आसमान छूने लगे हैं। सरकार ने कंपनी को रिफंड और लगेज लौटाने के लिए भी कहा है। इसके बाद कंपनी की ओर से बताया गया कि अब तक 610 करोड़ रुपए का रिफंड किया जा चुका है। वहीं सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने कहा कि हम एयरलाइन नहीं चला सकते ।  इसकी मुख्य वजह एविएशन सेक्टर में इंडिगो की मोनोपॉली है। इंडिगो भारत के 65 फीसदी एविएशन सेक्टर पर एकाधिकार रखता है।

 

तीसरा सबसे बड़ा घरेलू विमान बाजार है भारत

भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा घरेलू विमान बाजार है। अभी भारत में 160 से अधिक हवाई अड्डे संचालित हो रहे हैं, जिनकी संख्या 2047 तक बढ़कर 350 से अधिक होने का अनुमान है। वहीं 2047 तक भारत में लगभग ढाई करोड़ लोगों को एविएशन सेक्टर में नौकरी मिलने का अनुमान है। भारत का एविएशन सेक्टर प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से 77 लाख से अधिक लोगों को रोजगार देता है, जिसमें प्रत्यक्ष रोजगार लगभग 3 लाख 70 हजार है। पिछले एक दशक में भारत में घरेलू हवाई यात्री यातायात में 10 से 12% की वार्षिक वृद्धि हुई है। 2040 तक यह 6 गुना बढ़कर 1.1 बिलियन होने की संभावना है।

ये है भारत की टॉप एयरलाइन कंपनियां


इंडिगो

इंडिगो भारत की शीर्ष एयरलाइन कंपनी है। इस कंपनी ने अपना बिजनेस 2006 में शुरू किया था। राहुल भाटिया इंडिगो की पैरेंट कंपनी इंटरग्लोब एंटरप्राइजेज के मैनेजिंग डायरेक्टर हैं। इंडिगो की पैरेंट कंपनी की ट्रैवल, हॉस्पिटैलिटी, लॉजिस्टिक्स और टेक्नोलॉजी में भी मौजूदगी है। राहुल भाटिया ने कनाडा से पढ़ाई करने के बाद आईबीएम में 2 साल काम किया। 1989 में उन्होंने इंटरग्लोब एंटरप्राइजेज बनाई। इसके बाद 2006 में उन्होंने राकेश गंगवाल के साथ मिलकर इंडिगो की शुरुआत की। शुरुआत में इंडिगो एक लो-कॉस्ट एयरलाइन थी, जिसका किराया कम था और पंक्चुअलिटी बाकी एयरलाइंस की तुलना में बेहतर थी। 2019 में राहुल भाटिया और राकेश गंगवाल के बीच कंपनी को लेकर विवाद हो गया, जिसके बाद गंगवाल ने बोर्ड मेंबर का पद छोड़ दिया।

 

एयर इंडिया

भारत में इंडिगो के बाद एयर इंडिया का एविएशन सेक्टर में सबसे बड़ा मार्केट शेयर है। लगभग 25% हिस्सेदारी के साथ एयर इंडिया देश की दूसरी सबसे बड़ी एयरलाइन है।

एयर इंडिया की स्थापना 1932 में हुई थी। 1953 में इसका राष्ट्रीयकरण कर दिया गया, जिसके बाद 2022 तक यह भारत सरकार के स्वामित्व में संचालित होती रही। इसे बेचने की कोशिश कई सालों से चल रही थी, और आखिरकार टाटा समूह ने इसे वापस हासिल कर लिया।

टाटा समूह के पास विस्तारा भी है। इसकी शुरुआत 2015 में हुई थी, जब टाटा ग्रुप और सिंगापुर एयरलाइंस ने मिलकर भारत में एक नई एयरलाइन लॉन्च की। इसकी शुरुआत काफी अच्छी रही थी और एक समय इसे किंगफिशर से तुलना की जाती थी, क्योंकि यात्रा के दौरान इसमें काफी सुविधाएँ दी जाती थीं। लेकिन कुछ समय बाद इसकी सफलता कम हो गई और अंततः इसे एयर इंडिया में ही शामिल कर दिया गया।

 

स्पाइसजेट

2005 में स्पाइसजेट का नामकरण हुआ। इससे पहले यह अलग-अलग कंपनियों के नाम से जानी जाती थी। 2004 में स्पाइसजेट को अजय सिंह ने खरीद लिया। जून 2010 में स्पाइसजेट की 37% हिस्सेदारी सन ग्रुप के मालिक कलानिधि मारन को बेची गई। 2010 के बाद खराब कनेक्टिविटी और बिगड़ती टाइमिंग के कारण स्पाइसजेट की साख गिरती गई और 2014 तक कंपनी दिवालिया होने की कगार पर पहुंच गई।  बाद में कंपनी को री-स्ट्रक्चर किया गया और टाइम मैनेजमेंट से लेकर एयरपोर्ट सुविधाओं को सुधारने का प्रयास किया गया। साल 2020 में कंपनी का रेवेन्यू 12,000 करोड़ से अधिक रहा, लेकिन कोविड के बाद कंपनी को फिर नुकसान हुआ। अभी कंपनी भारत के एविएशन सेक्टर में 5 से 7% हिस्सेदारी रखती है। इंडिगो के संकट के बाद स्पाइसजेट के शेयरों में उछाल आना शुरू हो गया है और यह लगभग 15% तक बढ़ चुका है।

 

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