“बस साइन करो सरकारी फॉर्म है”— और एक हस्ताक्षर में बहन की पूरी संपत्ति गायब।
रिश्तों पर लगा दाग — अनपढ़ बहन की संपत्ति वोटिंग फॉर्म के नाम पर ठग ले गया भाई

उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद ज़िले में एक ऐसा मामला सामने आया है। जिसने रिश्तों पर भरोसे को सवालों के कटघरे में खड़ा कर दिया है। यहां एक महिला की मेहनत की कमाई से खरीदे गए मकान और दुकान पर उसके अपने सगे भाई ने कब्जा कर लिया, और वो भी एक बेहद चौंकाने वाले तरीके से मतदाता सूची पुनरीक्षण यानी SIR फॉर्म भरने का बहाना बनाकर। इस घटना की शिकार बनी सरताज खानम, कुछ समय से गुरुग्राम में रहकर सिलाई-कढ़ाई का काम कर अपनी रोज़ी-रोटी चलाती हैं। उन्हें कभी अंदाज़ा नहीं था कि जिस भाई पर वह सबसे ज्यादा भरोसा करती थीं, वही उनके भविष्य की नींव को ढहा देगा।
कैसे हुआ सरताज के साथ धोखा?
सरताज के मुताबिक, कुछ हफ्ते पहले अचानक उनके भाई आजाद का फोन आया। उसने बड़ी गंभीर आवाज़ में कहा कि सरकार मतदाता सूची की बड़े पैमाने पर जांच कर रही है और अगर SIR फॉर्म नहीं भरा तो उनकी संपत्ति रद्द हो सकती है और नागरिकता भी सवालों में पड़ सकती है। सरताज पढ़ी – लिखी नहीं थीं, इसलिए वह घबरा गईं। उन्हें लगा कि शायद सरकार की कोई नई प्रक्रिया होगी। भाई होने के कारण उन्होंने बिना शक किए आजाद की बातें सच मान लीं और उसी के कहने पर गुरुग्राम से फिरोजाबाद पहुंच गईं।
तहसील कार्यालय में साज़िश का पूरा खेल
फिरोजाबाद पहुंचने के बाद आजाद उन्हें सीधे तहसील ले गया। सरताज को लगा था कि वह किसी सरकारी फॉर्म पर हस्ताक्षर कर रही हैं, लेकिन कहानी इसके ठीक उलट थी। कई दस्तावेज उनके सामने रखे गए और वे साइन करती चली गईं। उन्हें बताया गया कि यह सिर्फ चुनावी सूची अपडेट करने से जुड़ा कागज़ी काम है। लेकिन असल में ये दस्तावेज़ SIR का फार्म नहीं, बल्कि उनकी पूरी संपत्ति की रजिस्ट्री थी, जो अब आजाद के नाम चढ़ चुकी थी। तहसील के एक कर्मचारी ने उनसे पूछा कि क्या वह यह संपत्ति के ‘ तोहफे ‘ के तौर पर दे रही हैं, लेकिन वह ‘ गिफ्ट’ शब्द का मतलब तक नहीं समझ पाईं। उन्होंने सोचा कि यह भी शायद चुनाव या पहचान संबंधी फॉर्म का हिस्सा होगा। और बस एक साइन ने उनकी लाखों की संपत्ति उनसे छीन ली।
जब सच सामने आया तो पैरों तले ज़मीन खिसक गई
कुछ दिनों बाद जब उन्हें असली दस्तावेज मिले तो उन्हें पता चला कि उनके नाम वाली संपत्ति अब उनकी नहीं रह गई, बल्कि उनके भाई आजाद की हो चुकी है। ये झटका उनके लिए बहुत भारी था। उन्होंने तुरंत भाई से बात करने की कोशिश की, लेकिन आजाद ने उल्टा उन्हें चुप रहने की धमकी दे डाली। पीड़िता ने बताया, “जब मैंने विरोध किया तो उसने कहा कि “अगर ज्यादा बोला तो जान ले लेगा। उसी पल समझ आ गया कि ये सब पहले से सोची हुई चाल थी।” सरताज जब अपनी कहानी सुनाती हैं तो उनकी आवाज़ में टूटन साफ महसूस होती है। वह कहती हैं, “मैंने सालों तक सिलाई कर करके पैसा जोड़ा था। बड़ी मुश्किल से घर और दुकान खरीदी थी, ताकि बुढ़ापे के वक्त पर सहारा रहे। लेकिन मेरे अपने भाई ने ही सब ले लिया।” उन्होंने अदालत से गुहार लगाई है कि उनकी रजिस्ट्री को अमान्य घोषित किया जाए और उनके साथ धोखा करने वालों पर कठोर कार्रवाई हो।
एसएसपी को शिकायती पत्र, कोर्ट का सहारा
धोखाधड़ी का पता लगने के बाद सरताज ने हिम्मत जुटाई और सीधे एसएसपी कार्यालय में लिखित शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने प्रशासन से कठोर कार्रवाई और न्याय की मांग की है। इसके अलावा, उन्होंने विवादित रजिस्ट्री को रद्द कराने के लिए अदालत में मामला भी दायर कर दिया है। उनका कहना है कि यह धोखाधड़ी सिर्फ कानूनी अपराध ही नहीं, बल्कि एक ऐसे भरोसे का टूटना है, जिसे वापस पाना लगभग असंभव है।
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