भोपाल में गैस त्रासदी की रैली के दौरान विवाद बढ़ा, RSS जैसे पुतले को लेकर बवाल
बीजेपी नेताओं के विरोध के बाद पुलिस ने पुतला जब्त किया, एक्टिविस्ट बोलीं ये डाउ केमिकल्स का साथ देने वालों का प्रतीक था।

मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में गैस त्रासदी की 41वीं बरसी पर श्रद्धांजलि रैली निकाली गई। हर साल की तरह इस साल भी गैस पीड़ित संगठन सड़कों पर उतरे थे, लेकिन इस बार रैली उस वक्त विवादों में घिर गई जब जुलूस में RSS जैसी वर्दी पहने हुए एक पुतला भी शामिल किया गया। इस पुतले के सामने आते ही भाजपा नेता और कार्यकर्ता भड़क गए और फिर रैली में हंगामा शुरू हो गया। विवाद इतना बढ़ गया कि पुलिस को बीच में आकर पुतला जब्त करना पड़ा और रैली को रोक दिया गया।
पुतले को लेकर BJP नेताओं का विरोध
रैली की शुरुआत भारत टॉकीज से हुई थी और इसे जेपी नगर स्थित गैस त्रासदी स्मारक तक जाना था। शुरुआत में सब सामान्य था, लेकिन जैसे ही लोगों ने उस पुतले को देखा जो RSS की तरह दिखने वाली वर्दी पहने हुए था, स्थिति बदल गई। जैसे ही यह खबर फैली, भाजपा मंडल अध्यक्ष आशीष सिंह कार्यकर्ताओं के साथ मौके पर पहुंचे। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा, “आरएसएस का पुतला जलाने की हिम्मत कैसे हुई?” इसके बाद गैस पीड़ितों के संगठन और भाजपा नेताओं के बीच जोरदार बहस शुरू हो गई। माहौल तनावपूर्ण होने लगा, तो पुलिस ने तुरंत पुतला हटाया और रैली को वहीं रोक दिया।

गैस पीड़ित संगठन की सफाई
एक्टिविस्ट रचना ढींगरा ने कहा कि “इस विवाद को गलत तरीके से फैलाया गया है। उनका कहना है कि पुतला किसी संगठन को निशाना बनाकर नहीं रखा गया था, बल्कि इसका मतलब यह दिखाना था कि डाउ केमिकल और यूनियन कार्बाइड के पीछे ऐसे लोग भी हैं, जिन्होंने कंपनी का साथ दिया। रचना ढींगरा ने कहा, “दूसरा पुतला उन लोगों का प्रतीक था जो पिछले 11 साल से डाउ का व्यवसाय बढ़ाने में मदद कर रहे हैं। सवाल यह है कि आखिर यह सहयोगी कौन हैं?” पुलिस अधिकारी एसीपी राकेश सिंह बघेल ने बताया कि जब दोनों पक्षों के बीच तनाव बढ़ने लगा। तो पुतला बरामद कर रैली को रोक दिया गया। उनका कहना है कि “पुलिस दोनों संगठनों की बात सुनेगी और अगर किसी की धार्मिक या राजनीतिक भावनाओं को ठेस पहुंची है, तो आगे की कार्रवाई की जाएगी।”
रैली रुकने के बाद दोनों पक्षों का बयान
रैली रोकने के बाद माहौल शांत तो हो गया, लेकिन बयानबाज़ी जारी रही। गैस पीड़ित संगठन का कहना है, “हमें अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता है। अगर डाउ कंपनी जिम्मेदार है, तो उसके सहयोगियों पर सवाल उठाना गलत कैसे हो गया?” वहीं भाजपा नेताओं का कहना है कि “रैली में ऐसा पुतला रखना जानबूझकर आरएसएस की छवि खराब करने की कोशिश थी, जो बर्दाश्त नहीं की जा सकती।”
भोपाल गैस त्रासदी – क्या हुआ था उस दिन
भोपाल गैस कांड दुनिया की सबसे बड़ी दुर्घटनाओं में से एक है। 2-3 दिसंबर 1984 की रात यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री से जहरीली गैस लीक हुई थी। जिसमें हजारों लोगों की मौत हो गई थी और लाखों लोग आज भी बीमारियों से जूझ रहे हैं। हर साल इस घटना को याद करके श्रद्धांजलि दी जाती है।
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