रैली में मंच पर जाने और भाषण देने का दावा; सोशल मीडिया पर जारी ऑडियो से बढ़ी राजनीतिक गर्मी, भाजपा संग समझौते और विपक्ष को निशाना बनाने के आरोपों ने माहौल और गरमाया

भीम आर्मी के चीफ और नगीना से सांसद चंद्रशेखर आज़ाद की 26 नवंबर को मुजफ्फरनगर में होने वाली संविधान रैली से पहले माहौल अचानक गरमा गया है। वजह है, इंदौर की रहने वाली डॉ. रोहिणी घावरी, जिन्होंने फिर सोशल मीडिया पर चंद्रशेखर को खुलकर चुनौती दी है। वह रैली में जाकर उनके मंच पर चढ़ेगी और सभी के सामने भाषण भी देंगी। उनकी इस घोषणा ने न सिर्फ समर्थकों को चौंका दिया है बल्कि पुलिस और प्रशासन भी सतर्क हो गया है, क्योंकि उनके पोस्ट लगातार वायरल हो रहे हैं और मामला अब व्यक्तिगत आरोपों से राजनीतिक टकराव में बदलता दिख रहा है।
रोहिणी ने अपने सोशल मीडिया पेज पर कई पोस्ट करते हुए चंद्रशेखर को सीधे-सीधे निशाने पर लिया। उन्होंने कहा, कि “वह 26 नवंबर की रैली में जाएंगी, और पुलिस उन्हें रोकेगी नहीं बल्कि सुरक्षा देगी।” उनका कहना है कि मंच भले चंद्रशेखर का हो, लोग चाहे उनके हों, लेकिन इस बार शपथ वह लेंगी और भाषण भी वही देंगी। रोहिणी ने यह दावा करते हुए चंद्रशेखर पर तंज कसा कि कभी वह खुद सपना देखते थे कि वह स्टेज पर आकर उनके साथ मौजूद हों, लेकिन अब हालात ऐसे हैं कि वही उनके मंच पर खड़ी होकर सच्चाई बताएँगी।
चंद्रशेखर पर लगाया भ्रमित करने का आरोप
सोशल मीडिया पर उनके तेवर इतने तीखे रहे कि कई लोग सोच में पड़ गए कि आखिर ये विवाद अचानक इतना बड़ा कैसे हो गया। उनकी पोस्ट में यह भी कहा गया कि “अगर रैली में मौजूद किसी भी व्यक्ति ने उन्हें छूने की कोशिश की, तो पूरा देश देखेगा कि महिलाओं के सम्मान के बारे में चंद्रशेखर कितना सच बोलते हैं। उन्होंने यह आरोप भी लगाया कि चंद्रशेखर समाज को गलत दिशा में ले जा रहे हैं और खुद को बड़ा नेता दिखाने के लिए लोगों को भ्रमित कर रहे हैं। रोहिणी का कहना है कि “उन्होंने चंद्रशेखर के कई समर्थकों को उनकी असलियत बता दी है, और अब हालात बदल चुके हैं।”
रोहिणी ने यह भी कहा है कि चंद्रशेखर के माता-पिता का किसी तरह से अपमान नहीं होना चाहिए। उनका कहना है कि अगर चंद्रशेखर ने उनके परिवार को बीच में खींचा, तो वह भारत आकर ऐसा जवाब देंगी कि चंद्रशेखर और उनके समर्थक भी समझ नहीं पाएँगे कि क्या हुआ। उन्होंने कहा कि “अगर लड़ना है, तो वह सीधे चंद्रशेखर से लड़ेंगी, किसी और को बीच में लाने की जरूरत नहीं।”
कौन हैं, रोहिणी घावरी
रोहिणी इंदौर से हैं, उनके पिता नगर निगम में सफाई का काम करते हैं। वह साल 2019 में पढ़ाई के लिए स्विट्जरलैंड गई थीं। वहीं उनकी मुलाकात चंद्रशेखर से हुई और दोनों करीब तीन साल तक साथ रहे। बाद में उनका रिश्ता टूट गया और रोहिणी ने चंद्रशेखर पर गंभीर आरोप लगाए है । फिलहाल वह स्विट्जरलैंड में एक नौकरी कर रही हैं और अपने एनजीओ के जरिए सामाजिक काम भी करती हैं। अब इस रैली ने एक बार फिर उनके और चंद्रशेखर के बीच की पुरानी बातों को सुर्खियों में ला दिया है। रोहिणी ने एक और कदम बढ़ाते हुए सोशल मीडिया पर एक ऑडियो भी शेयर कर दिया। उनका दावा है कि इस ऑडियो में चंद्रशेखर खुद यह कह रहे हैं कि वह आने वाले यूपी विधानसभा चुनाव में भाजपा की मदद करेंगे और सपा तथा कांग्रेस को नुकसान पहुँचाएँगे।
रोहिणी ने दावा किया
सपा या कांग्रेस में से जो भी उनके सामने आएगा, वह उसकी हालत खराब कर देंगे, चाहे इसके लिए भाजपा का साथ ही क्यों न देना पड़े। रोहिणी ने इस ऑडियो को जारी करते हुए कहा कि “अगर कोई नेता यह कहे कि उसे भाजपा ने सांसद बनवाया है और अब वह दलित वोटों को अलग करने के लिए भाजपा के साथ मंच साझा करेगा, तो फिर वह समाज का प्रतिनिधि कैसे हुआ?”
रोहिणी ने यह भी कहा कि ” 26 नवंबर को जो रैली हो रही है, वह भाजपा की ही रणनीति का हिस्सा है। उनका आरोप है कि इस तरह की सैकड़ों रैलियों का उद्देश्य सिर्फ दलित वोटों को बांटना है ताकि भाजपा को फायदा मिले और विपक्ष कमजोर पड़े।
तो वहीं, रोहिणी ने एक तरफ़ ये भी सवाल उठाया कि “जो इंसान अपने आंदोलन और अपने नेताओं की विरासत को राजनीतिक फायदे के लिए बेच दे, वह समाज की भलाई कैसे कर सकता है? उन्होंने चंद्रशेखर के भाषणों और बयानबाज़ी पर भी टिप्पणी की और कहा कि वह बड़े-बड़े वादे करते हैं, लेकिन असलियत कुछ और ही है।”