Fact Check
Search

दिल्ली में सबसे बड़े ड्रग्स कार्टेल का भंडाफोड़, 328 किलो ड्रग्स पकड़ी! क्या है ऑपरेशन क्रिस्टल फोर्ट्रेस ?

ड्रग्स कार्टेल

दिल्ली में ऑपरेशन क्रिस्टल फोर्ट्रेस में 328 किलो ड्रग्स पकड़ी गई, सरकार ने की सराहना

दिल्ली में 328 किलो मेथामफेटामाइन बरामद, अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाइयों में से एक

दिल्ली में एक बड़े ड्रग्स कार्टेल का भंडाफोड़ हुआ है। सुरक्षा एजेंसियों की इस कार्रवाई ने पूरे देश को चौंका दिया है । दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल और नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) ने मिलकर छतरपुर के एक फ्लैट पर छापा मारा और वहां से 328.54 किलो मेथामफेटामाइन बरामद की। इसकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत करीब 262 करोड़ रुपये बताई गई है। यह दिल्ली में अब तक की सबसे बड़ी सिंथेटिक ड्रग्स बरामदगी में गिनी जा रही है। इस पूरे ऑपरेशन को “ऑपरेशन क्रिस्टल फोर्ट्रेस” नाम दिया गया था। सरकार की ओर से भी इस कार्रवाई की सराहना हुई है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इसे प्रधानमंत्री मोदी के ड्रग्स-फ्री इंडिया के विज़न की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि बताया।

कैसे पकड़ा गया यह इंटरनेशनल ड्रग कार्टेल?

इस पूरे ड्रग नेटवर्क का खुलासा तब हुआ। जब एजेंसियों ने दो तस्करों को गिरफ्तार किया। शाने वारिस और एस्थर किनिमी। शाने वारिस मूल रूप से यूपी के अमरोहा से है और पिछले कुछ महीनों से नोएडा में किराए के मकान में रह रहा था। वह खुद को आसपास के लोगों को सेल्स मैनेजर बताता था, लेकिन अंदर ही अंदर करोड़ों की ड्रग्स तस्करी में शामिल था।

NCB के अधिकारियो के अनुसार शाने वारिस दुबई के एक बड़े ड्रग सरगना के संपर्क में था। वह व्हाट्सएप, जैंगी और फेक सिम कार्ड जैसे सुरक्षित माध्यमों से एन्क्रिप्टेड चैट के जरिए उससे बात करता था। दुबई से उसे लोकेशन, रूट और कंसाइनमेंट की जानकारी भेजी जाती थी, जिसे वह दिल्ली और नोएडा में मैनेज करता था। पूछताछ में वारिस ने एस्थर किनिमी का नाम बताया जो नगालैंड की रहने वाली है। एजेंसियों ने उसे भी गिरफ्तार कर लिया। जांच में सामने आया कि छतरपुर का फ्लैट उसने ही किराए पर लिया था और वही इसे स्टोरेज पॉइंट के रूप में इस्तेमाल कर रही थी।

छतरपुर के फ्लैट में क्या मिला?

जब NCB और पुलिस की टीम छतरपुर एन्क्लेव फेज-2 के जैन हाउस की चौथी मंजिल पर फ्लैट नंबर 402 में पहुंची, तो एक कमरे में ड्रग्स से भरे पैकेट मिले। कुल मिलाकर 328.54 किलो मेथामफेटामाइन बरामद हुई। इतनी बड़ी मात्रा देखकर टीम भी हैरान रह गई। यह फ्लैट सिर्फ स्टोरेज प्वाइंट ही नहीं बल्कि दिल्ली में फैले बड़े नेटवर्क का हिस्सा था। जांच में पता चला कि जामिया नगर, शाहीन बाग और ओखला जैसे इलाकों का इस्तेमाल कम्युनिकेशन और हैंडलिंग के लिए किया जाता था। इन इलाकों में फेक आईडी, अस्थायी किराये के कमरे और बिना ट्रेस किए जाने वाले पैकेज सिस्टम का खूब इस्तेमाल होता था।

डिलीवरी कैसे होती थी?

तस्कर ड्रग्स को आगे भेजने के लिए पोर्टर जैसे डिलीवरी ऐप्स का इस्तेमाल करते थे। एस्थर खुद कभी सामने नहीं आती थी। वह डिलीवरी बॉय को पैकेज पकड़ा देती और उसे पता भी नहीं होता कि वह क्या ले जा रहा है। हर डिलीवरी के बाद फोन बदल दिया जाता था। लोकेशन और स्टोरेज पॉइंट बार-बार बदलते रहते थे ताकि एजेंसियां उन्हें पकड़ न सकें। इसी वजह से यह सिंडिकेट काफी समय तक बचता रहा।

ड्रग नेटवर्क कितनी दूर तक फैला था?

सिर्फ दिल्ली ही नहीं, यह नेटवर्क मणिपुर, नागालैंड, असम और नेपाल बॉर्डर तक जुड़ा हुआ था। दुबई में बैठे सरगना की नजर हर मूवमेंट पर होती थी। वह कोड वर्ड में संदेश भेजता था और रूट तय करता था। शाने वारिस की चैट्स देखने पर NCB को नक्शे, कोडेड मैसेज और गुप्त रास्तों की जानकारी मिली है। ऐसा पहली बार नहीं है कि यह ड्रग सरगना चर्चा में आया हो। उससे पहले भी वह दिल्ली में 82.5 किलो कोकेन जब्त किए जाने जाने का मामला आया था।

इस कार्रवाई का महत्व क्यों बड़ा माना जा रहा है?

  1. ड्रग्स की इतनी भारी मात्रा एक ही जगह से मिलना दुर्लभ है।
  2. यह दिखाता है कि सिंथेटिक ड्रग्स का नेटवर्क कितना संगठित और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय है।
  3. यह पहली बार साफ तौर पर सामने आया कि दुबई से पूरी चेन को रिमोट कंट्रोल किया जा रहा था।
  4. दिल्ली और पूर्वोत्तर राज्यों के बीच ड्रग्स का एक मजबूत लिंक साबित हुआ।
  5. टेक्निकल सर्विलांस, क्रिप्टो पेमेंट और एन्क्रिप्टेड चैट के इस्तेमाल ने इसे हाई-टेक कार्टेल बना दिया था।

इस मामले से पुलिस और NCB को आगे की कई कड़ियां मिल गई हैं जिससे पूरी चेन तक पहुंचने में आसानी होगी।

गृह मंत्री ने कहा

अमित शाह ने इस छापे को बड़ी उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि “केंद्र सरकार टॉप-टू-बॉटम और बॉटम-टू-टॉप दोनों तरह से ड्रग नेटवर्क को खत्म करने पर जोर दे रही है। उनके मुताबिक यह पूरी कार्रवाई एजेंसियों के बेहतरीन तालमेल का उदाहरण है और इससे ड्रग्स-फ्री इंडिया के लक्ष्य को बढ़ावा मिला है।” एजेंसियां अब वित्तीय लेनदेन, क्रिप्टो ट्रांसफर, स्टोरेज नेटवर्क और डिलीवरी चेन की जांच कर रही हैं। एस्थर किनिमी और उसके नेटवर्क के लोगों की तलाश जारी है। इंटरनेशनल एजेंसियों के साथ मिलकर दुबई में बैठे सरगना को भी भारत लाने की कोशिश हो रही है।

कौन हैं विंग कमांडर नमांश स्याल ? तेजस क्रैश में शहीद होने वाले IAF के बहादुर पायलट

Anushka Pandey

Content Writer

Anushka Pandey as a Anchor and Content writer specializing in Entertainment, Histroical place, and Politics. They deliver clear, accurate, and engaging content through a blend of investigative and creative writing. Bagi brings complex subjects to life, making them accessible to a broad audience.

Leave a Comment

Your email address will not be published.