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क्या रोहिणी आचार्य संभालेंगी JJD की कमान? तेज प्रताप ने NDA को दिया ‘नैतिक समर्थन’!

क्या रोहिणी आचार्य संभालेंगी JJD की कमान? तेज प्रताप ने NDA को दिया ‘नैतिक समर्थन’!

बिहार की राजनीति में इस समय तेज प्रताप यादव का कदम सबसे ज्यादा चर्चा में है। लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे और जेजेडी (जनता जनता दल) के संस्थापक तेज प्रताप ने विधानसभा चुनाव में मिली करारी हार के बाद एक बड़ा राजनीतिक दांव खेलते हुए एनडीए सरकार को नैतिक समर्थन देने की घोषणा की है। इसे उनकी नई राजनीतिक पहचान को स्थापित करने की दिशा में बेहद अहम कदम माना जा रहा है।

Tej Pratap Yadav NDA support

आरजेडी को ‘फर्जी पार्टी’ कहा

जेजेडी के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रेम यादव ने बताया कि एनडीए को नैतिक समर्थन देने का फैसला लालू परिवार और आरजेडी से तेज प्रताप के वैचारिक मतभेद को स्पष्ट करता है। तेज प्रताप पहले ही आरजेडी को “फर्जी पार्टी” कह चुके हैं और अपनी जेजेडी को “असली लालू यादव पार्टी” बताते हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आरजेडी के कमजोर होने के बाद तेज प्रताप खुद को एक स्वतंत्र, प्रभावी और भविष्य के विकल्प के तौर पर स्थापित करना चाहते हैं—और यह कदम उसी रणनीति का हिस्सा है।

रोहिणी आचार्य को राष्ट्रीय संरक्षक बनाने का प्रस्ताव

लालू परिवार के भीतर तनाव लगातार बढ़ रहा है। इसी बीच तेज प्रताप ने अपनी बहन रोहिणी आचार्य को जेजेडी का राष्ट्रीय संरक्षक बनाने का प्रस्ताव रखा है।

सूत्रों के अनुसार तेज प्रताप जल्द ही रोहिणी आचार्य से मुलाकात करेंगे और उन्हें यह जिम्मेदारी स्वीकार करने का आग्रह करेंगे। रोहिणी हाल ही में सार्वजनिक रूप से कह चुकी हैं कि उन्हें परिवार, विशेषकर तेजस्वी के करीबी लोगों से अपमान का सामना करना पड़ा।

Rohini Acharya JJD Leadership

खुद चुनाव हार गए थे तेज प्रताप

2025 के विधानसभा चुनाव में तेज प्रताप ने अपनी नई पार्टी जेजेडी के 44 उम्मीदवार उतारे थे। महुआ सीट से स्वयं चुनाव लड़ते हुए वे तीसरे स्थान पर रहे।

यहाँ एलजेपी (राम विलास) के संजय कुमार सिंह ने जीत दर्ज की, जबकि आरजेडी उम्मीदवार मुकेश कुमार रोशन दूसरे स्थान पर रहे। पूरे राज्य में जेजेडी के किसी भी उम्मीदवार को जीत नहीं मिल पाई, जिससे पार्टी की क्षमता और भविष्य पर सवाल उठने लगे।

एनडीए को नैतिक समर्थन — रणनीति का हिस्सा?

चुनावी हार के बाद एनडीए को नैतिक समर्थन देने का फैसला कई राजनीतिक मायनों में महत्वपूर्ण है। इसे तेज प्रताप की उस कोशिश के रूप में देखा जा रहा है कि वे सत्ता की राजनीति में अपनी प्रासंगिकता बचाए रखना चाहते हैं।

भले ही यह कदम उन्हें तुरंत राजनीतिक लाभ न दे, लेकिन इससे यह संदेश देने में सफलता मिली है कि तेज प्रताप अभी भी बिहार की राजनीति में सक्रिय हैं और आने वाले समय में बड़ी भूमिका निभाने की तैयारी कर रहे हैं।

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Shashwat Srijan

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