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दिल्ली लाल किला ब्लास्ट का क्या है Telegram कनेक्शन ? Telegram पर कैसे हो रही है हथियारों की डील और भर्ती?

दिल्ली कार ब्लास्ट ने डिजिटल खतरे की असली तस्वीर दिखा दी! Telegram कैसे बन रहा आतंकियों का नया अड्डा?

दिल्ली कार ब्लास्ट
लाल किले के पास हुए ब्लास्ट में एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। पहले इस घटना को लेकर स्पष्ट लिंक नहीं मिल पा रहे थे — अब इससे जुड़ा डिजिटल कनेक्शन सामने आ रहा है। जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ी, सामने आया कि इस विस्फोट की जड़ें एक मैसेजिंग ऐप टेलीग्राम तक जाती हैं। रोजमर्रा की बातचीत, फिल्मों की प्लानिंग, ग्रुप स्टडी और शेयर बाजार की चर्चा के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला यह ऐप आतंकवादियों के लिए भी एक गुप्त हथियार बन चुका है।

Telegram का कनेक्शन

इस हमले में शक की सुई जिस व्यक्ति पर है, वह कोई पेशेवर आतंकी नहीं, बल्कि डॉक्टर उमर मोहम्मद था। पुलिस के मुताबिक उमर दिल्ली में सक्रिय उन कट्टरपंथी डॉक्टरों में से था जो Telegram पर एक गुप्त ग्रुप चलाते थे। यह ग्रुप पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद (JeM) की विचारधारा से प्रभावित था और उसी के निर्देशों पर काम करता था।

जांच में सामने आया कि उमर अपने साथियों के पकड़े जाने के बाद बुरी तरह डर गया था। उसे लगा कि अगला नंबर उसका है। इसी घबराहट में उसने कार में विस्फोट कर दिया, जिससे कई निर्दोष लोग मारे गए।

Telegram से आतंकियों का रिश्ता

Telegram को दुनिया भर में सुरक्षित चैटिंग के लिए जाना जाता है। सीक्रेट चैट्स, एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन और सेल्फ-डिस्ट्रक्ट मैसेज की वजह से लोग इसे भरोसेमंद मानते हैं। लेकिन सुरक्षा की यही ढाल अपराधियों के लिए एक सुविधा बन गई है।

  • Telegram पर बड़े चैनल्स में लाखों लोग जुड़े होते हैं।
  • कंटेंट को ट्रेस करना मुश्किल होता है।
  • फेक अकाउंट बनाना आसान है।
  • पहचान छुपाने के कई तरीके मौजूद हैं।
  • पब्लिक चैनल्स पर वीडियो और प्रचार तुरंत फैल जाता है।

यही कारण है कि ISIS, अल-कायदा, हमास और अन्य आतंकी समूह Telegram को अपने नेटवर्क का अहम हिस्सा बना चुके हैं।

Telegram और आतंकवाद

Telegram पहले भी हमलों में इस्तेमाल हुआ है

साल 2015 में जब पेरिस में आतंकी हमला हुआ था और 130 लोग मारे गए थे, उस केस की जांच में भी Telegram और व्हाट्सऐप का इस्तेमाल सामने आया था। इसके बाद Telegram ने कुछ ISIS चैनल हटाने का दावा किया, लेकिन विरोधी संगठनों और अन्वेषण रिपोर्ट्स ने दिखाया कि समय-समय पर इस ऐप पर कट्टरपंथी कंटेंट मौजूद रहता है।

Counter Extremism Project (CEP) जैसी संस्थाओं की रिपोर्ट कहती है कि 2024 में भी इस ऐप पर आतंकी और अन्य हानिकारक कंटेंट मौजूद थे। CEP की जांच के कुछ मुख्य बिंदु:

  • लगभग 1,500 चैनल्स व्हाइट सुप्रीमेसी विचारधारा फैलाते पाए गए।
  • 24 चैनल्स हथियारों की ऑनलाइन बिक्री कर रहे थे।
  • 22 चैनल्स ड्रग्स की डिलीवरी का बिज़नेस चला रहे थे।
  • कई चैनल्स आतंकवादी भर्ती और फंडिंग में सक्रिय थे।

ये आंकड़े साबित करते हैं कि Telegram की मॉडरेशन सिस्टम अपराधियों के मुकाबले काफी कमजोर है।

Telegram की प्राइवेसी पॉलिसी

Telegram के संस्थापक पावेल ड्यूरोव हमेशा से “प्राइवेसी पहले” के समर्थक रहे हैं। 2015 में उन्होंने कहा था कि “प्राइवेसी का अधिकार आतंकवाद के डर से ज्यादा अहम है।”

लेकिन जैसे-जैसे ऐप पर अपराध बढ़े, कंपनी को अपना रुख थोड़ा बदलना पड़ा। फिर भी Telegram की पॉलिसी अब भी इतनी सख्त नहीं कि अपराधी आसानी से पकड़े जा सकें।

कंपनी के को-फाउंडर एक्सेल नेफ के अनुसार –

Telegram सिर्फ कोर्ट ऑर्डर मिलने पर ही किसी यूजर के IP और फोन नंबर देती है। अब तक ऐसा कोई मामला नहीं हुआ जिसमें Telegram ने आतंकवादी संदिग्ध का डेटा साझा किया हो। कंपनी की टीम सिर्फ 60 लोगों की है, जो दुनिया भर के अपराधों पर नजर रखने के लिए काफी कम है।

Telegram की ओर से कहा गया –

हम हर दिन लाखों हानिकारक पोस्ट हटाते हैं। Etidal संस्था के साथ मिलकर कट्टरपंथी कंटेंट हटाया जा रहा है। हम हिंसा और आतंकवाद के प्रचार पर सख्ती करते हैं। लेकिन ज़मीनी हकीकत इससे काफी अलग दिखती है।

Telegram के फीचर्स

  • एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन: किसी और को चैट पढ़ना बेहद मुश्किल।
  • बड़े चैनल्स: लाखों लोग एकसाथ जानकारी पाते हैं।
  • सेल्फ-डिस्ट्रक्ट मैसेज: सबूत मिट जाते हैं।
  • क्लाउड चैट्स: डेटा कहीं से भी एक्सेस।
  • बॉट्स: ऑटोमेशन आसान।

Anushka Pandey

Content Writer

Anushka Pandey as a Anchor and Content writer specializing in Entertainment, Histroical place, and Politics. They deliver clear, accurate, and engaging content through a blend of investigative and creative writing. Bagi brings complex subjects to life, making them accessible to a broad audience.

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