कौन हैं शाहिदा परवीन, जिनकी ग्राउंड विज़िट को जांच का टर्निंग पॉइंट माना जा रहा है?
दिल्ली में हुए धमाके के बाद जहां पूरा देश चिंता में है, वहीं केंद्र की जांच एजेंसियाँ लगातार सुराग़ जुटाने में लगी हैं। नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) बीते कुछ दिनों से जानकारी खंगाल रही है, और इसी क्रम में एक बेहद महत्वपूर्ण नाम का जिक्र हो रहा है। घटनास्थल पर पूर्व आईपीएस अधिकारी शाहिदा परवीन गांगुली पहुंची है। ।
क्यों खास माना जा रहा
आमतौर पर किसी धमाके के बाद शुरूआती जाँच स्थानीय पुलिस और केंद्रीय एजेंसियों की टीम करती है, लेकिन जिस तरह शाहिदा परवीन जैसी अनुभवी अधिकारी मौके पर पहुँचीं, इसे सब लोग एक “टर्निंग पॉइंट” मान रहे हैं। शाहिदा परवीन को आतंकवाद-रोधी अभियानों का सालों का अनुभव है।

कौन हैं शाहिदा परवीन गांगुली?
शाहिदा परवीन जम्मू-कश्मीर की पहली महिला आईपीएस अधिकारी हैं। यह उपलब्धि खुद में ही बड़ी बात है, लेकिन उनका करियर सिर्फ इस पहचान तक सीमित नहीं रहा। वे स्पेशल ऑपरेशंस ग्रुप (SOG) की सदस्य रहीं। वो यूनिट जो आतंकियों के खिलाफ सबसे चुनौतीपूर्ण अभियानों को अंजाम देती है।
उन्हें ‘लेडी एनकाउंटर स्पेशलिस्ट’ का नाम भी मिला, क्योंकि उन्होंने जम्मू-कश्मीर में आतंक के खिलाफ कई बड़े ऑपरेशनों को सफलतापूर्वक लीड किया। उनके काम की खासियत यह रही कि वे किसी भी ऑपरेशन में पीछे नहीं हटती थीं। कई बार उन्होंने खुद मोर्चा संभाला और जोखिम भरी परिस्थितियों में फँसी टीमों को बाहर निकाला।
साल 1997 बैच की अधिकारी
आईपीएस बनने के बाद उन्होंने 1997 से 2002 के बीच SOG में कार्य किया। ये वही समय था, जब घाटी में आतंकवाद अपने चरम पर था। और हर दिन सुरक्षा बलों पर हमले हो रहे थे। शाहिदा परवीन ने इस दौरान दर्जनों मिशन में हिस्सा लिया। कई बार उन्होंने खतरनाक हालात में भी संयम बनाए रखा और ऑपरेशनों को सफलतापूर्वक अंजाम दिया।
1999 के एक बड़े ऑपरेशन में उन्होंने अपनी टीम के साथ मिलकर आतंकियों द्वारा रचे गए गंभीर हमले को नाकाम कर दिया था। यह मिशन इतना कठिन था। कि सफलता के बाद पूरी टीम को सम्मानित किया गया, और शाहिदा को गैलंट्री अवॉर्ड मिला।
SOG के बाद CID में भी किया शानदार काम
स्पेशल ऑपरेशन्स में लंबा अनुभव लेने के बाद उन्हें CID में असिस्टेंट कमिश्नर ऑफ पुलिस के पद पर नियुक्त किया गया। यहाँ भी उन्होंने कई बड़े मामलों की जांच की । उनकी पहचान सिर्फ फील्ड ऑपरेशन्स तक सीमित नहीं रही, बल्कि वे जांच-विशेषज्ञ के रूप में भी उभरीं।
साल 2000 के आसपास जब पाकिस्तान समर्थित आतंकी संगठनों की गतिविधियाँ तेज़ थीं, तब शाहिदा ने कई नेटवर्क ध्वस्त किए। उनकी अगुवाई में लश्कर-ए-तैयबा और हिज्बुल मुजाहिदीन से जुड़े कई मॉड्यूल का पर्दाफाश हुआ। इन कार्रवाइयों ने घाटी में आतंकी गतिविधियों को काफी हद तक कमजोर किया।

महिला सुरक्षा जुड़े अभियान
फील्ड और जांच से इतर शाहिदा परवीन सामाजिक मुद्दों पर भी उतनी ही सक्रिय रही हैं। उन्होंने महिला सुरक्षा से जुड़े कई अभियानों में लोकल एडमिनिस्ट्रेशन के साथ मिलकर काम किया। कई जगहों पर उन्होंने स्कूलों, कॉलेजों और समुदायों में जाकर लोगों को जागरूक किया कि कैसे महिलाएँ अपनी सुरक्षा को लेकर सतर्क रहें। साइबर अपराध बढ़ने के दौर में उन्होंने युवाओं के लिए विशेष अभियान चलाए और बताया कि इंटरनेट के दुरुपयोग से खुद को कैसे बचाया जा सकता है।
साधारण परिवार से है शाहिदा
शाहिदा परवीन का जन्म कश्मीर के एक साधारण मुस्लिम परिवार में हुआ।उन्होंने अपनी पढ़ाई कड़ी मेहनत से पूरी की और आईपीएस बनने का सपना पूरा किया। शादी के बाद उन्होंने अपने पति का ‘गांगुली’ सरनेम अपनाया, क्योंकि उनके पति बंगाली परिवार से हैं। दो बच्चों की माँ होने के बावजूद शाहिदा ने करियर और निजी जीवन दोनों को संतुलन में रखा।
आजकल वे दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में रहती हैं और भले ही वे अब सेवा में नहीं हैं, लेकिन देश के लिए उनकी सेवा और अनुभव की अहमियत बरकरार है। इसी वजह से किसी बड़े मामले में उनकी सलाह को गंभीरता से लिया जाता है।
विवाद भी रहे साथ, पर अदालतों ने दिया भरोसा
किसी भी पुलिस अधिकारी का करियर विवादों से अछूता नहीं रहता, और शाहिदा परवीन भी इससे अलग नहीं रहीं। उनके कई एनकाउंटर को मानवाधिकार समूहों ने सवालों के घेरे में रखा था। कुछ मामलों में जांच भी बैठी, लेकिन ज्यादातर मामलों में अदालत ने उनके काम को सही ठहराते हुए उन्हें क्लीन चिट दी। उनके समर्थकों का कहना है कि “सुरक्षाकर्मी जब जान जोखिम में डालकर लड़ते हैं, तब फैसले लेना आसान नहीं होता। कई बार सेकंडों में निर्णय करने होते हैं, और बाद में उन्हीं पर सवाल उठ जाते हैं।”
दिल्ली धमाके की जांच में उनकी भूमिका क्यों नजर आ रही है महत्वपूर्ण?
दिल्ली धमाके की जाँच अभी शुरुआती चरण में है, लेकिन जाँच अधिकारियों का कहना है कि धमाके का तरीका, इस्तेमाल किए गए उपकरण और योजना की शैली को समझने के लिए ऐसे विशेषज्ञ की ज़रूरत होती है, जिनका अनुभव आतंकवाद-रोधी अभियानों में गहरा हो।
शाहिदा परवीन ने ऐसे सैकड़ों घटनास्थलों पर काम किया है, जहाँ छोटे-से सुराग से पूरी कहानी निकल आती है । उनका ग्राउंड विज़िट NIA की टीम को यह समझने में मदद करेगा कि
- धमाके की तकनीक क्या थी?
- क्या इसमें प्रशिक्षित मॉड्यूल शामिल था?
- क्या यह किसी बड़े नेटवर्क की तैयारी है?
- हमलावरों की मंशा और पैटर्न क्या संकेत दे रहे हैं?
- उनके विश्लेषण की बदौलत जांच और तेज़ हो सकती है।