दूषित पेयजल की आशंका के बीच एक बुजुर्ग की मौत, 150 से ज्यादा लोग बीमार; मुख्यमंत्री ने मामले में तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए
इंदौर के भागीरथपुरा में डायरिया से हालात बिगड़े, बुजुर्ग की मौत, 150 से ज्यादा लोग बीमार

इंदौर शहर जिसे देश बार-बार सबसे साफ़ शहर के तौर पर पहचानता है। लेकिन इसी शहर के भागीरथपुरा में, पिछले कुछ दिनों से उल्टी, दस्त और कमजोरी की शिकायत के बाद डेढ़ सौ से ज्यादा लोग बीमार हो चुके हैं। फिलहाल 15 मरीज अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती हैं। वहीं 8 लोगों की मौत हो चुकी हैं। डॉक्टरों के मुताबिक, ज्यादातर मरीजों में डायरिया के लक्षण मिले हैं, जिससे शरीर में तेजी से कमजोरी आ रही है। इलाज के दौरान एक दुखद घटना भी हुई। वर्मा अस्पताल में भर्ती 80 वर्षीय नंदलाल पाल की मौत हो गई। लगातार उल्टी-दस्त के चलते उनकी हालत बिगड़ती चली गई। बीमारी फैलने की वजह को लेकर बस्ती के लोगों का कहना है कि समस्या की जड़ पेयजल हो सकती है। रहवासियों के मुताबिक, कई दिनों से नलों में पहले गंदा पानी आता है और कुछ देर बाद साफ पानी निकलता है। इस बात की शिकायत पहले भी की गई थी, लेकिन ठोस समाधान नहीं हो पाया। स्थिति गंभीर होती देख नगर निगम हरकत में आया। दूषित पानी की आशंका के चलते टैंकरों से जलापूर्ति शुरू की गई। साथ ही पानी के सैंपल लेकर जांच के लिए भेजे गए हैं, जिनकी रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।

स्वास्थ्य विभाग की टीम तैनात
स्वास्थ्य विभाग की टीमें भी बस्ती में तैनात कर दी गई हैं। घर-घर जाकर मरीजों की पहचान की जा रही है और दवाइयां बांटी जा रही हैं। डॉक्टरों का कहना है कि अधिकतर मामलों में स्थिति नियंत्रण में है और घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन सतर्कता बेहद जरूरी है। इंदौर के मेयर पुष्यमित्र भार्गव, पार्षद कमल वाघेला और नगर निगम के अधिकारी भागीरथपुरा पहुंचे। उन्होंने जलापूर्ति व्यवस्था का जायजा लिया और स्थानीय लोगों से बातचीत की। मेयर ने बताया कि जांच में सामने आया है कि पानी की मेन लाइन के एक हिस्से में ड्रेनेज और सीवरेज का पानी मिल रहा था। उस जगह को चिन्हित कर लिया गया है और सुधार का काम शुरू कर दिया गया है। उन्होंने माना कि इंदौर जैसे शहर में ऐसी घटना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है और इसकी जिम्मेदारी नगर निगम की है। यह भी सामने आया कि इलाके में पुरानी नल लाइनों को बदलने के लिए पहले ही टेंडर जारी किए गए थे, लेकिन काम में देरी हुई। अब इन टेंडरों को दोबारा जारी कर तेजी से काम पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही पूरे मामले की जांच के आदेश भी दिए गए हैं।
स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक अब तक 35 मरीज ठीक होकर घर लौट चुके हैं, जबकि बीते 24 घंटों में 66 लोग अस्पताल में भर्ती कराए गए हैं। सभी को निशुल्क इलाज मुहैया कराया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भी मामले को गंभीरता से लिया है। उन्होंने प्रशासन को तुरंत राहत और इलाज के निर्देश दिए हैं। सरकार की ओर से मृतक के परिजनों को 2-2 लाख रुपये की सहायता राशि देने की घोषणा की गई है। लापरवाही बरतने वाले तीन अधिकारियों को सस्पेंड भी कर दिया गया है।