SRS ग्रुप के मालिक प्रवीण कपूर ने कैसे लगाया लोगों को ₹2200 करोड़ का चूना? जानकर उड़ जाएंगे होश!
प्रवर्तन निदेशालय (ED) की मांग पर अमेरिका ने एसआरएस ग्रुप के सह-संस्थापक और प्रमोटर प्रवीण कुमार कपूर को भारत डिपोर्ट कर दिया है। प्रवीण के खिलाफ इंटरपोल ने रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया था और वह लंबे समय से फरार था। अमेरिका के नेवार्क इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर उसे प्रवेश से रोक दिया गया और उसका वीजा रद्द कर दिया गया। इसके बाद 2 नवंबर को उसे दिल्ली वापस भेज दिया गया।
कौन है प्रवीण कपूर
प्रवीण कुमार कपूर, एसआरएस रियलिटी फर्म ग्रुप का सह-संस्थापक है। ईडी ने उसके खिलाफ इंटरपोल से लुकआउट सर्कुलर (LOC) जारी कराया था। उसके खिलाफ फरीदाबाद, दिल्ली और सीबीआई के कई थानों में कुल 81 एफआईआर दर्ज हैं। इन मामलों के आधार पर ईडी ने उसके और उसके ग्रुप के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग की जांच शुरू की थी।
बैंकों और निवेशकों को लगाया 2,200 करोड़ का चूना
ईडी की जांच में सामने आया कि प्रवीण और उसके ग्रुप ने बैंकों और निवेशकों को करीब 2,200 करोड़ रुपये का चूना लगाया। उन्होंने लोगों से ऊंचे रिटर्न का झांसा देकर एसआरएस ग्रुप में पैसे लगवाए और उन पैसों को सैकड़ों शेल कंपनियों के जरिए इधर-उधर ट्रांसफर किया। यानी, पैसे के स्रोत को छिपाने के लिए उसे फर्जी कंपनियों में घुमाया गया।
इस पूरे घोटाले में ईडी अब तक 2295.98 करोड़ रुपये की संपत्ति अस्थायी रूप से जब्त कर चुकी है। जांच एजेंसी का कहना है कि प्रवीण कपूर की भूमिका इस घोटाले में मुख्य है, और अमेरिका से उसकी वापसी के बाद अब उससे पूछताछ कर पूरे रैकेट का खुलासा किया जा सकता है।

कई सालों से था फरार
प्रवीण कुमार कपूर कई वर्षों से फरार था। उसके साथ एसआरएस ग्रुप के दो अन्य प्रमोटर—जितेंद्र कुमार गर्ग और सुनील जिंदल भी जांच से बचते रहे। ईडी ने कपूर को गुरुग्राम की विशेष पीएमएलए कोर्ट में दाखिल चार्जशीट में आरोपी बनाया है। कोर्ट ने ईडी की शिकायत को स्वीकार करते हुए उसके खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया और उसे घोषित अपराधी (Proclaimed Offender) बताया गया।
ईडी ने प्रवीण कपूर, जितेंद्र गर्ग और सुनील जिंदल के खिलाफ भगोड़ा आर्थिक अपराधी अधिनियम (FEOA) के तहत भी कार्रवाई शुरू कर दी है ताकि उसे आधिकारिक रूप से भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित किया जा सके। एजेंसी अन्य फरार आरोपियों की वापसी और प्रत्यर्पण सुनिश्चित करने के प्रयास कर रही है, जबकि पूरे घोटाले की जांच अभी जारी है।