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ये मुस्लिम देश खरीदेगा अब भारत से ब्रह्मोस! जाने क्यों हैं ब्रह्मोस मिसाइल इतनी खास?

ब्रह्मोस

भारत की ब्रह्मोस मिसाइल ने फिर लहराया परचम, इंडोनेशिया बना दूसरा ASEAN देश, डील फाइनल चरण में

ब्रह्मोस

भारत की घातक सुपरसोनिक क्रूज़ मिसाइल ब्रह्मोस (BrahMos) एक बार फिर सुर्खियों में है। दक्षिण-पूर्व एशिया के मुस्लिम बहुल देश इंडोनेशिया के साथ भारत का बड़ा रक्षा समझौता फाइनल होने के कगार पर है। बताया जा रहा है कि करीब 450 मिलियन डॉलर,          (करीब 3,750 करोड़ रुपये) का यह सौदा जल्द ही तय हो सकता है। अगर यह समझौता हो जाता है तो इंडोनेशिया फिलिपींस के बाद दूसरा ASEAN देश बन जाएगा जो भारत की इस मिसाइल प्रणाली को खरीदेगा। इससे पहले फिलिपींस ने 2022 में ब्रह्मोस सिस्टम की खरीद के लिए भारत के साथ लगभग 375 मिलियन डॉलर की डील पर हस्ताक्षर किए थे।

 

ब्रह्मोस क्या है और क्यों है इतनी खास?

ब्रह्मोस मिसाइल को भारत और रूस ने संयुक्त रूप से विकसित किया है। इसका नाम भारत की ब्रह्मपुत्र नदी और रूस की मॉस्कवा नदी के पहले अक्षरों से मिलाकर रखा गया है, ब्रह्म + मॉस = ब्रह्मोस।

यह मिसाइल दुनिया की सबसे तेज़ सुपरसोनिक क्रूज़ मिसाइलों में से एक है। इसकी रफ्तार ध्वनि की गति से करीब तीन गुना तक जा सकती है। यह मिसाइल जमीन, समुद्र और हवा तीनों प्लेटफॉर्मों से दागी जा सकती है।

इसकी एक और खासियत है इसका “सी-स्किमिंग” फ्लाइट मोड। यानी यह समुद्र की सतह के बेहद करीब उड़कर लक्ष्य तक पहुंचती है, जिससे राडार सिस्टम इसे पकड़ नहीं पाते। यही कारण है कि इसे दुनिया की सबसे सटीक और घातक मिसाइलों में गिना जाता है।

 

मई 2025 के भारत-पाकिस्तान संघर्ष में दिखी ताकत

ब्रह्मोस की चर्चा हाल में उस वक्त और बढ़ गई जब भारत-पाकिस्तान के बीच मई 7–10, 2025 के बीच संघर्ष हुआ था। उस दौरान भारतीय सेना ने कुछ रणनीतिक ठिकानों पर ब्रह्मोस मिसाइल का इस्तेमाल किया था।

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, ब्रह्मोस के सटीक निशाने ने पाकिस्तानी वायुसेना के कई हवाई अड्डों और ठिकानों को बुरी तरह नुकसान पहुंचाया। पाकिस्तानी आर्मी चीफ जनरल आसिम मुनीर के पास ब्रह्मोस के वार की कोई काट नहीं थी। जैसे ही भारत ने मिसाइल लॉन्च की, अगले ही दिन पाकिस्तान की तरफ से सीजफायर की पेशकश आ गई। इस घटना के बाद न सिर्फ़ एशिया, बल्कि दुनिया के कई देशों ने भारत के इस सिस्टम में दिलचस्पी दिखाई।

 

फिलिपींस के बाद अब इंडोनेशिया की बारी

फिलिपींस के साथ हुई डील भारत के लिए एक ऐतिहासिक कदम थी। उस समझौते ने पहली बार भारत को रक्षा निर्यातक,                        (Defence Exporter) के रूप में एशिया में स्थापित किया। अब इंडोनेशिया की डील को एशिया-पैसिफिक क्षेत्र का गेम-चेंजर सौदा माना जा रहा है।

इंडोनेशिया दक्षिण चीन सागर में चीन की बढ़ती सैन्य गतिविधियों से चिंतित है। चीन और इंडोनेशिया के बीच नातुना द्वीपों (Natuna Islands) को लेकर लंबे समय से तनाव बना हुआ है। ऐसे में इंडोनेशिया अपनी समुद्री सुरक्षा मजबूत करने के लिए ब्रह्मोस जैसी मिसाइल खरीदना चाहता है। इस डील के तहत भारत इंडोनेशिया को कोस्ट-डिफेंस वर्ज़न (Coastal Defence System) उपलब्ध कराएगा, जो समुद्र तट से आने वाले खतरों को नष्ट करने में सक्षम होगा।

 

मेक इन इंडिया, मेक फॉर द वर्ल्ड”

पिछले कुछ वर्षों में भारत ने अपनी रक्षा नीति को “मेक इन इंडिया, मेक फॉर द वर्ल्ड” के तहत नया आकार दिया है। पहले जहां भारत सबसे बड़ा रक्षा आयातक था, वहीं अब वह कई देशों को अपने हथियार निर्यात कर रहा है। ब्रह्मोस जैसी मिसाइलों के ज़रिए भारत न सिर्फ अपनी सैन्य ताकत दिखा रहा है बल्कि राजनयिक प्रभाव भी बढ़ा रहा है। इंडोनेशिया जैसे मुस्लिम बहुल देश के साथ यह डील भारत की सॉफ्ट पावर और स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप दोनों को मजबूत करेगी।

 

भारत की रक्षा निर्यात नीति में ऐतिहासिक छलांग

भारत के रक्षा मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, पिछले एक दशक में भारत का रक्षा निर्यात 13 गुना तक बढ़ा है। साल 2014-15 में भारत ने जहां केवल 1,940 करोड़ रुपये का रक्षा निर्यात किया था, वहीं 2023-24 में यह बढ़कर 16,000 करोड़ रुपये से अधिक पहुंच गया। ब्रह्मोस मिसाइल की डील ने इस ग्राफ को और ऊंचा किया है। इसके अलावा भारत अब वियतनाम, मलेशिया और थाईलैंड जैसे देशों से भी बात कर रहा है, जो भविष्य में ब्रह्मोस या अन्य रक्षा प्रणालियाँ खरीद सकते हैं।

 

चीन पर भी दबाव

इंडोनेशिया की यह संभावित डील चीन के लिए चिंता का कारण मानी जा रही है। चीन दक्षिण चीन सागर में लगातार अपनी सैन्य उपस्थिति बढ़ा रहा है, और भारत का इस क्षेत्र में रक्षा सहयोग बढ़ाना उसके लिए रणनीतिक चुनौती है।

ब्रह्मोस मिसाइल अब सिर्फ एक हथियार नहीं रही, यह भारत की तकनीकी क्षमता, रणनीतिक सोच और कूटनीतिक पहुंच का प्रतीक बन चुकी है। इंडोनेशिया की डील से भारत को न सिर्फ आर्थिक लाभ मिलेगा, बल्कि दक्षिण-पूर्व एशिया में उसकी सैन्य विश्वसनीयता भी मजबूत होगी।

Anushka Pandey

Content Writer

Anushka Pandey as a Anchor and Content writer specializing in Entertainment, Histroical place, and Politics. They deliver clear, accurate, and engaging content through a blend of investigative and creative writing. Bagi brings complex subjects to life, making them accessible to a broad audience.

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