Search

क्या बर्बाद हो जाएंगी राज्य सरकारें ? ‘कैश ट्रांसफर’ के नाम महिलाओं पर खर्च कर डाले ₹1.68 लाख करोड़

क्या बर्बाद हो जाएंगी राज्य सरकारें ? ‘कैश ट्रांसफर’ के नाम महिलाओं पर खर्च कर डाले ₹1.68 लाख करोड़

 

भारत की राजनीति में पिछले कुछ वर्षों में एक बड़ा परिवर्तन देखने को मिल रहा है अब इसका केंद्र महिलायें बनती जा रही है। चुनावी घोषणाओं से लेकर बजट आवंटन तक, महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने पर राजनीतिक दल कोशिश कर रहे हैं। कई राज्य सरकारें महिलाओं के बैंक खातों में सीधे पैसे ट्रांसफर करने की योजनाएं चला रही हैं, जिनका उद्देश्य गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों की महिलाओं को आर्थिक सहारा देना है। लेकिन अब योजनाओं को लेकर एक रिपोर्ट ने सबकी चिंता बढ़ा दी है।

 

PRS की रिपोर्ट ने किया बड़ा खुलासा

थिंक टैंक PRS लेजिस्लेटिव रिसर्च की एक रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में देश के 12 राज्यों ने महिलाओं के लिए चल रही योजनाओं पर कुल 1.68 लाख करोड़ रुपये खर्च किए हैं। इन योजनाओं के तहत महिलाओं को बिना शर्त नकद ट्रांसफरके रूप में पैसे दिए जा रहे हैं। तीन साल पहले तक ऐसी योजनाएं सिर्फ दो राज्यों में थीं, लेकिन अब इनकी संख्या बढ़कर 12 तक पहुंच गई है। रिपोर्ट में बताया गया है कि इन 12 राज्यों में से छह राज्य घाटे में हैं। हालांकि, अगर UCT स्कीम पर खर्च को अलग कर दिया जाए, तो बाकी मामलों में इन राज्यों की आर्थिक स्थिति पहले से बेहतर दिख रही है। यानी, ये योजनाएं राज्यों के बजट पर भारी बोझ डाल रही हैं।

 

 

इन योजनाओं का मकसद है कि हर महीने सीधे महिलाओं के बैंक खाते में पैसे भेजकर गरीब परिवारों की महिलाओं को सशक्त बनाया जाए। सरकारे महिलाओं को बड़ा वोट बैंक समझकर सीधे पैसा ट्रांसफर कर रही है। कई राज्यों में यह अब सरकार की प्रमुख कल्याणकारी योजना बन चुकी है। लेकिन सरकार की वित्तीय हालत पर इसका खराब असर पड़ रहा है। उदाहरण के तौर पर —

मध्य प्रदेश की लाडली बहना योजना, कर्नाटक की गृह लक्ष्मी योजना इनमें हर महीने 1,000 से 1,500 रुपये तक की सहायता दी जाती है।

कैश ट्रांसफर

कैसे किया जा रहा चुनाव

इन योजनाओं के लाभार्थियों का चयन उनकी आय, उम्र और सामाजिक स्थिति के आधार पर किया जाता है। कुछ राज्यों ने इस दिशा में अपने बजट में बड़ा इजाफा किया है — जैसे असम ने महिला योजनाओं के लिए पिछले साल से 31 प्रतिशत ज्यादा रकम रखी है, जबकि पश्चिम बंगाल ने 15 प्रतिशत की बढ़ोतरी की है।

 

हालांकि, रिपोर्ट ने चेतावनी दी है कि ये योजनाएं राज्यों के खजाने पर भारी दबाव डाल रही हैं। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने भी आगाह किया है कि अगर महिलाओं, किसानों और युवाओं के लिए इस तरह के कैश ट्रांसफर और सब्सिडी लगातार बढ़ते रहे, तो इससे राज्यों के उत्पादक खर्च (development expenditure) पर असर पड़ सकता है और विकास की रफ्तार धीमी हो सकती है।

राहुल गांधी के ‘वोट चोरी’आरोप पर आया चुनाव आयोग का जवाब! वोटर लिस्ट में धांधली पर ये बोला आयोग ?

Shashwat Srijan

Content Writer

Leave a Comment

Your email address will not be published.