दूरदर्शी उद्यमी, जिन्होंने परंपरा और आधुनिकता को जोड़कर भारत की कारोबारी पहचान को दुनिया तक पहुंचाया

दुनिया के सबसे बड़े कारोबारी घरानों में से एक, हिंदुजा ग्रुप के चेयरमैन और प्रसिद्ध उद्योगपति गोपीचंद पी. हिंदुजा का लंदन में निधन हो गया है। 85 वर्षीय ‘जीपी हिंदुजा’ पिछले कुछ सप्ताह से अस्वस्थ थे और इलाज के दौरान उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन से न सिर्फ हिंदुजा परिवार बल्कि पूरे वैश्विक उद्योग जगत में शोक की लहर है।
उद्योग जगत की श्रद्धांजलि
उनके निधन के बाद भारतीय उद्योग जगत से लेकर ब्रिटिश कारोबारी समुदाय तक गहरी संवेदना जताई है। कई उद्योगपतियों ने उन्हें “a man of vision and values” बताया। भारत के कॉर्पोरेट जगत ने कहा ,“गोपीचंद हिंदुजा न केवल एक उद्यमी थे, बल्कि भारतीयता के उस भाव के प्रतीक थे जो ईमानदारी, मेहनत और विश्वास पर टिका है।”
कौन हैं गोपीचंद हिंदुजा
गोपीचंद हिंदुजा, जिन्हें कारोबारी दुनिया में “जीपी हिंदुजा” के नाम से जाना जाता था, हिंदुजा परिवार की दूसरी पीढ़ी से थे। उनके बड़े भाई श्रीचंद हिंदुजा के निधन के बाद मई 2023 में उन्होंने समूह की बागडोर संभाली थी। दोनों भाइयों ने मिलकर उस विरासत को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया, जिसकी नींव 1914 में उनके पिता परमानंद दीपचंद हिंदुजा ने रखी थी।
गोपीचंद हिंदुजा का जीवन इस बात की मिसाल था कि कैसे परिवार, परंपरा और आधुनिक बिज़नेस विज़न साथ-साथ चल सकते हैं। वे भारत की उस पीढ़ी का चेहरा थे जिसने कारोबारी ईमानदारी को बनाए रखते हुए अंतरराष्ट्रीय मंच पर सफलता हासिल की।
30 से अधिक देशों में कारोबारी साम्राज्य
गोपीचंद हिंदुजा ने हिंदुजा ग्रुप को सिर्फ भारत तक सीमित नहीं रखा।उन्होंने अपने बड़े भाई श्रीचंद हिंदुजा के साथ मिलकर इसे दुनिया के 30 से अधिक देशों तक फैला दिया। आज समूह का मुख्यालय लंदन में है और इसका कारोबार ऑटोमोबाइल, बैंकिंग, ऊर्जा, आईटी, इंफ्रास्ट्रक्चर और हेल्थकेयर जैसे विविध क्षेत्रों में फैला हुआ है। उनकी कारोबारी समझ का नतीजा था कि हिंदुजा ग्रुप आज लगभग 100 अरब डॉलर की अनुमानित संपत्ति वाला ग्लोबल बिज़नेस हाउस बन गया है।
उनके नेतृत्व में शुरू हुई नई दिशा
गोपीचंद हिंदुजा को एक शानदार रणनीतिकार विचारक और नेतृत्वकर्ता माना जाता था। उन्होंने कारोबारी विस्तार के साथ-साथ सामाजिक ज़िम्मेदारी (CSR) को भी समान महत्व दिया। उनके नेतृत्व में हिंदुजा ग्रुप ने शिक्षा, स्वास्थ्य और पर्यावरण के क्षेत्र में कई अहम पहलें शुरू कीं।
कुछ प्रमुख उपलब्धियां इस प्रकार हैं
- Ashok Leyland को ग्लोबल स्तर पर स्थापित करना —
ऑटोमोबाइल सेक्टर में हिंदुजा ग्रुप की यह कंपनी भारत की सबसे बड़ी वाणिज्यिक वाहन निर्माता बनी। - IndusInd Bank की शुरुआत —
1990 के दशक में हिंदुजा परिवार ने भारत के प्राइवेट बैंकिंग सेक्टर में एक भरोसेमंद नाम की नींव रखी। - Energy और IT सेक्टर में निवेश —
हिंदुजा ग्रुप ने रिन्यूएबल एनर्जी, पावर जनरेशन और इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी में लगातार विस्तार किया। - मानव संसाधन और परंपरा पर ज़ोर —
वे हमेशा कहते थे, “हमारा बिज़नेस केवल मुनाफे के लिए नहीं, बल्कि लोगों को सशक्त बनाने के लिए है।”
हिंदुजा ग्रुप – एक सदी की कहानी
1914 में सिंध (अब पाकिस्तान में) से शुरू हुआ हिंदुजा परिवार का कारोबार आज सौ साल से ज्यादा पुराना है। परमानंद हिंदुजा ने इसकी नींव रखी थी और उनके बेटों ,श्रीचंद, गोपीचंद, प्रकाश और अशोक हिंदुजा ने इसे आगे बढ़ाया।
गोपीचंद हिंदुजा की भूमिका खास रही क्योंकि उन्होंने एशिया से यूरोप और फिर अमेरिका तक ग्रुप का दायरा बढ़ाया। उनके कार्यकाल में हिंदुजा परिवार लगातार यूके के सबसे अमीर परिवारों में शुमार रहा।
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