“Truecaller की होगी छुट्टी ! भारत सरकार का बड़ा फैसला, अब नंबर के साथ दिखेगा कॉलर का नाम !

नई दिल्ली: अनजान नंबर से आने वाले कॉल्स से परेशान यूज़र्स के लिए अब एक बड़ी राहत की खबर है। टेलीकॉम रेगुलेटर TRAI (Telecom Regulatory Authority of India) और DoT (Department of Telecommunications) ने मिलकर एक महत्वपूर्ण फैसला लिया है। जल्द ही मोबाइल पर किसी अनजान नंबर से कॉल आने पर नंबर के साथ कॉलर का नाम भी दिखाई देगा।
थर्ड पार्टी ऐप पर रहना पड़ता था निर्भर
अब तक किसी अज्ञात कॉल की पहचान के लिए थर्ड पार्टी ऐप जैसे Truecaller पर निर्भर रहना पड़ता था, लेकिन नई व्यवस्था लागू होने के बाद यह जानकारी मोबाइल स्क्रीन पर स्वतः प्रदर्शित होगी। यह नाम वही होगा, जो यूज़र ने मोबाइल कनेक्शन लेते समय अपने वैध पहचान पत्र में दर्ज कराया था।
यह सुविधा डिफ़ॉल्ट रूप से सक्रिय होगी, हालांकि यदि कोई उपभोक्ता इसे नहीं चाहता है तो वह इसे डिएक्टिवेट भी करा सकेगा। बताया जा रहा है कि टेलीकॉम कंपनियों ने इसका ट्रायल मुंबई और हरियाणा सर्किल में पिछले वर्ष किया था, जो सफल रहा।
धोखाधड़ी और फर्जी कॉल्स पर रोक
TRAI और DoT का यह कदम देशभर में बढ़ती फर्जी कॉल्स, साइबर ठगी और डिजिटल अरेस्ट जैसी आपराधिक गतिविधियों पर लगाम लगाने के उद्देश्य से उठाया गया है। अब यूज़र को तुरंत पता चल जाएगा कि कॉल किसके नाम से आ रही है, जिससे वह धोखाधड़ी से बचने में सक्षम होगा।
2024 में दिया गया था प्रस्ताव
फरवरी 2024 में TRAI ने ‘Calling Name Presentation (CNAP)’ नामक सेवा का प्रस्ताव पेश किया था। उस समय सुझाव दिया गया था कि यह फीचर केवल उन उपभोक्ताओं के लिए होगा जो स्वयं इसकी मांग करेंगे।
बाद में DoT ने सुझाव दिया कि यह सुविधा सभी ग्राहकों के लिए डिफॉल्ट रूप से चालू होनी चाहिए। अंततः TRAI ने इस सुझाव को स्वीकार कर लिया। अब दोनों विभाग इस व्यवस्था को लागू करने पर सहमत हो गए हैं।
क्या है CNAP सेवा?
CNAP (Calling Name Presentation) तकनीक के तहत जब कोई कॉल करेगा, तो कॉलर का रजिस्टर्ड नाम और नंबर दोनों रिसीवर की स्क्रीन पर दिखेंगे। इसका उद्देश्य है:
स्पैम और फ्रॉड कॉल्स पर अंकुश लगाना।
यूज़र को कॉलर की वास्तविक पहचान बताना।
अनचाही और फर्जी कॉल्स से उपभोक्ताओं को राहत देना।
किन नेटवर्क्स पर लागू होगी यह सेवा?
शुरुआती चरण में CNAP सेवा 4G और 5G नेटवर्क्स पर उपलब्ध कराई जाएगी।
2G और 3G नेटवर्क्स पर इसे बाद में तकनीकी अपग्रेड के बाद लागू किया जाएगा।
नए मोबाइल डिवाइसों में CNAP सपोर्ट अनिवार्य करने की तैयारी भी चल रही है।
इस फैसले के प्रमुख फायदे
फ्रॉड कॉल्स पर अंकुश: फर्जी नंबरों से आने वाली कॉल्स की पहचान तुरंत हो सकेगी, जिससे ठगी की संभावना बेहद कम होगी।
यूज़र सुरक्षा में सुधार: कॉलर का नाम देखकर यूज़र यह तय कर सकेगा कि कॉल उठानी है या नहीं।
बिजनेस कॉल्स में पारदर्शिता: कंपनियां अपने वास्तविक ब्रांड नाम से कॉल कर सकेंगी, जिससे ग्राहक का भरोसा बढ़ेगा।
सुरक्षा एजेंसियों को छूट: कुछ चुनिंदा लोगों, VIPs और इंटेलिजेंस एजेंसियों को CLIR (Calling Line Identification Restriction) की सुविधा मिलेगी, जिनके नाम स्क्रीन पर प्रदर्शित नहीं होंगे।
CLIR सुविधा किन्हें मिलेगी?
जानकारी के मुताबिक, जिन लोगों ने CLIR (Calling Line Identification Restriction) सेवा ली होगी, उनके नाम कॉल रिसीवर की स्क्रीन पर दिखाई नहीं देंगे। यह छूट खास तौर पर इंटेलिजेंस एजेंसियों, वीआईपी व्यक्तियों और चुनिंदा सरकारी अधिकारियों को दी जाएगी।
हालांकि, जो भी इस सुविधा के लिए आवेदन करेगा, उसकी सुरक्षा और पहचान की पूरी जांच-पड़ताल की जाएगी।
TRAI और DoT की यह संयुक्त पहल न सिर्फ टेलीकॉम सेक्टर में पारदर्शिता बढ़ाएगी, बल्कि साइबर अपराध और वित्तीय धोखाधड़ी पर रोक लगाने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।