लंदन की प्रोफेसर और हिंदी साहित्य की जानी-मानी विद्वान फ्रांसेस्का ओरसिनी को इमिग्रेशन अधिकारियों ने भारत में प्रवेश से रोक दिया। मार्च 2025 से ब्लैकलिस्टेड होने के कारण उन्हें हांगकांग से आने के बाद एयरपोर्ट से वापस भेजा गया। सरकार ने इसे वीजा नियमों का उल्लंघन बताया, तो विपक्ष ने उठाए ‘अकादमिक स्वतंत्रता’ पर सवाल।

नई दिल्ली – लंदन की प्रसिद्ध हिंदी विद्वान और लंदन विश्वविद्यालय में प्रोफेसर एमेरिटा फ्रांसेस्का ओरसिनी को भारत में प्रवेश से रोक दिया गया है। उनके पास मान्य पांच साल का ई-वीजा था, लेकिन दिल्ली हवाई अड्डे पर उतरने पर उन्हें इमिग्रेशन अधिकारियों ने प्रवेश नहीं दिया और तुरंत देश वापस भेज दिया। यह घटना 20 अक्टूबर की रात हांगकांग से उनके आने के दौरान हुई।
ओरसिनी भारत की भाषा और साहित्य के अध्ययन में विशेष योगदान देने वाली विद्वान हैं। उन्हें हिंदी और दक्षिण एशियाई साहित्य में कई वर्षों की सेवा के लिए जाना जाता है। इस दौरान उन्होंने शोध और अकादमिक कार्यक्रमों में सक्रिय भागीदारी निभाई है। उन्होंने SOAS में प्रोफेसर एमेरिटा के पद पर कार्य किया है और उनकी प्रतिष्ठा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त है।
क्या है ब्लैकलिस्टिंग का कारण
अधिकारियों ने बताया कि फ्रांसेस्का ओरसिनी को मार्च 2025 से ब्लैकलिस्ट किया गया था। इसका कारण यह बताया गया कि उन्होंने अपनी पिछली यात्रा के दौरान वीजा की शर्तों का पालन नहीं किया था। सूत्रों के अनुसार, उनका वीजा टूरिस्ट कैटेगरी का था, लेकिन उन्होंने इसे उल्लंघन करते हुए पेशेवर गतिविधियां कीं, जो नियमों के खिलाफ हैं। एक अधिकारी ने एएनआई को बताया, “भारत में आने वाले विदेशी नागरिकों को अपने वीजा में लिखी गई श्रेणी और उद्देश्यों का सख्ती से पालन करना होता है। अगर कोई इस नियम का उल्लंघन करता है, तो उसे ब्लैकलिस्ट किया जा सकता है। यह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रचलित प्रक्रिया है और कई देशों द्वारा अपनाई जाती है।” भारतीय कानून के तहत टूरिस्ट वीजा धारकों को पेशेवर कार्य, शोध कार्य, रोजगार या मिशनरी गतिविधियों की अनुमति नहीं है। यदि कोई इन शर्तों का उल्लंघन करता है, तो इमिग्रेशन और गृह मंत्रालय के समन्वय से उसे देश में प्रवेश से रोका जाता है। ब्लैकलिस्टिंग स्थायी या अस्थायी हो सकती है, जो उल्लंघन की गंभीरता पर निर्भर करती है।
दिल्ली हवाई अड्डे नाटकीय घटनाक्रम
फ्रांसेस्का ओरसिनी हांगकांग से दिल्ली एयरपोर्ट पहुँची थीं, जहां चीन में एक अकादमिक सम्मेलन में शामिल होने के बाद वे भारत घूमने और दोस्तों से मिलने की योजना बना रही थीं। उनके पास पांच साल का वैध ई-वीजा था। लेकिन एयरपोर्ट पर उतरते ही इमिग्रेशन अधिकारियों ने उन्हें रोका और कहा कि उन्हें तुरंत देश छोड़ना होगा। इसके बाद उन्हें अपनी वापसी की यात्रा की व्यवस्था करने को कहा गया।
ओरसिनी ने इससे पहले अक्टूबर 2024 में भारत की यात्रा की थी। उनके पास भारतीय संस्कृति और साहित्य को समझने और अध्ययन करने का लंबा अनुभव है। उन्हें हिंदी भाषा और साहित्य में योगदान के लिए कई अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार और सम्मान भी प्राप्त हैं।
क्या कहता है भारतीय कानून
एक प्रतिष्ठित विद्वान के साथ इस तरह का व्यवहार भारत की अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा पर प्रश्नचिन्ह डालता है। विपक्ष ने सरकार से सवाल किया कि क्या विदेशी विद्वानों के लिए भारत खुला है या केवल सख्त नियमों के नाम पर उन्हें रोकने की नीति अपनाई जा रही है। हालांकि, अधिकारियों का कहना है कि यह निर्णय नियमों और कानून के अनुसार लिया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि विदेशियों के लिए वीजा उल्लंघन के मामलों में ब्लैकलिस्टिंग आम प्रक्रिया है और इसे केवल नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए किया जाता है।
कौन हैं, फ्रांसेस्का ओरसिनी
फ्रांसेस्का ओरसिनी इतालवी मूल की विद्वान हैं। उन्होंने ब्रिटेन की नागरिकता या स्थायी निवास के लिए आवेदन नहीं किया है और अपनी अकादमिक रुचियों और अनुसंधान को ही जीवन का केंद्र बनाया है।
वे लंदन विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ ओरिएंटल एंड अफ्रीकन स्टडीज (SOAS) में हिंदी और दक्षिण एशियाई साहित्य की प्रोफेसर एमेरिटा हैं। उन्होंने हिंदी साहित्य और संस्कृति पर कई शोध-पुस्तकें और लेख प्रकाशित किए हैं। उन्हें दक्षिण एशियाई साहित्य के क्षेत्र में एक प्रतिष्ठित विद्वान माना जाता है।
फ्रांसेस्का ने 1998 में जापानी विज्ञानी पीटर कोर्निकी से शादी की थी। उन्होंने पूरे जीवन को हिंदी और भारतीय संस्कृति के अध्ययन को समर्पित किया है। उनकी विद्वता और योगदान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता मिली है।
ब्लैकलिस्टिंग और वैश्विक प्रचलन
सूत्रों की माने तो, वीजा उल्लंघन के कारण ब्लैकलिस्टिंग वैश्विक स्तर पर अपनाई जाने वाली सामान्य प्रक्रिया है। अधिकांश देशों में विदेशी नागरिकों को नियमों के अनुसार ही प्रवेश दिया जाता है। अगर कोई देश में अपने वीजा की शर्तों का पालन नहीं करता, तो उसे ब्लैकलिस्ट किया जा सकता है।
भारत में भी यह नियम लागू होता है। विदेशी नागरिकों को अपनी वीजा श्रेणी में सीमित रहना होता है। टूरिस्ट वीजा धारकों के लिए किसी भी प्रकार के पेशेवर काम, शोध कार्य या रोजगार पर रोक है। उल्लंघन किए जाने पर इमिग्रेशन अधिकारियों के निर्देश पर उन्हें प्रवेश से रोका जाता है और जरूरत पड़ने पर निर्वासित कर दिया जाता है।