हर दिन सिर्फ 10 रुपए बचाकर दीपावली पर किसान पिता ने बेटी को दी स्कूटी, सिक्कों से भरी बोरी लेकर पहुंचा शोरूम

छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले के केसरापाठ गांव के छोटे किसान बजरंग राम भगत ने इस दीपावली अपने परिवार के लिए ऐसी खुशी खरीदी, जो अब पूरे देश के लोगों के दिल छू रही है।
बजरंग राम ने पिछले छह से सात महीनों तक रोज़ाना सिर्फ 10 रुपए बचाए, ताकि इस बार अपनी बेटी चंपा को स्कूटी गिफ्ट कर सकें।
धीरे-धीरे करते हुए उन्होंने करीब 40 हजार रुपए सिक्कों में इकट्ठे किए। बाकी 20 हजार रुपए नकद जोड़कर, दीपावली के दिन वह बेटी के साथ शोरूम पहुंचे।
जब उन्होंने काउंटर पर सिक्कों से भुगतान शुरू किया, तो सभी कर्मचारी हैरान रह गए। रकम गिनने में कई घंटे लगे, लेकिन किसी ने शिकायत नहीं की।
“कर्ज नहीं लेना चाहता था, इसलिए हर दिन थोड़ा-थोड़ा बचाया”
बजरंग राम भगत ने मुस्कुराते हुए कहा —
“मुझे कर्ज लेना पसंद नहीं है। मैंने ठान लिया था कि बेटी को स्कूटी दूंगा, लेकिन अपने पैसों से ही। इसलिए रोज़ थोड़ा-थोड़ा जोड़ता गया। आज जब बेटी को स्कूटी मिली, तो लगा मेहनत रंग लाई।”
उस पल बेटी चंपा की आंखों में चमक थी और पिता की आंखों में गर्व। शोरूम में मौजूद लोग भी इस नज़ारे को देखकर भावुक हो उठे।
सोशल मीडिया पर छाया किसान पिता का जज़्बा
बजरंग राम और उनकी बेटी का यह वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में काउंटर पर रखे ढेर सारे सिक्के, गिनते हुए कर्मचारी और पिता-बेटी के चेहरों पर झलकती खुशी लोगों का दिल जीत रही है।यूज़र्स इस सादगी और जज़्बे की तारीफ करते नहीं थक रहे हैं।
शोरूम मालिक ने भी दिखाया सम्मान
शोरूम मालिक आनंद गुप्ता और उनकी टीम ने किसान पिता की मेहनत को सलाम किया।उन्होंने खुद सिक्के गिने और स्कूटी उन्हें ससम्मान सौंप दी। इतना ही नहीं, कंपनी की स्कीम के तहत जब बजरंग राम ने लॉटरी कूपन स्क्रैच किया, तो उन्हें मिक्सर ग्राइंडर इनाम में मिला — जिससे उनकी खुशी दोगुनी हो गई।
छोटी बचत, बड़ी सीख
बजरंग राम का किस्सा बताता है कि खुशियां अमीरी से नहीं, नीयत और मेहनत से खरीदी जाती हैं।
हर दिन के 10 रुपए ने उनकी बेटी के चेहरे पर वो मुस्कान ला दी, जिसे कोई भी बड़ा तोहफा नहीं दे सकता था। इस दीपावली पर एक पिता ने साबित कर दिया।