सिहोरा की जनता ने अपनाया ‘भूमि समाधि सत्याग्रह’, प्रशासनिक उपेक्षा के खिलाफ शांतिपूर्ण संघर्ष, खून से दिए जलाने के बाद अब मिट्टी में समर्पण का अनोखा प्रदर्शन।

मध्य प्रदेश के जबलपुर ज़िले के सिहोरा में इन दिनों एक अनोखा आंदोलन पूरे प्रदेश का ध्यान खींच रहा है। सिहोरा को जिला घोषित करने की मांग को लेकर यहां के लोग ‘भूमि समाधि सत्याग्रह’ कर रहे हैं। इस अनूठे विरोध में सैकड़ों लोग खुद को गले तक मिट्टी में गाड़कर शांतिपूर्वक आंदोलन कर रहे हैं।
लोगों की अनोखी मांग
सिहोरा के लोगों की यह मांग कोई नई नहीं है। पिछले कई सालों से यहां के नागरिक सिहोरा को जिला का दर्जा दिलाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। अब यह मांग फिर से तेज हो गई है। आंदोलन का नेतृत्व ‘लक्ष्य जिला सिहोरा आंदोलन समिति’ कर रही है। समिति के सदस्य और आम लोग खुले मैदानों में गड्ढे खोदकर उनमें खुद को गर्दन तक गाड़ रहे हैं। वे सरकार से सिर्फ एक ही मांग कर रहे हैं — ‘ सिहोरा को जिला बनाया जाए। ‘ यह आंदोलन पूरी तरह से शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से किया जा रहा है। लोगों का कहना है कि जब तक सिहोरा को जिला घोषित नहीं किया जाएगा, वे पीछे नहीं हटेंगे।
खून के दिए से लेकर मिट्टी में गाड़ने तक
कुछ दिन पहले ही आंदोलनकारियों ने अपनी मांग को लेकर खून से दिए जलाए थे। अब उसी मांग को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने भूमि समाधि सत्याग्रह शुरू किया है। लोग घंटों तक मिट्टी में गले तक दबे बैठे रहते हैं, ताकि सरकार उनकी बात सुने। यह दृश्य किसी साधारण विरोध से कहीं ज़्यादा प्रभावशाली और भावनात्मक है।

‘ यह सिहोरा की नहीं, पूरे क्षेत्र की लड़ाई है ‘
आंदोलन समिति के संयोजक विकास दुबे ने कहा कि यह आंदोलन किसी राजनीतिक स्वार्थ का हिस्सा नहीं है, बल्कि यह जनता की असली आवाज़ है। उन्होंने कहा “सिहोरा के लोग कई सालों से जिला बनने की उम्मीद लगाए बैठे हैं। यह आंदोलन सिर्फ सिहोरा की नहीं, बल्कि उन तमाम इलाकों की लड़ाई है जो अब तक प्रशासनिक सुविधाओं से वंचित हैं। समिति का कहना है कि “सिहोरा भौगोलिक स्थिति, जनसंख्या और राजस्व के आधार पर जिला बनने के सभी मापदंडों को पूरा करता है।”
प्रशासन की कार्रवाई से नाराज़गी
जब आंदोलनकारी अपने सत्याग्रह में जुटे थे, तब प्रशासन ने वहां के गड्ढों को भरवा दिया। इससे लोगों में गुस्सा फैल गया। हालांकि समिति ने तुरंत नया स्थान तय कर आंदोलन फिर से शुरू करने की घोषणा कर दी। समिति के सदस्यों ने साफ कहा कि “प्रशासन कितनी भी कोशिश कर ले, यह आंदोलन नहीं रुकेगा। उनका कहना है कि सरकार अगर जनता की बात नहीं सुनेगी, तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।
विकास दुबे ने कहा, “सिहोरा की जनता अब थक चुकी है। कई बार सरकार से गुहार लगाई गई, पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। सरकार को अब जनता की भावनाओं का सम्मान करते हुए जल्द फैसला लेना चाहिए। लोगों के धैर्य की अब और परीक्षा न ली जाए।”
भीड़ बढ़ी, समर्थन मजबूत हुआ
इस आंदोलन को स्थानीय नागरिकों के साथ-साथ व्यापारियों, सामाजिक संगठनों और युवाओं का भी भरपूर समर्थन मिल रहा है। रोज़ाना आंदोलन स्थल पर भीड़ बढ़ती जा रही है। लोग नारे लगा रहे हैं ‘ जिला बनाओ सिहोरा! ‘
वातावरण पूरी तरह जोश से भरा हुआ है। कई लोग अपनी दुकानों और कामों को छोड़कर आंदोलन स्थल पर पहुँच रहे हैं।
समिति ने कहा, कि यह संघर्ष सिर्फ राजनीतिक पहचान की नहीं, बल्कि विकास और प्रशासनिक सुविधाओं की लड़ाई है। उनका कहना है कि जिला बनने से सिहोरा और आसपास के सैकड़ों गांवों को सीधी सरकारी सुविधाएं मिल सकेंगी। जैसे बेहतर शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़कें और रोजगार के अवसर।
सरकार की चुप्पी बनी सवाल
आंदोलन लगातार तेज हो रहा है, लेकिन अब तक सरकार की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। प्रशासन सतर्क ज़रूर है, मगर आंदोलन को रोकने की कोई कोशिश फिलहाल सफल नहीं हो सकी है। लोगों का कहना है कि अगर जल्द सुनवाई नहीं हुई, तो यह आंदोलन और बड़ा रूप ले सकता है।
सिहोरा क्यों मांग रहा है जिला का दर्जा?
सिहोरा की भौगोलिक स्थिति इसे जिला बनाए जाने के लिए पूरी तरह उपयुक्त बताई जाती है। यह क्षेत्र जबलपुर से लगभग 40 किलोमीटर दूर है और यहां की जनसंख्या भी पर्याप्त है। आसपास के ग्रामीण इलाकों के लोग सरकारी कामकाज के लिए अक्सर जबलपुर जाना पड़ता है, जिससे समय और धन दोनों की बर्बादी होती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर सिहोरा को जिला बनाया जाता है, तो न सिर्फ प्रशासनिक काम आसान होंगे बल्कि क्षेत्र का आर्थिक विकास भी तेज़ी से होगा।
सरकार को अब जनता की बात सुननी ही होगी
सिहोरा आंदोलन समिति के सदस्यों ने साफ चेतावनी दी है कि वे तब तक पीछे नहीं हटेंगे जब तक सरकार आधिकारिक रूप से सिहोरा को जिला घोषित नहीं करती। उनका कहना है कि यह आंदोलन लंबा चलेगा, लेकिन पूरी तरह अहिंसक रहेगा। लोगों ने जिस शांतिपूर्ण और अनोखे तरीके से अपनी आवाज़ उठाई है, उसने सभी का ध्यान खींचा है।