डिजिटल वॉलेट से हो रही आतंकी फंडिंग! FATF की पाक को कड़ी चेतावनी ‘आतंकी फंडिंग रोको, वरना लौटोगे ग्रे लिस्ट में'”

नई दिल्ली। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आतंकवाद की फन्डिंग पर नजर रखने वाली संस्था फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) ने एक बार फिर पाकिस्तान को सख्त चेतावनी दी है। संस्था ने कहा है कि ग्रे लिस्ट से बाहर आने के बाद भी पाकिस्तान को यह सुनिश्चित करना होगा कि उसके यहां से किसी भी तरह की आतंकी फंडिंग न हो।
दुनिया जानती है कि पाकिस्तान लंबे समय से आतंकियों को पनाह और संरक्षण देता रहा है। आज भी हजारों आतंकी देश में खुलेआम घूम रहे हैं। ऐसे में FATF की चेतावनी पाकिस्तान के लिए किसी कूटनीतिक झटके से कम नहीं मानी जा रही।
FATF अध्यक्ष एलिसा डी आंदा माद्राजो ने दी सख्त चेतावनी
फ्रांस में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान FATF अध्यक्ष एलिसा डी आंदा माद्राजो ने कहा कि पाकिस्तान सहित सभी देशों को अपराधों की रोकथाम और निवारण के लिए प्रभावी कदम उठाने चाहिए।
उन्होंने कहा —
“कोई भी देश जो ग्रे लिस्ट में रहा हो, उसे किसी भी आतंकवादी या अपराधी संगठन को संरक्षण नहीं देना चाहिए। आतंकवादी गतिविधियों के लिए कोई भी देश बुलेटप्रूफ नहीं है।”
एफएटीएफ प्रमुख ने यह भी बताया कि पाकिस्तान पर अब भी नजर रखी जा रही है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि वह आतंकवाद के वित्तपोषण विरोधी उपायों को लागू कर रहा है या नहीं।
अक्टूबर 2022 में FATF ने हटाया था पाकिस्तान का नाम ग्रे लिस्ट से
FATF ने अक्टूबर 2022 में पाकिस्तान का नाम ग्रे लिस्ट से हटा दिया था। उस समय संस्था ने कहा था कि इस्लामाबाद ने आतंकवाद के वित्तपोषण और मनी लॉन्ड्रिंग से निपटने के लिए पर्याप्त सुधार किए हैं। लेकिन अब लगभग दो साल बाद, पाकिस्तान के आतंकी संगठनों से संबंध एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गए हैं।
सूत्रों के मुताबिक, FATF ने पाकिस्तान को दो टूक संदेश दिया है कि अगर उसने अपने यहां से आतंकी नेटवर्क और धन शोधन गतिविधियों पर नियंत्रण नहीं किया, तो उसे दोबारा निगरानी सूची में शामिल किया जा सकता है।
FATF क्या है और कैसे करता है कार्रवाई?
फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) एक अंतरराष्ट्रीय संस्था है जो मनी लॉन्ड्रिंग और टेरर फंडिंग जैसी गतिविधियों पर रोक लगाने के लिए वैश्विक मानक तय करती है।
इस संस्था की स्थापना 1989 में पेरिस में हुई थी और इसका मुख्यालय भी वहीं स्थित है। FATF में 40 सदस्य देश शामिल हैं, जिनमें भारत भी एक सक्रिय सदस्य है।
संस्था का उद्देश्य है उन देशों पर कार्रवाई करना जो आतंकवादी संगठनों या आपराधिक नेटवर्क को आर्थिक सहायता प्रदान करते हैं। FATF यह भी मॉनिटर करता है कि अपराधी और आतंकवादी धन कैसे जुटाते हैं, उसका इस्तेमाल कहाँ करते हैं और उसे कैसे छिपाते हैं।
गौरतलब है कि दुनियाभर के प्रमुख बैंक और वित्तीय संस्थान FATF की रिपोर्ट और दिशानिर्देशों को गंभीरता से मानते हैं।
ग्रे लिस्ट और ब्लैक लिस्ट में क्या अंतर है?
ग्रे लिस्ट में उन देशों को रखा जाता है जो आतंकवाद या मनी लॉन्ड्रिंग से निपटने के लिए जरूरी कदम नहीं उठा रहे होते। इन देशों को चेतावनी दी जाती है कि वे सुधार करें, अन्यथा आगे कड़ी कार्रवाई होगी।
वहीं ब्लैक लिस्ट में शामिल देशों को अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थाओं से कोई आर्थिक सहायता नहीं मिलती। इन देशों की अर्थव्यवस्था और विदेशी निवेश दोनों पर इसका गंभीर असर पड़ता है।
भारत की रिपोर्ट में भी पाकिस्तान को बताया गया ‘हाई-रिस्क’ देश
एफएटीएफ की यह टिप्पणी उस समय आई है जब हाल ही में जैश-ए-मोहम्मद के आतंकवादी शिविरों को वित्तपोषित करने के लिए डिजिटल वॉलेट और क्रिप्टो लेनदेन का इस्तेमाल किए जाने की खबरें सामने आई हैं।
भारत के राष्ट्रीय जोखिम आकलन (National Risk Assessment) 2022 में भी पाकिस्तान को एक उच्च जोखिम वाले देश के रूप में चिन्हित किया गया था, जो आतंकवादी संगठनों को आर्थिक मदद का प्रमुख स्रोत है।
पाकिस्तान की मुश्किलें बढ़ सकती हैं
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर पाकिस्तान ने FATF की शर्तों का पालन नहीं किया तो उसे दोबारा ग्रे लिस्ट या ब्लैक लिस्ट में डाला जा सकता है। इससे उसकी अर्थव्यवस्था पर गंभीर असर पड़ेगा, जो पहले से ही संकट में है।
FATF का साफ संदेश है —
“आतंकी फंडिंग पर सख्ती नहीं की तो पाकिस्तान की निगरानी फिर शुरू होगी।”
ग्रे लिस्ट से बाहर आने के बावजूद पाकिस्तान के ऊपर अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं की नजरें टिकी हुई हैं। FATF की चेतावनी साफ इशारा करती है कि यदि इस्लामाबाद ने आतंकवाद के वित्तपोषण को नहीं रोका, तो उसकी साख और अर्थव्यवस्था दोनों पर बड़ा खतरा मंडरा सकता है।