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जम्मू-कश्मीर में बीजेपी 4 वोटों से जीती ! उमर अब्दुल्ला किस पर आत्मा बेचने के आरोप लगाए ?

जम्मू-कश्मीर में बीजेपी 4 वोटों से जीती

चार में से तीन सीटों पर नेशनल कॉन्फ्रेंस का दबदबा, बीजेपी को चौथी सीट पर अप्रत्याशित जीत उमर बोले “चार अतिरिक्त वोट कहां से आए?”

जम्मू-कश्मीर में बीजेपी 4 वोटों से जीती

जम्मू-कश्मीर में हुए राज्यसभा चुनाव के नतीजों ने प्रदेश की राजनीति में नई हलचल मचा दी है। कुल चार सीटों पर हुए मुकाबले में नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) ने तीन सीटें अपने नाम कीं, जबकि भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने एक सीट जीतकर अप्रत्याशित वापसी की है। एनसी की ओर से चौधरी मोहम्मद रमजान, सज्जाद अहमद किचलू, और गुरविंदर सिंह (शम्मी) ओबेरॉय विजेता बने, वहीं बीजेपी की ओर से सत शर्मा ने जीत दर्ज की।

नेशनल कॉन्फ्रेंस का प्रदर्शन – तीनों उम्मीदवारों ने मारी बाजी

पहली सीट पर चौधरी मोहम्मद रमजान ने शानदार जीत दर्ज की। उन्हें 58 वोट मिले, जबकि उनके प्रतिद्वंदी बीजेपी उम्मीदवार अली मोहम्मद मीर को केवल 28 वोट प्राप्त हुए। रमजान ने इस जीत के साथ अपनी राजनीतिक वापसी दर्ज कराई है । दूसरी सीट पर मुकाबला नेशनल कॉन्फ्रेंस के सज्जाद अहमद किचलू और बीजेपी प्रत्याशी राकेश महाजन के बीच हुआ। इस सीट पर भी एनसी को सफलता मिली किचलू को 57 वोट मिले जबकि महाजन को 28 वोटों पर ही संतोष करना पड़ा। हालांकि, एनसी का एक वोट तकनीकी कारणों से खारिज कर दिया गया।

तीसरी सीट पर दिलचस्प टक्कर देखने को मिली। एनसी ने यहां दो प्रत्याशी — जी.एस. (गुरविंदर सिंह) ओबेरॉय और इमरान नबी डार उतारे थे। इनके सामने बीजेपी ने सत शर्मा को मैदान में उतारा। ओबेरॉय को 31 वोट, इमरान डार को 21 वोट, जबकि सत शर्मा को 32 वोट मिले। यहीं से सारा विवाद शुरू हुआ, क्योंकि बीजेपी के पास कुल 28 विधायक हैं, लेकिन परिणामों में शर्मा को चार अतिरिक्त वोट मिले।

उमर अब्दुल्ला का आरोप

चुनाव नतीजों के बाद पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने एक्स पर ट्वीट करते हुए, बीजेपी पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने दावा किया कि “उनकी पार्टी के किसी भी विधायक ने क्रॉस वोटिंग नहीं की, और सवाल उठाया कि बीजेपी को अतिरिक्त चार वोट किससे मिले।” उमर ने लिखा,“हमारे सभी वोट वैध थे और किसी भी विधायक ने पार्टी लाइन से हटकर मतदान नहीं किया। तो सवाल यह है कि भाजपा को चार अतिरिक्त वोट कहां से मिले? क्या कुछ विधायकों ने जानबूझकर गलत वरीयता संख्या अंकित कर अपने वोट अमान्य करवाए?” उन्होंने यह भी कहा कि अब यह देखना होगा कि “भाजपा की गुप्त टीम में से कोई अपनी आत्मा बेचने की बात कबूल करता है या नहीं।”

राजनीतिक जानकारों के मुताबिक, यह अतिरिक्त समर्थन संभवत निर्दलीय विधायकों या पीपुल्स कॉन्फ्रेंस (PC) के गैर-भागीदारी वाले विधायकों से आया होगा। बताया जा रहा है कि पीसी ने चुनाव से दूरी बना ली थी, जिससे बीजेपी को अप्रत्याशित लाभ मिला।

 

वोटों का पूरा गणित

  • पहली सीट: चौधरी मोहम्मद रमजान (NC) – 58 वोट
    अली मोहम्मद मीर (BJP) – 28 वोट
  • दूसरी सीट: सज्जाद अहमद किचलू (NC) – 57 वोट
    राकेश महाजन (BJP) – 28 वोट (1 वोट अमान्य)
  • तीसरी सीट: जी.एस. ओबेरॉय (NC) – 31 वोट
    इमरान नबी डार (NC) – 21 वोट
    सत शर्मा (BJP) – 32 वोट (3 वोट अमान्य)

इस आंकड़े से स्पष्ट है कि बीजेपी को उसके अपने विधायकों के अलावा भी चार वोट मिले, जिसने उसकी जीत सुनिश्चित की।

चौधरी मोहम्मद रमजान

75 वर्षीय चौधरी मोहम्मद रमजान लंबे समय से नेशनल कॉन्फ्रेंस के वरिष्ठ नेता रहे हैं। वे चार बार विधायक और राज्य सरकार में मंत्री रह चुके हैं। 1983 में पहली बार हंदवाड़ा (कुपवाड़ा) से विधानसभा पहुंचे और तीन कार्यकाल तक उस सीट पर काबिज़ रहे। हालांकि, 2014 और 2024 के विधानसभा चुनावों में उन्हें सज्जाद लोन से हार का सामना करना पड़ा था। राज्यसभा में उनकी यह जीत राजनीतिक पुनर्स्थापना के रूप में देखी जा रही है।

सज्जाद अहमद किचलू: पिता की विरासत को आगे बढ़ाते हुए

सज्जाद अहमद किचलू, 60 वर्ष के, किश्तवाड़ जिले के एक प्रसिद्ध राजनीतिक परिवार से आते हैं। उनके पिता बशीर अहमद किचलू फारूक अब्दुल्ला सरकार में मंत्री रहे थे और 2001 में उनका निधन हो गया था। सज्जाद ने 2002 में राजनीति में प्रवेश किया और किश्तवाड़ सीट से चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे। 2008 में उन्होंने अपनी सीट दोबारा बरकरार रखी, हालांकि 2014 और 2024 में हार का सामना करना पड़ा। 2015 में वे विधान परिषद के सदस्य बने और अब राज्यसभा तक पहुंच गए हैं।

गुरविंदर सिंह (शम्मी) ओबेरॉय – जम्मू-कश्मीर के पहले सिख सांसद

नेशनल कॉन्फ्रेंस के कोषाध्यक्ष और सीनियर नेता गुरविंदर सिंह ओबेरॉय ने इतिहास रच दिया है। वे जम्मू-कश्मीर के पहले सिख राज्यसभा सांसद बने हैं। उनके पिता धर्मवीर सिंह ओबेरॉय पार्टी के वरिष्ठ नेता और विधान परिषद सदस्य थे, जिन्होंने उमर अब्दुल्ला के संसदीय चुनाव में अहम भूमिका निभाई थी।

बीजेपी की जीत सत शर्मा ने की अप्रत्याशित वापसी

बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष सत शर्मा ने चौथी सीट पर जीत हासिल की है। 64 वर्षीय शर्मा पेशे से चार्टर्ड अकाउंटेंट हैं और प्रदेश की राजनीति में संगठनात्मक अनुभव रखते हैं। वे 2015 से 2018 तक पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष रहे और पीडीपी-बीजेपी गठबंधन सरकार में मंत्री भी बने। 2014 में उन्होंने जम्मू पश्चिम सीट से विधानसभा चुनाव जीता था, लेकिन 2024 में हार का सामना करना पड़ा। राज्यसभा की यह जीत उनके लिए राजनीतिक वापसी का मौका मानी जा रही है।

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Anushka Pandey

Content Writer

Anushka Pandey as a Anchor and Content writer specializing in Entertainment, Histroical place, and Politics. They deliver clear, accurate, and engaging content through a blend of investigative and creative writing. Bagi brings complex subjects to life, making them accessible to a broad audience.

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