नेशनल कॉन्फ्रेंस प्रमुख ने केंद्र को चेताया – जितना ज्यादा दमन होगा, उतना बड़ा खतरा बढ़ेगा; लद्दाख की आवाज को दबाना मुश्किल।

लेह में हुई हिंसा के बाद नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि सरकार जितना ज्यादा बल का इस्तेमाल करेगी, उतना ही खतरा बढ़ेगा। फारूक ने साफ कहा कि समस्या का हल बातचीत से ही निकलेगा।
जब उनसे पूछा गया कि, क्या उनकी पार्टी हिंसा का समर्थन करती है, तो अब्दुल्ला ने कहा “नेशनल कॉन्फ्रेंस ने कभी गांधीवादी रास्ता नहीं छोड़ा। हमने पत्थर नहीं उठाए, बम नहीं फेंके। हां, बलिदान जरूर दिया है। लेकिन आगे हमारे बच्चे क्या करेंगे, ये मैं नहीं कह सकता।”
केंद्र सरकार से वादे निभाने की मांग –
अब्दुल्ला ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर से किए वादे पूरे नहीं किए। उन्होंने कहा कि राज्य का दर्जा देने का वादा किया गया था, लेकिन अब तक कुछ नहीं हुआ। उन्होंने सवाल उठाए, “नौकरियां कहां हैं? बाहर से लोगों को क्यों थोपा जा रहा है? सरकार को लद्दाख से सबक लेना चाहिए।”
कांग्रेस पर आरोपों को खारिज किया –
बीजेपी ने लेह हिंसा के लिए कांग्रेस को जिम्मेदार ठहराया था। इस पर अब्दुल्ला ने पलटवार करते हुए कहा “ये जिम्मेदारी से बचने की कोशिश है। 2019 से सत्ता में बीजेपी है, तो कांग्रेस कहां से आ गई? कांग्रेस 10 लोग भी इकट्ठा नहीं कर सकती। जो हो रहा है, उसके लिए दिल्ली जिम्मेदार है।”

यह जनता की आवाज है –
फारूक अब्दुल्ला ने साफ कहा कि “लेह की हिंसा में कोई बाहरी हाथ नहीं है। उन्होंने बताया, कि पिछले पांच साल से लद्दाख की जनता शांतिपूर्ण तरीके से 6 वीं अनुसूची और राज्य के दर्जे की मांग कर रही थी। लेकिन जब युवाओं को लगा कि वादे खोखले हैं, तो उनका गुस्सा फूट पड़ा।
गांधीवादी रास्ते पर चले –
सरकार ने लेह हिंसा के लिए सोनम वांगचुक को जिम्मेदार बताया। लेकिन अब्दुल्ला ने उनका बचाव किया। उन्होंने कहा कि “वांगचुक हमेशा गांधीवादी रास्ते पर चले हैं और हिंसा के लिए उन्हें दोषी ठहराना गलत है। “आज युवाओं ने उन्हें दरकिनार कर दिया है, लेकिन इसके लिए वे जिम्मेदार नहीं हैं।”
चीन का जिक्र –
फारूक अब्दुल्ला ने चेतावनी दी कि लद्दाख सीमा से सटा इलाका है, और चीन मौके की तलाश में है। उन्होंने कहा – “अगर यहां खालीपन रहा तो कोई और ताकत उसे भरने की कोशिश करेगी। दुनिया जानती है, कि चीन ने कितनी जमीन हथियाई है। सरकार कब तक सच्चाई छुपाएगी आख़िर? ”
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