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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू: सबरीमाला में दर्शन करने वाली पहली महिला और सेवारत राष्ट्रपति 2025

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू: सबरीमाला में दर्शन करने वाली पहली महिला और सेवारत राष्ट्रपति

केरल में एक ऐतिहासिक पल के रूप में, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने बुधवार को सबरीमाला के प्रसिद्ध भगवान अयप्पा मंदिर में पूजा-अर्चना की। इस यात्रा के साथ, द्रौपदी मुर्मू न केवल इस पवित्र स्थल पर दर्शन करने वाली पहली महिला राष्ट्रपति बनीं, बल्कि देश की पहली सेवारत राष्ट्रपति भी हैं जिन्होंने यह सौभाग्य प्राप्त किया। उनकी यह यात्रा भारतीय समाज में धार्मिक सहिष्णुता और परंपराओं के प्रति सम्मान का प्रतीक है।

सुरक्षित और सुगम यात्रा

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की सबरीमाला यात्रा के लिए पम्बा से सन्निधानम तक विशेष चार पहिया वाहन की व्यवस्था की गई थी। इस दौरान, त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड (TDB) और केरल पुलिस ने पूरे मार्ग पर सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम किए, ताकि यात्रा निर्बाध रूप से संपन्न हो सके। मंदिर पहुंचने पर, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने पारंपरिक रूप से 18 पवित्र सीढ़ियां चढ़ीं, जहाँ राज्य के देवस्वोम मंत्री वी.एन. वासवन और टीडीबी अध्यक्ष पी.एस. प्रशांत ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया।

विधिवत पूजा-अर्चना

मंदिर के गर्भ गृह में, मुख्य तंत्री कंडारारू महेश मोहनारू ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को ‘पूर्ण कुंभ’ से सम्मानित किया। इसके बाद, राष्ट्रपति ने श्रद्धापूर्वक अपने सिर पर पवित्र ‘इरुमुदी’ (पूजा सामग्री की गठरी) धारण की और भगवान अयप्पा के दिव्य दर्शन किए।

पूजा विधि के अनुसार:

    1. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और उनकी टीम ने अपनी ‘इरुमुदी’ मंदिर की पवित्र सीढ़ियों पर रखी।
    2. मुख्य पुजारी ने इस गठरी को विधिवत स्वीकार किया और संबंधित अनुष्ठान संपन्न कराए।

दर्शन और पूजा के उपरांत, राष्ट्रपति ने मलिकप्पुरम सहित आसपास के अन्य मंदिरों का भी भ्रमण किया। बाद में उन्होंने टीडीबी गेस्टहाउस लौटकर भोजन और विश्राम किया। इस विशेष यात्रा के दौरान, मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं के प्रवेश पर अस्थायी रोक लगाई गई थी ताकि सुरक्षा व्यवस्था बनी रहे।

 राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू

ऐतिहासिक महत्व

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की यह यात्रा कई मायनों में ऐतिहासिक है। जैसा कि पहले उल्लेख किया गया है, वह सबरीमाला में भगवान अयप्पा के दर्शन करने वाली पहली महिला राष्ट्रपति हैं। इससे पहले, 1970 के दशक में, तत्कालीन भारतीय राष्ट्रपति वी.वी. गिरि ने इस पवित्र स्थल का दौरा किया था, हालांकि वे डोली पर सवार होकर पहुंचे थे। द्रौपदी मुर्मू की यह यात्रा लैंगिक समानता और पारंपरिक बंधनों को तोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखी जा रही है।

सबरीमाला मंदिर: गहन धार्मिक महत्व

सबरीमाला मंदिर केवल एक पूजा स्थल नहीं, बल्कि भगवान अयप्पा का पवित्र निवास स्थान है और हिंदू धर्म में इसका अत्यधिक धार्मिक महत्व है।

    1. दिव्य उत्पत्ति: भगवान अयप्पा को भगवान शिव और भगवान विष्णु के स्त्री अवतार मोहिनी के पुत्र के रूप में पूजा जाता है, जिसके कारण उन्हें “हरि-हर पुत्र” भी कहा जाता है।
    2. धार्मिक सद्भाव: यह मंदिर वैष्णव (भगवान विष्णु के उपासक) और शैव (भगवान शिव के उपासक) दोनों परंपराओं का अनूठा प्रतीक है, जो हिंदू धर्म के भीतर एकता का संदेश देता है।
    3. लाखों श्रद्धालुओं का केंद्र: हर साल, देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु इस पवित्र पहाड़ी पर भगवान अयप्पा के दर्शन करने आते हैं, जिससे यह दुनिया के सबसे बड़े तीर्थस्थलों में से एक बन जाता है।
    4. 41 दिवसीय व्रत: मंदिर जाने से पहले, भक्त 41 दिनों का कठोर ‘मंडला’ व्रत रखते हैं। इस व्रत में संयम, शाकाहार, निरंतर प्रार्थना और सादगीपूर्ण जीवनशैली का पालन किया जाता है। इस कठिन अनुशासन को तीर्थयात्रा की शुद्ध तैयारी माना जाता है, जो श्रद्धालुओं को मन और शरीर से भगवान अयप्पा की भक्ति में पूरी तरह लीन होने में मदद करता है।

 

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Shashwat Srijan

Content Writer

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