PNB घोटाले के भगोड़े मेहुल चोकसी की मुश्किलें बढ़ीं: बेल्जियम कोर्ट ने खारिज की ‘अपहरण’ की दलीलें, भारत प्रत्यर्पण का रास्ता साफ
13,500 करोड़ रुपये के PNB घोटाले के मुख्य आरोपी और भगोड़े मेहुल चोकसी के मामले में भारत को एक बड़ी कानूनी जीत मिली है। बेल्जियम की एक अदालत ने चोकसी के ‘अपहरण’ और ‘राजनीतिक प्रताड़ना’ के दावों को झूठा बताते हुए उसके भारत प्रत्यर्पण का रास्ता साफ कर दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि अप्रैल में हुई उसकी गिरफ्तारी पूरी तरह कानूनी थी, जिसके बाद अब उसकी भारत वापसी की संभावनाएं प्रबल हो गई हैं। मुंबई की आर्थर रोड जेल में उसके लिए बैरक पहले से ही तैयार है।
भारत को मिली बड़ी राहत: भगोड़े मेहुल चोकसी का प्रत्यर्पण मार्ग प्रशस्त
बेल्जियम की एक अदालत ने 17 अक्टूबर को एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए भगोड़े हीरा कारोबारी मेहुल चोकसी के मामले में भारत के पक्ष में निर्णय दिया है। इस फैसले के बाद उसे भारत लाने में अब कोई कानूनी अड़चन नहीं है। यह भारत के लिए एक बड़ी कूटनीतिक और कानूनी जीत मानी जा रही है, क्योंकि यह 13,500 करोड़ रुपये के PNB घोटाले के आरोपी को न्याय के कटघरे में लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
क्यों खारिज हुईं मेहुल चोकसी की दलीलें?
बेल्जियम की अदालत ने अप्रैल में हुई मेहुल चोकसी की गिरफ्तारी को पूरी तरह सही ठहराया है। अदालत ने उसकी दलीलों को खारिज करते हुए कई अहम बातें स्पष्ट कीं:
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- नागरिकता का मुद्दा: कोर्ट ने साफ कहा कि चोकसी बेल्जियम का नागरिक नहीं है, बल्कि एक विदेशी नागरिक है।
- आरोपों की गंभीरता: उस पर लगे आरोप बेहद गंभीर हैं, जो भारत के कानून के तहत अपराध माने जाते हैं।
- बेल्जियम कानून से तालमेल: भारत द्वारा लगाए गए आरोप बेल्जियम के कानून के तहत भी अपराध की श्रेणी में आते हैं।
- न्याय उचित: इन तथ्यों के मद्देनजर, अदालत ने उसके भारत प्रत्यर्पण को पूरी तरह से उचित ठहराया है।
भगोड़े मेहुल चोकसी पर लगे गंभीर आरोप
भगोड़े मेहुल चोकसी पर भारतीय दंड संहिता (IPC) और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत कई गंभीर आरोप दर्ज हैं, जिनमें शामिल हैं:
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- आपराधिक साजिश: धारा 120B
- साक्ष्य मिटाना: धारा 201
- आपराधिक विश्वास भंग: धारा 409
- धोखाधड़ी: धारा 420
- खातों में हेरफेर: धारा 477A
- भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत विभिन्न धाराएँ
अदालत का मानना है कि चोकसी ने धोखाधड़ी, भ्रष्टाचार और फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल जैसे अपराधों में सक्रिय भूमिका निभाई है, जिससे वह एक आपराधिक गिरोह का हिस्सा माना जा सकता है।

‘अपहरण’ और ‘राजनीतिक प्रताड़ना’ के दावे हुए फ्लॉप
मेहुल चोकसी ने अदालत में अपनी गिरफ्तारी को लेकर एक नाटकीय दावा किया था। उसने कहा था कि उसे एंटीगुआ से अपहरण कर बेल्जियम लाया गया था, और यदि उसे भारत भेजा जाता है, तो उसे वहां राजनीतिक प्रताड़ना का सामना करना पड़ेगा। हालांकि, अदालत ने उसके इन दावों को पूरी तरह से खारिज कर दिया, क्योंकि वह इसके समर्थन में कोई ठोस सबूत पेश नहीं कर पाया।
भारत द्वारा दी गई जानकारी के आधार पर, कोर्ट ने बताया कि भगोड़े मेहुल चोकसी को मुंबई की आर्थर रोड जेल की बैरक नंबर 12 में रखा जाएगा और उसे केवल इलाज या अदालत में पेशी के लिए ही बाहर ले जाया जाएगा।
PNB बैंक घोटाले का मुख्य आरोपी मेहुल चोकसी एंटीगुआ से हुआ लापता#mehulchoksi #BankScam pic.twitter.com/9UvH0MPS8k
— News24 (@news24tvchannel) May 25, 2021
प्रत्यर्पण से बचने की सभी कोशिशें नाकाम
प्रत्यर्पण से बचने के लिए भगोड़े मेहुल चोकसी ने विभिन्न रिपोर्टें और अंतरराष्ट्रीय दस्तावेज पेश किए, लेकिन अदालत ने उनमें से किसी को भी मान्य नहीं माना। उसकी मुख्य दलीलें, जिन्हें अदालत ने सिरे से खारिज कर दिया, वे थीं:
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- व्यक्तिगत खतरे का दावा: चोकसी यह साबित नहीं कर पाया कि उसे भारत में कोई व्यक्तिगत खतरा है।
- न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर सवाल: उसने दावा किया कि भारत की न्यायपालिका स्वतंत्र नहीं है और मीडिया के दबाव के कारण उसे निष्पक्ष सुनवाई नहीं मिलेगी।
- अदालत का जवाब: इस पर अदालत ने कहा कि इतने बड़े वित्तीय घोटाले में जनता और मीडिया की दिलचस्पी होना स्वाभाविक है और यह न्याय प्रक्रिया को प्रभावित नहीं करता।
इस फैसले के साथ, 13,500 करोड़ रुपये के PNB घोटाले के आरोपी भगोड़े मेहुल चोकसी की भारत वापसी का मार्ग पूरी तरह से प्रशस्त हो गया है, जो भारतीय एजेंसियों के लिए एक बड़ी सफलता है।
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