दिल्ली की हवा 5 सालों में सबसे खराब ! सांस लेना भी हुआ मुश्किल ,ग्रीन’ पटाखे भी फेल
दिल्ली और एनसीआर में मंगलवार को इस सीजन की सबसे खराब हवा दर्ज की गई। दिल्ली में पीएम 2.5 (PM 2.5) का स्तर तेज़ी से बढ़ गया, जिसका सबसे बड़ा कारण दिवाली की रात बड़ी मात्रा में पटाखे जलाना रहा। मंगलवार शाम 4 बजे दिल्ली का औसत एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 351 तक पहुँच गया — जो “बेहद खराब” श्रेणी में आता है। गाजियाबाद, गुरुग्राम और नोएडा में भी हवा की गुणवत्ता 300 से ऊपर रही, जबकि दिल्ली के बवाना जैसे इलाकों में AQI 400 के पार चला गया।
देश के अन्य बड़े शहरों में भी हालात बेहतर नहीं हैं। मुंबई का औसत AQI 271 यानी “खराब” दर्ज किया गया, जबकि कोलकाता में यह 174 रहा — जो “मध्यम” श्रेणी में आता है। कोलकाता के कुछ इलाकों में भी पटाखों के कारण हवा “खराब” स्तर तक पहुँच गई।
दिल्ली की हवा ‘बेहद खराब’ श्रेणी में
दिवाली के बाद दिल्ली में वायु प्रदूषण का स्तर बहुत तेजी से बढ़ा है और शहर का औसत AQI 350 के पार चला गया है। इसके बावजूद अब तक GRAP-III (Graded Response Action Plan) लागू नहीं किया गया है।
साल 2021 में दिवाली के बाद हवा सबसे खराब दर्ज की गई थी, जब AQI 462 तक पहुँचा था। इस बार सुप्रीम कोर्ट ने 19 और 20 अक्टूबर को सीमित समय के लिए सिर्फ ‘ग्रीन पटाखों’ की अनुमति दी थी — जो सामान्य पटाखों की तुलना में लगभग 30% कम प्रदूषण फैलाते हैं। लेकिन इसके बावजूद लोगों ने रात देर तक जमकर पटाखे फोड़े।
दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण आयोग (DPCC) के आंकड़ों के अनुसार, लाजपत नगर के नेहरू नगर में PM 2.5 का स्तर रात 9 बजे 679 से बढ़कर 10 बजे 1,763 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर तक पहुँच गया — यानी सिर्फ एक घंटे में हवा में खतरनाक कणों की मात्रा कई गुना बढ़ गई। यही स्थिति दिल्ली के कई अन्य इलाकों में भी रही, जहाँ हवा “बेहद खराब” से “गंभीर” स्तर तक पहुँच गई।
“पहला स्मॉग दिखा” — विशेषज्ञों की चेतावनी
सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट (CSE) की विशेषज्ञ अनुमिता रॉयचौधरी ने बताया कि सोमवार रात पटाखों के बड़े पैमाने पर फूटने से इस सीजन का पहला “स्मॉग” यानी जहरीली धुंध देखने को मिली।
उन्होंने कहा — “सर्दियों की शुरुआत में ही दिल्ली की हवा ‘बेहद खराब’ से ‘गंभीर’ स्तर पर पहुँच गई है। अक्टूबर की शुरुआत से प्रदूषण धीरे-धीरे बढ़ रहा था, लेकिन 20 अक्टूबर को दोपहर से रात के बीच यह स्तर लगभग आठ गुना बढ़ गया। यह तब हुआ जब खेतों में पराली जलाने का असर 1-2% से भी कम था।” अनुमिता ने कहा कि आने वाले महीनों में केवल अस्थायी उपायों से काम नहीं चलेगा। अब लंबे समय तक असर करने वाली नीतियों और ठोस कदमों की जरूरत है ताकि प्रदूषण पर काबू पाया जा सके। रात में हवाएँ धीमी होने के कारण प्रदूषक ज़मीन के पास जमा हो गए, जिससे हवा और ज्यादा खराब होती गई।
SAFAR रिपोर्ट: “सुबह तक प्रदूषण चरम पर”
SAFAR के संस्थापक गुफ़रान बेग के अनुसार, सोमवार रात 9 बजे से प्रदूषण लगातार बढ़ता गया और मंगलवार सुबह 5 बजे तक अपने चरम पर पहुँच गया। सूरज निकलने और हवाएँ तेज़ होने के बाद प्रदूषकों में थोड़ी कमी आई।
मौसम विभाग के अनुसार, सुबह 3:30 से 5 बजे के बीच हल्का कोहरा छाया रहा और हवा शांत रहने से दृश्यता 600 मीटर तक घट गई। सुबह 6 बजे के बाद जब हवा की रफ्तार 10 किमी प्रति घंटा हुई, तब कुछ राहत मिली।

इस बार पराली जलाना नहीं, पटाखे बने बड़े दोषी
थोड़ी राहत की बात यह है कि इस बार दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण का बड़ा कारण पराली जलाना नहीं रहा। अक्टूबर की शुरुआत में हुई बारिश के कारण पराली जलाने की घटनाएँ कम रहीं। हालांकि चिंता अभी भी बनी हुई है क्योंकि कटाई का पीक सीजन अभी बाकी है।
पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अनुसार, पिछले 10 दिनों में पराली जलाने के मामलों में तीन गुना वृद्धि हुई है — 11 अक्टूबर तक कुल 116 घटनाएँ दर्ज की गईं।
दिवाली के बाद पीएम 2.5 में तीन गुना वृद्धि
दिवाली के 24 घंटे बाद दिल्ली का औसत पीएम 2.5 स्तर 156.6 से बढ़कर 488 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर हो गया — यानी लगभग तीन गुना वृद्धि।
आंकड़े बताते हैं कि 2021 से 2025 तक हर साल दिवाली के बाद हवा और ज्यादा प्रदूषित होती जा रही है
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