घर-घर में होगी रोशनी की बरसात, जानिए मां लक्ष्मी, भगवान गणेश और कुबेर जी की पूजा विधि, शुभ मुहूर्त और महत्व !

दिवाली 2025: जगमगाते दीप, खुशियों से भरे चेहरे और पूजा की मधुर ध्वनि…यही दृश्य होता है जब दीवाली, यानी प्रकाश पर्व मनाते हैं। यह त्योहार सिर्फ रोशनी का प्रतीक नहीं, बल्कि अंधकार पर प्रकाश, असत्य पर सत्य और अधर्म पर धर्म की विजय का प्रतीक है।
दिवाली हर साल कार्तिक मास की अमावस्या तिथि को मनाई जाती है। इस दिन लोग मां लक्ष्मी, भगवान गणेश, माता सरस्वती और भगवान कुबेर की पूजा करते हैं। हिंदू मान्यता के अनुसार, इस दिन भगवान श्रीराम 14 वर्ष का वनवास पूरा कर अयोध्या लौटे थे, और उनके स्वागत में पूरे नगर को दीपों से सजाया गया था। तब से यह परंपरा हर वर्ष निभाई जाती है।

दीवाली पर किन देवी–देवताओं की होती है पूजा
- मां लक्ष्मी – धन, समृद्धि और ऐश्वर्य की अधिष्ठात्री देवी।
- भगवान गणेश – शुभारंभ और बुद्धि के देवता।
- माता सरस्वती – ज्ञान, संगीत और विद्या की देवी।
- मां काली – शक्ति और नकारात्मक ऊर्जा से रक्षा करने वाली देवी।
- भगवान कुबेर – धन के रक्षक और देवताओं के कोषाध्यक्ष।
इन सभी की पूजा अलग-अलग उद्देश्य के साथ की जाती है, जिससे घर में सुख, शांति और समृद्धि बनी रहे।

लक्ष्मी–गणेश पूजन की विधि
- पूजा के लिए एक चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाएं।
- उस पर मां लक्ष्मी, भगवान गणेश, सरस्वती माता, भगवान कुबेर और राम दरबार की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें।
- लक्ष्मी जी की मूर्ति को भगवान गणेश के दाहिनी ओर रखें।
- पूजा स्थान पर कलश रखें, जिसमें जल, आम पत्ता, नारियल और मौली बांधी जाती है।
- दीपक को आग्नेय कोण (दक्षिण-पूर्व दिशा) में रखें — यह अग्नि देवता की दिशा मानी जाती है।
- अब सभी देवताओं को स्नान कराएं (अभिषेक) और चंदन, अक्षत, पुष्प, धूप, दीप और नैवेद्य अर्पित करें।
- फिर लक्ष्मी जी की श्रीसूक्त या लक्ष्मी स्तोत्र से पूजा करें।
- पूजा के बाद आरती करें और घर के हर कोने में दीपक जलाएं।
भगवान कुबेर की आराधना
लक्ष्मी पूजन के साथ ही भगवान कुबेर की पूजा भी दीवाली पर विशेष रूप से की जाती है। ऐसा माना जाता है कि जो व्यक्ति इस दिन कुबेर जी की आरती और पूजा श्रद्धा से करता है, उसके घर में धन और सौभाग्य की वृद्धि होती है। कुबेर भगवान की मूर्ति को उत्तर दिशा में स्थापित करें, क्योंकि यह उनकी दिशा मानी जाती है। पूजा में चावल, कमलगट्टे, मिठाई और सोने-चांदी की वस्तुएं अर्पित करें।
मां काली की पूजा
पूर्वी भारत, खासकर बंगाल में, दीवाली की रात काली पूजा के रूप में मनाई जाती है। मां काली को शक्ति का प्रतीक माना जाता है, जो अपने भक्तों को भय, नकारात्मकता और बुराई से मुक्त करती हैं।

कब मनाई जाएगी दिवाली 2025
इस वर्ष दिवाली सोमवार, 20 अक्टूबर 2025 को मनाई जाएगी। पंचांग के अनुसार, अमावस्या तिथि इसी दिन शाम 05:46 बजे से लेकर रात 08:18 बजे तक रहेगी। इस दौरान लक्ष्मी पूजन का शुभ प्रदोष काल मुहूर्त शाम 07:08 से रात 08:18 बजे तक रहेगा। वहीं निशिता काल मुहूर्त, जो तांत्रिक पूजा के लिए उपयुक्त माना जाता है, रात 11:41 से 12:31 बजे तक रहेगा।
वृषभ काल, जो लक्ष्मी पूजन के लिए सबसे शुभ माना जाता है, शाम 07:08 से रात 09:03 बजे तक रहेगा। इस समय देवी लक्ष्मी की कृपा सबसे अधिक मानी जाती है।

दीप जलाने की परंपरा और महत्व
दीवाली की रात दीपक जलाना सिर्फ एक परंपरा नहीं, बल्कि यह आध्यात्मिक संदेश है। “जैसे एक दीप अंधकार को मिटा देता है, वैसे ही ज्ञान और सद्भावना जीवन के अंधकार को दूर करती है।” लोग अपने घर, आंगन, मंदिर, बालकनी और चौखट पर दीप जलाते हैं ताकि लक्ष्मी जी का स्वागत हो सके। घी और सरसों के तेल से बने दो बड़े दीपक पूरे रात जलते रहने चाहिए। एक मंदिर में, दूसरा मुख्य द्वार पर।
दीवाली सामाजिक एकता का प्रतीक
दीवाली सिर्फ एक धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि सामाजिक एकता का भी प्रतीक है। इस दिन लोग एक-दूसरे से मिलने जाते हैं, मिठाइयाँ बांटते हैं, और पुराने गिले-शिकवे भूलकर नए रिश्ते बनाते हैं। यह त्योहार हमें सिखाता है कि सच्ची रोशनी हमारे भीतर की अच्छाई में है, और जब मन में प्रेम, करुणा और सकारात्मकता का दीप जलता है, तभी असली दिवाली होती है।
इस बार 5 नहीं, पूरे 6 दिन चलेगा दिवाली का धमाल! जानिए कब से कब तक रहेगा दीपोत्सव 2025 का जश्न
धीरेंद्र शास्त्री का पलटवार ‘दिवाली पर ज्ञान न पेले , हम बकरीद-ताजिए पर ज्ञान नहीं देते’