25 सितंबर को Navratri का चौथा दिन है — जानिए माँ कूष्माण्डा की पूजा विधि, शुभ रंग और वो रहस्य जिससे मिलता है स्वास्थ्य, ऊर्जा और समृद्धि का आशीर्वाद।
क्या आपने कभी सोचा है कि सिर्फ एक मुस्कान से ब्रह्मांड की रचना हो सकती है? नवरात्रि का चौथा दिन, माँ कूष्माण्डा की पूजा का विशेष दिन है वही देवी जिनकी दिव्य मुस्कुराहट से सृष्टि में पहला प्रकाश फैला था। मान्यता है कि इस दिन उनकी आराधना करने से अंधकार मिटता है, रोग और कष्ट दूर होते हैं और जीवन में ऊर्जा, स्वास्थ्य और समृद्धि का संचार होता है। आइए जानते हैं, क्यों माँ कूष्माण्डा को ‘ब्रह्मांड की जननी’ कहा जाता है और इस दिन की पूजा कैसे कर सकती है आपके जीवन को उजाले से भरपूर।
माँ कूष्माण्डा कौन हैं?
“कूष्माण्डा” नाम संस्कृत शब्दों से बना है — ’कु’ (थोड़ा) + ‘उष्मा’ (ऊर्जा / ताप) + ‘अंडा’ (अंडाकार / ब्रह्मांड) अर्थात् वह देवी जिनकी मुस्कान ने सम्पूर्ण ब्रह्मांड को ऊर्जा दी। वे अष्टभुजा देवी कहलाती हैं क्योंकि उनके आठ हाथ हैं। उनके हाथों में कमल, कमण्डल, धनुष-बाण, अमृत कलश, जपमाला, गदा, चक्र आदि हैं, और वे सिंह पर विराजमान हैं। धार्मिक मान्यता है कि जब सृष्टि अंधकार में डूबी थी, तो माँ कूष्माण्डा की मुस्कान से सारी धरा प्रकाशित हुई उन्होंने ब्रह्मांड की रचना की।
तिथि, रंग और शुभ मुहूर्त
नवरात्रि का चौथा दिन, इस दिन अधिकांश स्रोतों के अनुसार पीला / सुनहरा / हल्का पीला रंग इस दिन शुभ माना जाता है यह खुशी, प्रकाश और सकारात्मकता का प्रतीक भी है। पूजा करने के लिए दिन में विशेष समय (ब्राह्म मुहूर्त, अभिजीत, विजय मुहूर्त) निश्चित किए गया हैं।

पूजा विधि: चरण दर चरण
नीचे है वह विधि जिसे आप सरलता से अपनाकर श्रद्धा और भक्ति से माँ कूष्माण्डा की पूजा कर सकते हैं:
1. स्नान-शुभारंभ
सुबह जल्दी उठें, स्नान करें, स्वच्छ वस्त्र पहनें। पूजा स्थान को सफाई से तैयार करें।
2. घटस्थापना / कलश स्थापना
यदि आपने पहले से घट / कलश नहीं रखा हो तो वह रखें, उसमें जल, नौ प्रकार के अनाज (नवधान्य), सुपारी आदि सामग्री रखें।
3. मूर्ति अथवा चित्र स्थापना
माँ कूष्माण्डा की मूर्ति या चित्र को पूजा की चौकी पर स्थापित करें, पीले वस्त्र, पुष्प आदि से सजाएं।
4. मंत्र जाप एवं आह्वान
प्रसिद्ध मंत्र: “ॐ देवी कूष्माण्डायै नमः”
इसके अतिरिक्त स्तुति पाठ, दुर्गा चालीसा और सप्तशती आदि पढ़ें।
5. अभिषेक एवं अर्पण
पंचामृत (दूध, दही, घृत, शहद, गंगाजल) से अभिषेक करें। फिर कमल, मीठे फल, हलवा, मिष्टान्न आदि अर्पित करें।
6. दीप, धूप, आरती
दीप जलाएं, धूप करें और अंत में आरती करें। भक्तिमय भजन-कीर्तन वातावरण को पवित्र बनाते हैं।
7. प्रसाद वितरण व व्रत
भोग प्रसाद बाँटें और यदि व्रत रखे हों तो सामयिक (सात्विक) भोजन से दिन समाप्त करें।
8. ध्यान और मनन
पूजा के बाद ध्यान करें, माँ की कृपा, उनकी गुणधर्मों का विचार करें प्रकाश, ऊर्जा, सकारात्मकता की जीवन में प्राप्ति होगी।
महत्व और संदेश
उत्पत्ति और ऊर्जा का स्रोत: माँ कूष्माण्डा को माना जाता है कि उन्होंने अपनी मुस्कान से सृष्टि की उत्पत्ति की। यह उनका प्रकाश है जिसने अंधकार को दूर किया।
मन की शुद्धि: वे उन भक्तों की रक्षा करती हैं जो दुःख, रोग, निराशा और मानसिक तनाव से जूझते हैं। उनकी पूजा से शोक दूर होता है।
हृदय-चक्र का नियंत्रण: माना जाता है कि माँ कूष्माण्डा हृदय चक्र (अनाहत) पर शासन करती हैं, इसलिए वे प्रेम, संतुलन और आंतरिक ऊर्जा को जागृत करती हैं।
जीवन में नयी ऊर्जा: इस दिन देवी की कृपा से भक्ति, सकारात्मकता और जीवन के प्रति उत्साह बढ़ता है।

इस दिन और भी ख़ास बनाने के उपाय
पीले रंग का पहनावा: पीले या सुनहरे रंग के वस्त्र पहनें और पीले फूल अर्पित करें।
हल्का-सा व्रत: यदि व्रत रख रहे हैं, तो हल्का भोजन लें और सात्विकता बनाए रखें।
दान-पुण्य करें: जरूरतमंदों को भोजन, वस्त्र, पुस्तकें आदि दान करें।
भजन-कीर्तन और कथा: शाम को भजन-कीर्तन या कूष्माण्डा की कथा सुनें इससे वातावरण भक्तिमय हो जाएगा।
मन से आयोजनों में भाग लें: परिवार के साथ पूजन-पाठ, आरती आदि करें क्योंकि साथ का अनुभव गहरा बनाता है।
अनुभव और महसूस करें
चौथा दिन न केवल एक पौराणिक पूजा दिवस है, बल्कि आपके अंदर की ऊर्जा को जगाने, अज्ञान का अंधकार दूर करने और सकारात्मकता का सृजन करने का अवसर है। जब आप माँ कूष्माण्डा को आह्वान करते हैं, तो यह वही क्षण है जब भीतर की शक्ति, प्रकाश और भक्ति आपको प्रेरित करती है आगे बढ़ने को। यह दिन आपको याद दिलाता है कि एक मुस्कान से ब्रह्मांड बनाया गया और हर मुस्कुराहट आपके भीतर की दिव्यता को भी जगाती है।
नवरात्रि का चौथा दिन माँ कूष्माण्डा को समर्पित है वह देवी जिनकी मुस्कान से सृष्टि उज्जवल हुई। यदि आप इस दिन विधि-विधान, भक्ति और श्रद्धा से उपासना करें, तो उनका आशीर्वाद प्रकाश, ऊर्जा, स्वास्थ्य और सकारात्मकता आपके जीवन में अवश्य प्रवेश करेगा।
आपको इस पवित्र दिन की ढेरों शुभकामनाएँ — माँ कूष्माण्डा आपके जीवन में चमक, शक्ति और आनंद लाएँ। जय माँ कूष्माण्डा!