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मरते इंसानों को बचा रहे सूअर ! चीन ने इंसान के शरीर में लगाया सूअर का लिवर 

मरते इंसानों को बचा रहे सूअर ! चीन ने इंसान के शरीर में लगाया सूअर का लिवर

मरते इंसानों को बचा रहे सूअर

चीन ने इंसान के शरीर में सूअर का लिवर लगाया — 170 दिन तक जिंदा रहा मरीज

चीन एक बार फिर अपने हैरान कर देने वाले मेडिकल प्रयोगों से सुर्खियों में है। इस बार चीन के डॉक्टरों ने एक ऐसा काम कर दिखाया है, जिसने चिकित्सा विज्ञान की दुनिया में हलचल मचा दी है — डॉक्टरों ने पहली बार इंसान के शरीर में सूअर (पिग) का लिवर ट्रांसप्लांट किया है।

आश्चर्य की बात यह है कि यह मरीज बिना किसी बड़ी मुश्किल के 170 दिन तक जीवित रहा, जिसे अब तक का सबसे सफल “जेनोंट्रांसप्लांटेशन” (Xenotransplantation) माना जा रहा है।

 

क्या है जेनोंट्रांसप्लांटेशन?

जेनोंट्रांसप्लांटेशन एक मेडिकल प्रक्रिया है जिसमें एक प्रजाति (जैसे सूअर या बंदर) के अंग या ऊतक को दूसरी प्रजाति में प्रत्यारोपित किया जाता है।

पशु से मानव में अंग प्रत्यारोपण के प्रयास कई बार किए गए हैं, लेकिन इम्यून सिस्टम की दिक्कत , संक्रमण का खतरा और नैतिक मुद्दे इसकी सबसे बड़ी चुनौतियाँ रही हैं।

 

चीन के डॉक्टरों की ऐतिहासिक उपलब्धि

चीन के डॉक्टरों ने 71 वर्षीय एक मरीज पर यह सर्जरी की, जो लिवर कैंसर के आखिरी चरण में था।

ऑपरेशन में “डायनान नस्ल के छोटे सूअर” का लिवर इस्तेमाल किया गया। इसके लिए 10 बार जेनेटिक बदलाव (Genetic Modification) किए गए थे।

 

ऑपरेशन के बाद शुरुआती 38 दिनों तक सूअर का लिवर इंसान के शरीर में बिल्कुल सामान्य रूप से काम करता रहा।

बाद में मरीज के इम्यून सिस्टम और ब्लड वेसल्स में दिक्कतें आने लगीं। डॉक्टरों ने दवाइयों और ब्लड क्लीनिंग प्रक्रियाओं से स्थिति संभाली, लेकिन कुछ समय बाद मरीज के पाचन तंत्र में दिक्कत आने लगी ।

ऑपरेशन के 171वें दिन मरीज की मौत हो गई, लेकिन यह ट्रांसप्लांट आधुनिक चिकित्सा विज्ञान की दिशा में एक बड़ी सफलता साबित हुआ।

 

 जेनोंट्रांसप्लांटेशन का इतिहास

पशु से मानव अंग प्रत्यारोपण की कोशिशें 20वीं सदी की शुरुआत में ही शुरू हो गई थीं।

  • 1900 के दशक में खरगोश, बकरी और सूअर जैसे जानवरों के अंगों के प्रयोग किए गए, लेकिन सभी असफल रहे।
  • 1963–64 में चिंपांजी के गुर्दे और बाद में दिल के प्रत्यारोपण की कोशिश हुई, पर मानव शरीर ने अंग अस्वीकार कर दिए।
  • 1952 में बबून (Baboon) के दिल का प्रत्यारोपण किया गया था, जिससे मरीज 70 दिन तक जीवित रहा — यह उस समय बड़ी सफलता मानी गई थी।

 जीन एडिटिंग और CRISPR तकनीक क्या है?

सूअर के अंगों को इंसान के शरीर में अनुकूल बनाने के लिए जीन एडिटिंग (Gene Editing) तकनीक का उपयोग किया गया।

CRISPR (Clustered Regularly Interspaced Short Palindromic Repeats) एक ऐसी तकनीक है जो सूक्ष्मजीवों की रोग प्रतिरोधक प्रणाली पर आधारित है और वैज्ञानिकों को किसी जीव के DNA में सटीक बदलाव, जोड़ या हटाने की सुविधा देती है।

 वैज्ञानिकों की राय

अनहुई मेडिकल यूनिवर्सिटी के डॉक्टर बेइचेंग सन का कहना है —

“यह ऑपरेशन साबित करता है कि जेनेटिकली बदला गया सूअर का लिवर इंसान के शरीर में लंबे समय तक काम कर सकता है। हालांकि, हमें अभी भी खून जमने की गड़बड़ियों और इम्यून सिस्टम की समस्याओं पर काबू पाना होगा।”

 

 

 भविष्य में क्या है इसकी संभावना?

वैज्ञानिकों के अनुसार, यह प्रयोग अंगों की कमी से जूझ रहे हजारों मरीजों के लिए उम्मीद की नई किरण है।

ब्रिटेन में हालिया आंकड़ों के मुताबिक, करीब 896 मरीज ऑर्गन ट्रांसप्लांट का इंतजार कर रहे हैं, जिनमें से 650 से अधिक को लिवर की जरूरत है।

ऐसे में सूअर के अंगों का प्रयोग उन मरीजों के लिए जीवनदायी विकल्प बन सकता है, जो लंबे समय से डोनर की प्रतीक्षा में हैं।

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