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सच दिखाने की मिली सज़ा ! उत्तराखंड के निर्भीक पत्रकार राजीव प्रताप का शव झील से बरामद, परिवार का दावा- “धमकियों के बाद हत्या की गई!

सच दिखाने की मिली सज़ा ! उत्तराखंड के निर्भीक पत्रकार राजीव प्रताप का शव झील से बरामद, परिवार का दावा- “धमकियों के बाद हत्या की गई!”

 

 

उत्तराखंड के युवा और निर्भीक पत्रकार राजीव प्रताप सिंह की अचानक मौत ने पूरे प्रदेश और पत्रकार जगत को झकझोर कर रख दिया है। महज़ 36 साल की उम्र में अपनी पत्रकारिता से पहचान बनाने वाले राजीव का शव 28 सितंबर को उत्तरकाशी जिले की जोशियाडा झील से बरामद हुआ। वे 18 सितंबर की रात से लापता थे। पुलिस की शुरुआती जांच में मौत का कारण छाती और पेट की आंतरिक चोटें बताई गई हैं। शरीर पर बाहरी चोट या हमले के निशान नहीं मिले। हालांकि, परिवार ने इसे हत्या की साजिश करार दिया है और सीबीआई जांच की मांग की है। उत्तराखंड पुलिस ने मामले की तह तक पहुंचने के लिए विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है।

 

 

पत्रकारिता का सफर

 

राजीव प्रताप सिंह स्वतंत्र पत्रकार थे और उन्होंने डिजिटल प्लेटफॉर्म “दिल्ली उत्तराखंड लाइव” की शुरुआत की थी। उन्होंने नई दिल्ली के प्रतिष्ठित भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC) से पत्रकारिता की पढ़ाई की थी। उत्तरकाशी में रहते हुए राजीव ने उन मुद्दों को उठाया जिन्हें अक्सर मुख्यधारा की मीडिया अनदेखा कर देती है।

 

साहसिक रिपोर्टिंग की वजह से मिल रही थी धमकियां

 

उनकी रिपोर्टिंग ने कई बार सरकारी लापरवाहियों और अनियमितताओं को बेनकाब किया।

उन्होंने उत्तरकाशी जिला अस्पताल की खस्ता हालत, दवाओं की कमी को उजागर किया था ।एक रिपोर्ट में उन्होंने अस्पताल परिसर में शराबखोरी जैसी घटनाओं को सामने लाया। ऐसी साहसिक रिपोर्टिंग से उन्होंने न केवल जनता का ध्यान खींचा, बल्कि प्रशासन को भी कार्रवाई के लिए मजबूर किया। यही वजह थी कि परिवार का कहना है कि उन्हें लगातार धमकियां मिल रही थीं।

 

 

क्या बोले धामी और राहुल गांधी

 

राजीव की मौत पर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शोक जताते हुए निष्पक्ष जांच का भरोसा दिलाया। वहीं, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने भी ट्वीट कर दुख प्रकट किया और पारदर्शी जांच की मांग की। उन्होंने कहा कि ईमानदार पत्रकारों को असुरक्षा में काम करना पड़ रहा है, जो लोकतंत्र के लिए भी गंभीर चिंता का विषय है।

 

पत्रकार संगठनों की स्वतंत्र जांच की मांग

 

पत्रकार संगठनों की ओर से भी तीखी प्रतिक्रिया आई। प्रेस क्लब ऑफ इंडिया, दिल्ली यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स, और नेशनल एलायंस ऑफ जर्नलिस्ट्स ने स्वतंत्र जांच की मांग की है। अंतरराष्ट्रीय संगठन कमेटी टू प्रोटेक्ट जर्नलिस्ट (CPJ) ने भी कहा कि इस मामले में हर पहलू की जांच होनी चाहिए, चाहे यह सड़क हादसा हो या किसी धमकी का परिणाम।

 

क्या कहना है पत्नी का

 

राजीव प्रताप सिंह मूल रूप से उत्तरकाशी के रहने वाले थे। उनकी पत्नी मुस्कान का कहना है कि राजीव को कई बार जान से मारने की धमकियाँ मिली थीं और उनकी मौत कोई सामान्य दुर्घटना नहीं है।

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