दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा– “अफेयर अपराध नहीं, लेकिन पत्नी हर्जाना मांग सकती है”
दिल्ली हाईकोर्ट का ऐतिहासिक आदेश – रिश्ते में दखल देने वालों पर बन सकती है जिम्मेदारी।

शादीशुदा रिश्तों को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट ने हाल ही में एक अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कहा कि अगर किसी महिला को लगता है कि उसके पति और किसी दूसरी महिला के रिश्ते से उसकी शादी प्रभावित हुई है, तो वह उस महिला के खिलाफ सिविल कोर्ट में मुकदमा कर सकती है और हर्जाना भी मांग सकती है।
दरअसल, यह मामला एक पत्नी की शिकायत से जुड़ा है। उसने आरोप लगाया कि उसके पति की प्रेमिका ने उसकी शादीशुदा जिंदगी तोड़ दी। महिला का कहना है कि पति का प्यार और भरोसा कम हो गया और आखिरकार रिश्ता खत्म हो गया। इसी वजह से उसने प्रेमिका से 1 करोड़ रुपये का हर्जाना मांगा है। कोर्ट ने इस दावे को गंभीर मानते हुए प्रेमिका को अपना पक्ष रखने को कहा है।
हाईकोर्ट ने साफ किया कि अब व्यभिचार यानी एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर अपराध नहीं है। 2018 में सुप्रीम कोर्ट ने IPC की धारा 497 को खत्म कर दिया था, जिसमें पहले इसे अपराध माना जाता था। लेकिन कोर्ट ने यह भी कहा कि भले ही यह अपराध नहीं है, फिर भी अगर किसी तीसरे व्यक्ति की वजह से शादी टूटती है तो पत्नी को हर्जाना मांगने का अधिकार है।

यह केस “एलीनेशन ऑफ अफेक्शन” के सिद्धांत से जुड़ा है। इसका मतलब है कि अगर कोई व्यक्ति जानबूझकर पति-पत्नी के रिश्ते में दखल देता है और रिश्ता टूट जाता है, तो उस पर कानूनी जिम्मेदारी डाली जा सकती है।
इस मामले में महिला ने बताया कि 2012 में उसकी शादी हुई थी और 2018 में उसके जुड़वां बच्चे हुए। लेकिन 2021 में पति के कारोबार में दूसरी महिला आई और दोनों करीब आ गए। इसके बाद हालात बिगड़ते चले गए और अब मामला कोर्ट तक पहुंच गया है।
दिल्ली हाईकोर्ट का यह फैसला भारत में पहली बार ऐसा उदाहरण बन सकता है, जहां पत्नी सीधे पति की प्रेमिका से हर्जाना मांग रही है।
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