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चंद्र ग्रहण के दौरान भूल कर भी न करें ये गलती! जाने क्या है सूतक काल और ब्लड मून का रहस्य

7 सितंबर 2025 को साल का आखिरी पूर्ण चंद्र ग्रहण दिखेगा जिसे ब्लड मून कहा जाता है। जानिए सूतक काल, ग्रहण का टाइमटेबल, धार्मिक मान्यताएं और देखने के दौरान बरतने वाली सावधानियां।

7 सितंबर 2025 की रात आसमान एक ऐसा नज़ारा दिखाने वाला है जिसे आप मिस नहीं करना चाहेंगे। इस साल का आखिरी पूर्ण चंद्र ग्रहण न सिर्फ चाँद को रहस्यमयी लालिमा का रंग देगा, बल्कि आपको देखने को मिलेगा वो अद्भुत पल जिसे दुनिया “ब्लड मून” के नाम से जानती है। क्या होगा इस ग्रहण के दौरान? किस समय शुरू होगा सूतक? और क्यों माना जाता है इसे शुभ-अशुभ का संकेत?

चंद्र ग्रहण और सूतक का समय सबसे पहले समय की बात कर लेते हैं

सूतक काल: 7 सितंबर दोपहर 12:57 बजे से शुरू होकर ग्रहण समाप्ति तक चलेगा। परंपरा के अनुसार इस दौरान शुभ कार्य, खाना पकाना या धार्मिक अनुष्ठान करने से बचना चाहिए।

  • ग्रहण की शुरुआत: रात 9:58 बजे (आंशिक छाया पड़ना शुरू)।
  • पूर्ण ग्रहण / पीक टाइम: रात लगभग 11:41 से 11:42 बजे के बीच।
  • ग्रहण समाप्ति: अगले दिन 8 सितंबर, रात 1:26 बजे।
  • कुल अवधि: करीब 3 घंटे 28 मिनट।

यानी रात का बड़ा हिस्सा चाँद की इस रहस्यमयी छवि का गवाह बनेगा।

ब्लड मून क्यों कहा जाता है?

आप सोच रहे होंगे कि आखिर चाँद लाल क्यों दिखता है? असल में जब पृथ्वी, सूर्य और चंद्रमा के बीच सीधी रेखा में आ जाती है, तो पृथ्वी की छाया चाँद पर पड़ती है। इस दौरान पृथ्वी का वातावरण नीली रोशनी को रोक लेता है और लाल रंग की किरणें चाँद तक पहुँचती हैं। नतीजा—एक लाल, जादुई सा ब्लड मून! आज का ग्रहण भारत समेत एशिया, अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया और यूरोप के बड़े हिस्सों से देखा जा सकेगा। अच्छी बात यह है कि इसे बिना किसी खास चश्मे या उपकरण के देखना पूरी तरह सुरक्षित है।

आध्यात्मिक महत्व और परंपराएँ

ये ग्रहण सिर्फ वैज्ञानिक घटना नहीं है, बल्कि हमारे लिए धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से भी खास है। खासकर इसलिए क्योंकि यह पितृ पक्ष के दौरान पड़ रहा है।

सूतक काल में शुभ कार्य, पूजा, खाना बनाना, और तुलसी को छूना वर्जित माना जाता है। इस समय का उपयोग लोग जप, ध्यान, दान और मौन साधना में करते हैं। कई मंदिरों में इस दौरान कपाट बंदन (दरवाज़े बंद करना) की परंपरा होती है। आंध्र प्रदेश के कनक दुर्गा और अन्य प्रमुख मंदिरों में दोपहर से ही पट बंद रहेंगे। हालांकि कुछ खास मंदिर ऐसे भी हैं जो ग्रहण के समय बंद नहीं होते—इन्हें लेकर अपनी-अपनी मान्यताएँ जुड़ी हुई हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार गर्भवती महिलाएँ, छोटे बच्चे और बुज़ुर्गों को ग्रहण के दौरान खास सतर्कता बरतने की सलाह दी जाती है।

कैसे देखें यह अद्भुत नज़ारा?

  1. खुले आसमान वाला स्थान चुनें – छत, पार्क या ऊँचे इलाके बेहतरीन रहेंगे।
  2. नंगी आंखों से देखें – किसी चश्मे की ज़रूरत नहीं है।
  3. दूरबीन या साधारण टेलीस्कोप हो तो और मज़ा आएगा, चाँद की सतह और क्रेटर तक साफ दिख सकते हैं।
  4. फोटोग्राफी के शौकीनों के लिए टिप्स – ट्राइपॉड का इस्तेमाल करें, लंबा एक्सपोज़र सेट करें और लालिमा को कैद करने की कोशिश करें।
  5. सूतक का ध्यान रखें – परंपराओं का मान रखने वालों के लिए यह समय ध्यान और प्रार्थना का है।

विज्ञान और अध्यात्म का अनोखा संगम

आज की रात हमें याद दिलाती है कि ब्रह्मांड सिर्फ तारों और ग्रहों की हलचल नहीं है, बल्कि यह हमारे जीवन, संस्कृति और परंपराओं से गहराई से जुड़ा हुआ है। विज्ञान के नज़रिए से यह खगोलीय घटना है। अध्यात्म के नज़रिए से यह आत्मचिंतन और साधना का अवसर है। संस्कृति के नज़रिए से यह वह रात है जब हम अपने पूर्वजों को याद करते हैं और प्रकृति की लय से तालमेल बिठाते हैं।

झटपट जानकारी:

घटना समय (IST)

  • सूतक काल शुरू 12:57 PM (7 सितम्बर)
  • ग्रहण शुरू 9:58 PM (7 सितम्बर)
  • पूर्ण ग्रहण / पीक 11:41–11:42 PM
  • ग्रहण समाप्त 1:26 AM (8 सितम्बर)
  • कुल अवधि 3 घंटे 28 मिनट
  • क्या करें: ध्यान, दान, जप, आत्मचिंतन।
  • क्या न करें: शुभ कार्य, खाना बनाना, तुलसी को छूना, अनुष्ठान।

तो तैयार हो जाइए इस खूबसूरत खगोलीय घटना के लिए। चाहे आप इसे वैज्ञानिक जिज्ञासा से देखें, धार्मिक आस्था से या सिर्फ खूबसूरती के लिए।

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